भागलपुर के घटोरा वेटलैंड को रामसर साइट का दर्जा दिलाने की कवायद तेज, विदेशी पक्षियों से गुलजार हुआ जलक्षेत्र
भागलपुर के घटोरा आर्द्रभूमि को रामसर साइट का दर्जा दिलाने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है, जहां सर्दियों की ...और पढ़ें

विदेशी परिंदों से गुलजार हुआ जलक्षेत्र
HighLights
घटोरा आर्द्रभूमि को रामसर साइट का दर्जा दिलाने की पहल।
विदेशी प्रवासी पक्षियों, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड का आगमन शुरू।
जैव विविधता संरक्षण और ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा।
ललन तिवारी, भागलपुर। सर्दियों की आहट के साथ नवगछिया के सोनबरसा स्थित घटोरा आर्द्रभूमि में विदेशी मेहमान परिंदों का आना शुरू हो गया है। करीब 10 किलोमीटर के दायरे में फैले इस जलक्षेत्र में मौसम के अनुकूल होते ही पक्षियों का संसार चहकने लगा है।
इसी बीच, जैव विविधता से समृद्ध अंग की इस प्राकृतिक धरोहर को ईरान के रामसर शहर की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है।
बीते तीन अक्टूबर को जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय की अध्यक्षता में हुई जिला आर्द्रभूमि संरक्षण समिति की बैठक में घटोरा को रामसर स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल करने का निर्णय लिया गया था।
रेड क्रेस्टेड पोचार्ड और ग्रेलैग गूज की बढ़ने लगी आमद
वन विभाग के अनुसार, बिहार में सिर्फ घटोरा आर्द्रभूमि में पक्षियों की 75 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत प्रवासी हैं। सर्दियों में यहां दुर्लभ रेड क्रेस्टेड पोचार्ड की संख्या तीन हजार से अधिक और ग्रेलैग गूज की तादाद एक हजार से ज्यादा दर्ज की जाती रही है।
आर्द्रभूमि में उपलब्ध मछलियां और प्राकृतिक जलीय वनस्पतियां इन परिंदों को प्रचुर आहार और सुरक्षित वास उपलब्ध कराती हैं। इस जलक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलने से इसके वैज्ञानिक अध्ययन, जैव विविधता संरक्षण और क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
जीआइएस मैपिंग पूरी होते ही रामसर को जाएगा प्रस्ताव
जिला वन पदाधिकारी (डीएफओ) आशुतोष राज ने बताया कि तीन अक्टूबर की बैठक में तय कार्ययोजना के तहत स्थल के भू-अभिलेख और सीमांकन से जुड़े दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए बिहार राज्य आर्द्रभूमि समिति के जीआइएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) विशेषज्ञ की तकनीकी मदद ली जा रही है। राजस्व अभिलेख और डिजिटल मैपिंग का काम पूरा होते ही इसे रामसर सूची में शामिल कराने के लिए विधिवत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा।
क्या है रामसर कन्वेंशन
रामसर ईरान के उत्तरी हिस्से में कैस्पियन सागर के दक्षिणी तट पर स्थित एक शहर है, जहां दो फरवरी 1971 को दुनिया भर की झीलों, दलदलों, नदी-तटीय आर्द्रभूमियों और पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण व विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक वैश्विक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसे 'रामसर कन्वेंशन' के नाम से जाना जाता है और भारत एक फरवरी 1982 को इस संधि का सदस्य बना।
अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि (रामसर स्थल) घोषित होने के लिए नौ मानक निर्धारित हैं, जिनमें से किसी एक को पूरा करना अनिवार्य होता है; जबकि भागलपुर का घटोरा वेटलैंड इनमें से चार मानकों को पूरा कर रहा है।
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