यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Deepawali: मिथिला की प्राचीन परंपरा है पितरों को प्रकाश तर्पण
Deepawali दीवाली के मौके पर मिथिला के लोग अपने पितरों को प्रकाश तर्पण देते हैं। यह काफी समय से चलता ...और पढ़ें

सहरसा, जेएनएन। दीपावली के अवसर पर दीप तो पूरे देश में जलाया जाता है, लेकिन मिथिला में दीप के अतिरिक्त संठी से बने उक्का-पांती जलाकर लक्ष्मी घर, दरिद्रता को बाहर करने की प्राचीन परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि मिथिला के लोग इस प्राचीन परंपरा के माध्यम से अपने पितरों को प्रकाश तर्पण देते हैं। यह काफी समय से चला आ रहा है।
प्रकाश तर्पण के माध्यम से परिवार के सुख समृद्धि की करते है कामना
शनिवार की संध्या दीपावली के पावन अवसर पर प्रखंड क्षेत्र में पूरे धूमधाम से लोगों ने अपने परिवार के साथ हुक्का पांती की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। हुक्का पांती में सन की लकड़ी का विशेष महत्व है। सन की लकड़ी संठी से खास तरह की आकृति का निर्माण कर अपने पूजा घर में जलने वाले दीप को स्पर्श कराते हुए लक्ष्मी घर और दरिद्र बाहर का जाप तीन बार करते हुए अपने परिवार के साथ हुक्का पांती जलाकर पितरों को प्रकाश तर्पण करते हैाा उनसे परिवार के सुख समृद्धि की कामना भी करते हैं।
गांव से लेकर शहर तक लोगों में था उमंग
इस प्राचीन परंपरा के निर्वहन में हर गांव घर में गजब की उत्साह होती हैा लोग इस त्योहार में स्वच्छता का खास ख्याल रखते हैंा घर आंगन की साफ सफाई अनिवार्य रूप से करते हैा जहां हुक्का पाती खेला जाता है यानि प्रकाश तर्पण किया जाता हैा उस स्थल की साफ सफाई की जाती हैा ताकि उक्त स्थल पर पवित्रता कायम रहेा
बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की भी है परंपरा
इस प्रकाश पर्व पर जहां पितरों को प्रकाश तर्पण देने की परंपरा हे, वहीं इस त्योहार में हुक्का पाती खेलने के बाद घर की बुजुर्ग महिला सभी का चुमावन कर उन्हेंं आशीष देते हैा फिर मिठाई खिलाते हैं इसके बाद हर परिवार के लाेेेग एक दूसरे के घर मिलने और आशीर्वाद लेने जाते हैा जो सामाजिक समरसता को कायम रखता हैा
