आसमान से होगी गंगा की पड़ताल! बक्सर से फरक्का तक हवाई सर्वेक्षण, भागलपुर की बाढ़ के स्थायी समाधान पर वैज्ञानिक मंथन
Ganga Aerial Survey Buxar To Farakka: गंगा में लगातार बदलती धारा और गाद जमाव से होने वाली बाढ़ की समस्या ...और पढ़ें

Ganga Aerial Survey Buxar To Farakka: बक्सर से फरक्का तक गंगा का हवाई सर्वेक्षण आज; पटना में कल रिपोर्ट होगी पेश
HighLights
बक्सर से फरक्का तक गंगा का उच्चस्तरीय हवाई सर्वेक्षण।
बाढ़ और गाद समस्या के स्थायी वैज्ञानिक समाधान की खोज।
पटना में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वेक्षण डेटा प्रस्तुत होगा।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Ganga Aerial Survey Buxar To Farakka: गंगा की लगातार बदलती धारा, बढ़ते जल फैलाव और तलहटी में भारी मात्रा में जमा हो रही गाद (सिल्ट) के कारण भागलपुर सहित पूरे पूर्वी बिहार को हर साल तबाह करने वाली बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की कवायद अगले चरण में पहुंच गई है।
गुरुवार को बक्सर से भागलपुर होते हुए फरक्का तक गंगा नदी का उच्चस्तरीय हवाई सर्वेक्षण (एरियल सर्वे) किया जाएगा। इस दौरान विशेषज्ञ नदी के बदलते स्वरूप, गाद के जमाव और जल प्रवाह क्षेत्र की सटीक तकनीकी पड़ताल करेंगे।
इस सर्वेक्षण से प्राप्त उच्च-रिज़ॉल्यूशन की तस्वीरें और वीडियो फुटेज शुक्रवार को पटना में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किए जाएंगे। सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, नदी विशेषज्ञ और नीति निर्माता जल सुरक्षा, गाद प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के स्थायी वैज्ञानिक उपायों पर मंथन करेंगे।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस वर्ष बाढ़ के दौरान भागलपुर का दौरा करते हुए सार्वजनिक मंच से बाढ़ की समस्या का एक स्थायी तकनीकी समाधान निकालने का भरोसा दिया था। अब मुख्यमंत्री की उस घोषणा के अनुरूप जल संसाधन विभाग ने इस वैज्ञानिक जांच की पहल को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
वाल्मी के विशेषज्ञ जुटाएंगे वैज्ञानिक साक्ष्य
जल संसाधन विभाग, पटना मुख्यालय की जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) करुणा कृति ने बताया कि इस हवाई सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य गंगा के प्रवाह क्षेत्र, उसके फैलाव और नदी की गहराई में जमा गाद (सिल्ट) की वर्तमान स्थिति का सटीक आकलन करना है।
इस महत्वपूर्ण मिशन में जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी), पटना के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम शामिल है। ये विशेषज्ञ विशेष कैमरे और सर्वेक्षण उपकरणों के माध्यम से हवाई मार्ग से पूरी गंगा पट्टी की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग करेंगे।
इन विजुअल डेटा से नदी के मौजूदा स्वरूप, उसकी धारा में आ रहे मोड़ों और उथले हो चुके क्षेत्रों को गहराई से समझने में मदद मिलेगी। इस पूरी सर्वेक्षण रिपोर्ट को शुक्रवार को होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों के सामने विमर्श के लिए रखा जाएगा।
गाद और बदलते प्रवाह ने बढ़ाई भागलपुर की चुनौती
भागलपुर जिले में हर साल मॉनसून के दौरान गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते ही खेतों, दियारा क्षेत्रों, गांवों और एक बहुत बड़ी आबादी पर बाढ़ का भारी दबाव बन जाता है। नदी की बदलती धारा और कछारी क्षेत्रों में तेजी से जमा हो रही गाद ने इस चुनौती को और अधिक जटिल बना दिया है, जिससे नदी का तल उथला हो गया है और पानी का फैलाव रिहायशी इलाकों की तरफ तेजी से हो रहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब इस एरियल सर्वे और विशेषज्ञों के सम्मेलन के जरिए समस्या को पूरी तरह से वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर समझने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस सर्वेक्षण के बाद नदी की गहराई, तलछट (सेडिमेंटेशन) और जलप्रवाह के ऐतिहासिक व वर्तमान आंकड़ों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा, जिसके आधार पर ड्रेजिंग (गाद निकालने) और तटबंधों को मजबूत करने जैसी दीर्घकालिक योजनाओं का खाका तैयार होगा।
