जागरण संवाददाता, भागलपुर। Father’s Day: देश में 20 जून को फादर्स डे मनाया जाएगा। यह दिन एक पिता के लिए खास दिन है। पिता-पुत्र के अटूट रिश्ते का यह महत्व दिन है। बेटे का आचरण पिता के प्रति जैसा भी हो, लेकिन पिता की नजर में बेटे के प्रति बालपन से लेकर युवा तक प्यार और स्नेह रहता है। कुछ ऐसी ही पिता-पुत्र का प्रेम कोरोना की दूसरी लहर में दिखा।

दरअसल, मोहद्दीनगर निवासी राकेश रंजन की केसरी की तबीयत अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में खराब हो गई। इसके बाद वह काफी डर गए। इंजीनियरिंग कॉलेज से सेवानिवृत पिता लक्ष्मी नारायण साह ने बेटे का हौसला आफजाई किया। 14 अप्रैल को उन्होंने कोरोना की जांच कराई। दो दिन बाद 16 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पॉजिटिव आने के बाद वह घबरा गए। ऑक्सीजन लेवल धीरे-धीरे कम होने लगा।

भागलपुर में ही इलाज कराने की सोच रहे थे, इस बीच पिता ने तुरंत एक निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। पिता का फर्ज निभाते हुए बाद बेटे और परिवार के दूसरे सदस्य के साथ सीधा सिलीगुड़ी के लिए निकल गए। उम्र ज्यादा होने के कारण हर किसी ने मना किया, लेकिन बेटे की चाहत की आगे किसी की नहीं सुनी। सिलीगुड़ी के एक निजी अस्पताल में बेटे को भर्ती कराया।

छह दिन तक आइसीयू में रहने के बाद स्वस्थ्य हो गए इसके बाद डिस्चार्ज कर दिया। एक सप्ताह तक सिलीगुडी के होटल में क्वारंटाइन रखने की सलाह चिकित्सों ने दी। 90 बसंत देख चुके पिता का हौसला नहीं कम सका। वह बेटे के बगल वाले कमरे में रहे। 26 अप्रैल को राकेश रंजन केसरी पूरी तरह स्वस्थ्य हो गए। इसके बाद पिता बेटे का लेकर वापस भागलपुर घर आए। राकेश रंजन केसरी बताते हैं कि पिताजी के आसपास कोरोना भटक भी नहीं सका। अभी पूरा परिवार पूरी तरह स्वस्थ हैं। आज लोग पिता और पुत्र के इस अटूट रिश्‍ते की चर्चा कर रहे हैं।

Edited By: Dilip Kumar Shukla