फरक्का व गाद के समाधान को 29 को हवाई सर्वे, 15 नवंबर से ड्रोन मैपिंग; भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि पर पटना में मंथन
Bihar Ganga Siltation Aerial Drone Survey Farakka Barrage: बिहार सरकार गंगा में गाद जमाव और फरक्का बराज के कारण आने ...और पढ़ें

Bihar Ganga Siltation Aerial Drone Survey Farakka Barrage: गंगा नदी की धारा और बीच में उभरे विशाल गाद के टापू (दियारा); बिहार सरकार 29 अक्टूबर को बक्सर से फरक्का तक कराएगी हवाई सर्वे।
HighLights
29 अक्टूबर को बक्सर से फरक्का तक गंगा का विस्तृत हवाई सर्वेक्षण।
15 नवंबर से नदी तल की हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन 3D मैपिंग शुरू।
30 अक्टूबर को पटना में गंगा जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ सम्मेलन।
ललन तिवारी, भागलपुर। Bihar Ganga Siltation Aerial Drone Survey Farakka Barrage:गंगा के उथले पेट, पांच दशकों से निरंतर जमा हो रही करोड़ों टन गाद और फरक्का बराज के बैकवाटर से उपजी प्रलयंकारी बाढ़ की विभीषिका से बिहार को मुक्ति दिलाने के लिए राज्य सरकार ने सबसे बड़ा नीतिगत व वैज्ञानिक अभियान छेड़ दिया है। दो दिन बाद, 29 अक्टूबर को बक्सर से भागलपुर होते हुए फरक्का बराज तक गंगा का व्यापक हवाई सर्वेक्षण (एरियल सर्वे) कराया जाएगा।
आधुनिक सेंसर्स और हाईटेक कैमरों से लैस विमान के जरिए नदी की वास्तविक चौड़ाई, जलप्रवाह के बिखराव और गाद जमाव के संवेदनशील हिस्सों की सटीक तस्वीरें संकलित की जाएंगी।
इसके ठीक अगले दिन, 30 अक्टूबर को राजधानी पटना में ‘गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा’ विषय पर देश-विदेश के जल विशेषज्ञों का उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जुटेगा। इसके उपरांत 15 नवंबर से बक्सर से लेकर भागलपुर तक नदी के तल और किनारों की मिलीमीटर स्तर पर पड़ताल के लिए हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन से 3D मैपिंग शुरू की जाएगी।
भागलपुर में कब कितनी बाढ़: आंकड़े और प्रभाव
| वर्ष | उच्चतम जलस्तर | खतरे के निशान (33.68 मी.) से ऊपर | प्रमुख प्रभाव व जनजीवन पर असर |
| 1978 | 34.22 मीटर | +54 सेमी | नवगछिया व कहलगांव के तटवर्ती बहियार जलमग्न; रेल-सड़क संपर्क पहली बार व्यापक रूप से कटा। |
| 2013 | 34.50 मीटर | +82 सेमी | गंगा के तीव्र दबाव से सबौर और कहलगांव में भीषण भू-कटाव, हजारों एकड़ खड़ी फसल जलमग्न। |
| 2016 | 34.75 मीटर (सर्वकालिक रिकॉर्ड) | +1.07 मीटर | एनएच-31 और एनएच-80 पर कई फीट पानी चढ़ा; शहर के प्रवेश द्वारों तक बाढ़, लाखों लोग बेघर हुए। |
| 2019 | 34.36 मीटर | +68 सेमी | इस्माइलपुर-बिंदटोली स्पर और तटबंध पर गंभीर दबाव; दियारा के दर्जनों गांवों की आबादी का पलायन। |
| 2021 | 34.68 मीटर | +1.00 मीटर | स्थानीय बारिश न होने के बावजूद बैकवाटर से तिलकामांझी विवि परिसर, साहिबगंज व शहरी इलाके 3 हफ्ते डूबे रहे। |
| 2024 | 34.42 मीटर | +74 सेमी | सबौर व नवगछिया के कटाव निरोधी कार्य क्षतिग्रस्त; कहलगांव-पीरपैंती रेलखंड व दियारा क्षेत्र हफ्तों तक प्रभावित। |
| 2026 | 34.58 मीटर | +90 सेमी | फरक्का बैकवाटर व गाद जमाव से कोसी-गंगा संगम पर भारी उफान; राघोपुर जमींदारी बांध टूटा, इस्माइलपुर-रंगरा में विस्थापन। |
बीते माह बाढ़ के दौरान पीड़ितों का दर्द साझा करने भागलपुर आए मुख्यमंत्री ने जो स्थायी समाधान का भरोसा दिया था, जल संसाधन विभाग ने उसे धरातल पर उतारते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। विभाग के अभियंता प्रमुख ब्रजेश मोहन ने बताया कि हवाई सर्वेक्षण की कमान जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी), पटना के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंपी गई है। विभाग की पीआरओ करुणा कृति के अनुसार, सर्वे से प्राप्त सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों और आंकड़ों को 30 अक्टूबर के सम्मेलन में विशेषज्ञों के समक्ष रखा जाएगा।
दिसंबर 2026 की संधि से पहले तैयार हो रहे अचूक वैज्ञानिक साक्ष्य
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा और रणनीतिक आधार दिसंबर 2026 में अपनी 30 साल की मियाद पूरी कर रही ‘भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि’ है। जल संसाधन विभाग, पटना मुख्यालय की मुख्य अभियंता सीमा कुमारी के अनुसार, 1975 में फरक्का बराज के निर्माण के बाद से ही गाद निकासी की कोई ठोस या स्वचालित व्यवस्था नहीं होने के कारण गंगा नदी का तल निरंतर उथला होता गया है।
नदी का तल गाद से भर जाने के कारण उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल से आने वाला पानी बिहार के मैदानी इलाकों में फैलकर हर साल जान-माल की भारी तबाही मचाता है। चूंकि 1996 में हुई अंतरराष्ट्रीय जल संधि अब समीक्षा के मुहाने पर है, इसलिए बिहार सरकार हवाई व ड्रोन सर्वे के जरिए एक पुख्ता ‘साइंटिफिक डोजियर’ तैयार कर रही है, ताकि केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय पटल पर गाद निकासी (डिसिल्टेशन) और राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की मांग को अकाट्य तथ्यों के साथ रखा जा सके।
गंगा की वैज्ञानिक स्कैनिंग व नीतिगत रोडमैप: एक नजर में
29 अक्टूबर 2026: बक्सर से भागलपुर होते हुए फरक्का तक विशेष विमान से विस्तृत हवाई सर्वेक्षण (एरियल स्कैनिंग)।
30 अक्टूबर 2026: ज्ञान भवन/पटना में ‘गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा’ पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ सम्मेलन।
15 नवंबर 2026 से: बक्सर से भागलपुर तक हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन से नदी तल, धारा और तटबंधों की 3D टोपोग्राफिक मैपिंग।
नोडल तकनीकी एजेंसी: जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी), पटना।
केंद्रीय नीतिगत लक्ष्य: दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण से पहले केंद्र सरकार और अंतरराष्ट्रीय मंच पर गाद निकासी व जल सुरक्षा का पक्ष वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ रखना।
स्थानीय संदर्भ: मुख्यमंत्री द्वारा पिछले माह भागलपुर बाढ़ क्षेत्र के दौरे पर दिए गए स्थायी समाधान के भरोसे का धरातल पर क्रियान्वयन।
15 नवंबर से ड्रोन मैपिंग: तय होगा ड्रेजिंग और डिसिल्टेशन का खाका
हवाई सर्वे से नदी के व्यापक बहाव तंत्र का खाका मिलने के बाद 15 नवंबर से शुरू होने वाला ड्रोन सर्वे तकनीकी रूप से बेहद निर्णायक होगा। इसके तहत आधुनिक ड्रोन कैमरों से नदी तल, धारा के बीच में उभरे बड़े-बड़े टापुओं (सिल्ट आईलैंड) और संवेदनशील कटाव वाले तटबंधों की डिजिटल 3-डी मैपिंग की जाएगी।
इससे जल संसाधन विभाग को यह स्पष्ट डेटा मिलेगा कि नदी के किस हिस्से में कितनी गाद जमा है, कहां ड्रेजिंग करके चैनल को सीधा करना अनिवार्य है और किन तटबंधों पर पानी का सीधा दबाव बन रहा है।
"मुख्यमंत्री द्वारा भागलपुर में की गई घोषणा के अनुरूप स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कार्य शुरू हो चुका है। 29 अक्टूबर को बक्सर से फरक्का तक गंगा नदी के हवाई सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर 30 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बाढ़ और गाद प्रबंधन पर गंभीर विमर्श होगा। 15 नवंबर से शुरू होने वाले ड्रोन सर्वेक्षण के जरिए गंगा की तलछट, बीच धारा में उभरे टापुओं (दियारा) और कटाव वाले तटबंधों की विस्तृत थ्री-डी मैपिंग होगी। इससे यह साफ होगा कि किन हिस्सों में डिसिल्टेशन (ड्रेजिंग) जरूरी है और कहां पानी की निकासी बाधित हो रही है।"
