JLNMCH के पूर्व अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास का निधन; कोरोना काल में संभाली थी कमान, गरीबों का करते थे मुफ्त इलाज
Dr AK Das Passes Away: जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के पूर्व अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास का ...और पढ़ें

Dr AK Das Passes Away: JLNMCH के पूर्व अधीक्षक डॉ. असीम दास का निधन
HighLights
जेएलएनएमसीएच के पूर्व अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास का निधन।
कोरोना महामारी के दौरान अस्पताल की व्यवस्था संभाली, सरकार ने सराहा।
गरीबों को मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रसिद्ध थे।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Dr AK Das Passes Away:जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जेएलएनएमसीएच), मायागंज के पूर्व अस्पताल अधीक्षक और मेडिसिन के जाने-माने विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. असीम कुमार दास का सोमवार की सुबह निधन हो गया। वे पिछले करीब दो वर्षों से असाध्य व गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उन्होंने बेंगलुरु में अपनी अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार मिलते ही अंग और संताल क्षेत्र सहित पूरे बिहार के चिकित्सा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
संताल रही प्रारंभिक कर्मभूमि, पटना से हुए थे रिटायर
मूल रूप से बांका जिले के सरैया गांव के रहने वाले डॉ. असीम कुमार दास का भागलपुर शहर के भीखनपुर में भी अपना निजी आवास है। संताल परगना का सुदूर ग्रामीण इलाका उनकी प्रारंभिक कर्मभूमि रहा, जहां उन्होंने वर्षों तक निष्ठापूर्वक स्वास्थ्य सेवाएं दीं। इसके बाद वे मायागंज अस्पताल में पहले उपाधीक्षक और बाद में अस्पताल अधीक्षक के पद पर आसीन रहे।
वे स्वास्थ्य उपनिदेशक, पटना के उच्च पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे अपनी इकलौती पुत्री अनुश्री के पास बेंगलुरु में ही रह रहे थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरु में ही संपन्न कराया जाएगा।
कोरोना काल में संभाला था मोर्चा, सरकार ने किया था सम्मानित
डॉ. असीम कुमार दास का कार्यकाल विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के उस भयावह और चुनौतीपूर्ण दौर के लिए याद किया जाएगा, जब वे जेएलएनएमसीएच के अधीक्षक पद की कमान संभाल रहे थे। उस संकट की घड़ी में उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था, ऑक्सीजन आपूर्ति और आइसोलेशन वार्डों का कुशल संचालन सुनिश्चित किया।
मरीजों की जान बचाने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में उनके इस अप्रतिम योगदान की राज्य स्तर पर सराहना हुई थी और बिहार सरकार द्वारा उन्हें विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया था।
मेडिसिन के धुरंधर, गरीबों का मुफ्त इलाज थी पहचान
डॉ. दास की मेडिसिन विषय पर असाधारण पकड़ थी। वे न केवल एक अत्यंत कुशल और अनुभवी चिकित्सक थे, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत व्यक्तित्व के धनी भी थे। उनके क्लिनिक और ओपीडी में आने वाले किसी भी गरीब या असहाय मरीज को बिना इलाज के नहीं लौटना पड़ता था।
वे जरूरतमंद मरीजों का न केवल नि:शुल्क परामर्श और इलाज करते थे, बल्कि कई बार अपने स्तर से दवाओं की व्यवस्था भी कराते थे। उनके निधन से चिकित्सा जगत ने एक कुशल प्रशासक, समर्पित चिकित्सक और सच्चे समाजसेवक को खो दिया है।
