नाथनगर (भागलपुर)। बाढ़ और कटाव ने नाथनगर प्रखंड की रत्तीपुर बैरिया पंचायत अंतर्गत मोहनपुर दियारा और बिद टोली के लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। तेज कटाव के कारण लोगों में दहशत का माहौल है। लोग कटाव देख अपना घर तोड़कर सुरक्षित स्थानीय की ओर जाने लगे हैं। स्थिति यह है कि हरी सब्जियां लगे खेत नदी में विलीन हो रहे हैं। ऐसे में लोगों के समक्ष आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है।

यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन खेती और पशुपालन है। बाल-बच्चों के साथ कड़ी मेहनत के बाद भी सब्जियां बेचकर किसी तरह घर चलाते थे, लेकिन बाढ़ व कटाव ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

गंगा में हो रहे भीषण कटाव के कारण यहां के लोगों का आशियाना उजड़ रहा है। उपजाऊ जमीन नदी में कट रही है। कटाव से दर्जनों ग्रामीण विस्थापित और भूमिहीन हो गए हैं। परिणामस्वरूप उनकी आजीविका खेती भी छिन गई है और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए पीड़ित परिवार दिहाड़ी करने पर विवश हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद शासन और प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।

पंचायत का बिद टोली भी अब गंगा कटाव की जद में आने से महज 50 मीटर दूर रह गया है वहां के लोग भी गंगा के भयानक कटाव को देखकर दहशत में हैं। वे अभी से ही अपनी झोपड़ियों को सुरक्षित करने में लगे हैं।

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सैकड़ों बीघा में लगी सब्जी फसल गंगा में हुई विलीन

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मोहनपुर दियारा के पीड़ित शंकर मंडल, शिव नारायण मंडल, लक्ष्मी मंडल, खंतरी मंडल और तनिक लाल मंडल ने बताया कि 25-25 हजार में जमीन पट्टे पर लेकर परवल, भिडी, करेला, कद्दू और नेनुआ सब्जी के अलावा मक्का आदि की खेती कर रहे थे। इस बार की खेती की आय से बेटी की शादी का सपना संजोकर रखा था, पर कटाव के कारण सब फसल गंगा में विलीन हो गई। पूंजी लौटने की बात तो दूर रही अब घर-परिवार के लिए रोटी के जुगाड़ पर भी आफत आ गई है, लेकिन इस ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। पंचायत में नेता सिर्फ समय-समय पर वोट मांगने आते हैं। इसके बाद संकट की घड़ी में कोई देखने तक नहीं आता। गरीबों को सिर्फ भगवान पर ही भरोसा है।

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बाढ़ में बह गया था स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र

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पंचायत के सरपंच आशुतोष कुमार ने बताया कि विगत वर्ष भी गंगा में कटाव और भीषण बाढ़ के कारण मोहनपुर दियारा का स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र सब बह गया था। अब यहां बिजली के खंभे भी दिखाई नहीं पड़ते। या यूं कहें कि पंचायत का मोहनपुर गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। यही हाल बिद टोली की भी है।

बिदटोली के पीड़ित राम मंडल, सदानंद मंडल, उमेश और अंगेश मंडल ने कहा कि यहां बिजली, पानी, स्कूल और सड़क कुछ भी नहीं है। हर वर्ष बाढ़ और कटाव को झेल इस टोले के लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। हर वर्ष त्योहार की भांति आने वाली बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा ने कड़ी मेहनत के बाद भी विकास का रास्ता रोक दिया है। बाढ़ से बर्बाद हुए हर वर्ष लोग अपनी कमाई का आधा हिस्सा आशियाना बनाने में ही लगा देते हैं। बची हुई राशि बाढ़ में अपनी जिदगी बचाने में खर्च हो जाती है। आगे बेटी की शादी और बेटे की पढ़ाई का सपना धरा का धरा रह जाता है। अंत में पीड़ित ने कहा कि जो प्रभु की इच्छा होती है वहीं हर वर्ष झेलना पड़ता है।

Edited By: Jagran