भागलपुर, संजय सिंह। करीब 86 साल बाद वही दृश्य, अतीत अपने को दोहराता हुआ। भूकंप में मुंगेर तबाह हो गया था। गांधी जी भागलपुर पहुंचे। एक बूढ़ी महिला सकुचाती हुई आगे आई और जीवन भर की जमा पूंजी एक रुपया उनकी हथेली पर रख दिया। गांधी जी की आंखों से आंसू टपक पड़े थे। ठीक वैसे ही इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर बच्चे अपनी पॉकेट मनी निकाल रहे हैं।

बड़ों को भरोसा दिला रहे बच्‍चे- हम जीतेंगे कोरोना से जंग

देश कोरोना से जूझ रहा है तो दान की महान भारतीय परंपरा में पले-बढ़े बच्चे भी इसी संस्कार के वशीभूत होकर आगे आ गए हैं। वे बड़ों को भरोसा दिला रहे- हम फिर जीतेंगे और जरूर जीतेंगे, यह कोरोना कौन-सी बड़ी बला है? सृष्टि, स्नेहा, निधि, प्रीतम उदाहरण हैं उन बच्‍चों के जिन्हें पिज्जा-बर्गर और मूवी नहीं, इस समय देश की चिंता है। जाने-माने गांधीवादी चिंतक, पूर्व सांसद और पूर्व कुलपति डॉ. रामजी सिंह कहते हैं, भागलपुर के बच्चों ने वह याद ताजा कर दी है। दृश्य और भाव दोनों ही समान हैं।

प्रधानमंत्री केयर फंड में दान कर रहे अपनी पॉकेट मनी

इन बच्चों को पॉकेट मनी के रूप में घर से जो कुछ भी मिलता है, उसे प्रधानमंत्री केयर फंड में दान कर रहे हैं। पांच से पांच सौ तक की रकम छोटी है, पर इसके पीछे का भाव देश को बड़ी ताकत दे रहा है। ये बच्चे खुद तो दान दे ही रहे, वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से साथियों को भी प्रेरित कर रहे हैं।

भागलपुर के माउंट असीसी स्कूल में पढऩे वाले छठी कक्षा के छात्र प्रीतम कुमार ने अपने सीनियर से प्रेरित होकर राहत कोष में पांच रुपया भेजा। सृष्टि, निधि, अनुष्का सिंह, स्नेहा सुमन, अश्विनी कुमार, प्रति सागर, राधिका त्रिपाठी व सिद्धार्थ सिंह ने पांच रुपये से लेकर 500 रुपये तक दान दिए हैं। राशि भेजने के लिए बच्चे पेटीएम का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पीएम की अपील से प्रभावित हो बनाया वॉट्सएप ग्रुप

श्वेतांक का कहना है कि लॉकडाउन के कारण देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। लोगों की भूख व बेबसी दिखाई पड़ रही है। किसी भी सरकार के लिए इस स्थिति से निपटना एक बड़ी चुनौती है। अनुष्का, स्नेहा व सृष्टि ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के 'मन की बात' को गौर से सुना। लगातार दो बार राष्ट्र के नाम उनकी अपील से प्रभावित होकर एक वॉट्सएप ग्रुप बनाया और राशि भेजने की अपील की।

खरदते थे मूवी टिकट व पिज्जा, अब करेंगे देश की मदद

इन बच्चों ने बताया कि वे अपनी पॉकेट मनी से मूवी के टिकट, पिज्जा आदि खरीदते थे। अब जब देश को जरूरत पड़ी है तो उनसे जो हो सकेगा, मदद करेंगे।

Posted By: Amit Alok

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