भागलपुर [राजेश भारती]। दूसरे प्रदेशों से अपने गांव लौट रहे प्रवासी मजदूरों की बेहद दर्दभरी तस्वीरें इन दिनों सामने आ रही हैं। ये लोग खाने-पीने के साथ बुनियादी जरूरतों के लिए भी तकलीफें झेल रहे हैं। लेकिन, इस दौरान ऐसे भी तमाम लोग हैं जो इनकी सेवा कर मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं। श्रमिक ट्रेनों से अपने गांव लौट रहे प्रवासियों की मदद के लिए नारायणपुर प्रखंड के दर्जन भर गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने मिलकर एक मुहिम शुरू की है।

ट्रेन आते ही दौड़ पड़ते हैं गांवों के बुजुर्ग, बच्चे और युवक

लंबे सफर पर निकले प्रवासियों को नारायणपुर स्टेशन पर ट्रेनों में भोजन-पानी और नाश्ता देकर उनकी तकलीफों पर मरहम लगा रहे हैं। बच्चों को दूध और बिस्कुट देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटा रहे हैं। नारायणपुर स्टेशन पर श्रमिक ट्रेनों के ठहराव की सूचना नहीं मिलने पर रेल अधिकारी से आग्रह कर ट्रेन रुकवाते हैं। ट्रेन आते ही गांवों के बुजुर्ग, बच्चे और युवक उन तक भोजन-पानी और नाश्ता पहुंचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं।

यह सिलसिला सुबह से देर रात तक चलता है। भोजन-पानी देने के बाद सुरक्षित अपने गांव-घर पहुंच जाने की दुआं-प्रार्थना भी करते हैं। ग्रामीणों का यह सेवाभाव देख वहां मौजूद रेल अधिकारी और पुलिस की आंखें भी खुशी से छलक उठती है।

हर घर में तैयार होता है प्रवासियों के लिए भोजन

ग्रामीण बतातें हैं कि स्थानीय रेल अधिकारी से संपर्क कर पहले ही यह पता कर लिया जाता है कि कटिहार-बरौनी रेलखंड से कितनी श्रमिक टे्रनें गुजरेंगी। इसके बाद एक हजार प्रवासियों के लिए भोजन-नाश्ता तैयार किया जाता है। इस कार्य में मधुरापुर, नारायणपुर, नवटोलिया, बलाहा समेत दर्जन भर गांवों के हर वर्ग-समुदाय का सहयोग रहता है।

सभी घरों में भोजन तैयार करके पैक किया जाता है, जिसके बाद ठेला और ऑटो से स्टेशन तक लाया जाता है। समाजसेवा से सभी उत्साहित होकर जुटे रहते हैं। सबकुछ निश्शुल्क दिया जाता है। 25 मई ईद के दिन से इसकी शुरुआत की गई, जो आगे तीस मई तक जारी रहेगी।

Posted By: Dilip Shukla

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