जागरण संवाददाता, मधेपुरा ।  जिले के छह प्रखंडों में मक्का की फसल फॉल आर्मीवर्म कीट के कारण नष्ट होने की स्थिति में है। फॉल आर्मीवर्म कीट के कारण किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने का अनुमान है। किसानों को फॉल आर्मीवर्म कीट से फसल को बचाने के लिए कृषि विभाग की ओर से लगातार जागरूक करने को लेकर अभियान शुरू कर दिया गया है। पौधा संरक्षण के सहायक निदेशक सह अनुमंडल कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार तांती ने बताया कि जिले के आलमनगर, चौसा, बिहारीगंज, कुमारखंड, मुरलगंज में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप देखा जा रहा है।

नीम तेल का किसान करें छिड़काव

एहतियात के तौर किसानों को नीम का तेल छीड़काव करने को कहा गया है। मक्के की फसल को बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इस कीट का प्रकोप दो-तीन वर्ष के दौरान अधिक देखा जा रहा है। ऐसे में किसानों को पहले भी जागरूक किया गया था। उन्होंने बताया कि राज्य मुख्यालय से संयुक्त निदेशक पौधा संरक्षण ने फॉल आर्मीवर्म कीट की रोकथाम को लेकर कारगर कदम उठाने का निर्देश जारी किया है। राज्य मुख्यालय से मिले निर्देश के आलोक सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी फॉल आर्मीवर्म से प्रभावित हुई फसल का आकलन करने का निर्देश दिया गया है।

राज्य मुख्यालय को भेजी जाएगी रिपोर्ट

पौधा संरक्षण के सहायक निदेशक संजीव कुमार तांती ने बताया कि प्रखंड कृषि पदाधिकारी के द्वारा आकलन कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। प्रखंडों से रिपोर्ट आने के बाद जिले भर का एक रिपोर्ट तैयार कर राज्य मुख्यालय भेजा जाएगा। किसानों को नुकसान न हो इस दिशा में कृषि विभाग सकारात्म पहल कर रही है।

किसानों ने कहा बर्बाद  हो गई फसल

फॉल आर्मीवर्म कीट के कारण मक्के की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। किसानों का कहना है कि कोसी के इस इलाके में मक्का की फसल को कैश क्रॉप माना जाता था। लेकिन फॅाल आर्मीवर्म कीट कारण दो तीन वर्ष से यह खेती पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। फुलौत के किसान अरूण कुमार ङ्क्षसह ने बताया कि यह इलका पूरी तरह से बाढ़ के कारण प्रभावित होता है। ऐसे में यहां के किसान मुख्य रूप से मक्का की खेती करते हैं। यहीं फसल किसानों के आजीविका का आधार भी है। ऐसे में कीट लगने के कारण किसानों का काफी नुकसान हो रहा है। बिहारीगंज प्रखंड के जोरगामा के किसान मिथिलेश कुमार यादव और राजवल्लभ यादव ने बताया कि मक्का की फसल काफी अधिक पूंजी लगती है। महाजन से कर्ज लेकर मक्का की खेती की है। लेकिन कीट के कारण यह फसल अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। अब लागत भी नहीं निकल पाएगा। इसकी चिंता  सता रही है।