शाम-ए-भागलपुर का मनमोहक रूप! नारंगी-लाल रंग में रंगा शहर का क्षितिज; बांका में समय से पहले धान में निकली बालियां
Bihar Weather & Agri News: भागलपुर में सोमवार शाम अद्भुत सूर्यास्त का नजारा दिखा, जहां आसमान नारंगी-लाल रंगों से भर ...और पढ़ें

शाम-ए-भागलपुर: लालिमा से सिंदूरी हुआ आसमान
HighLights
भागलपुर में नारंगी-लाल रंगों से रंगा मनमोहक सूर्यास्त दिखा।
बांका के शंभूगंज में धान की बालियां समय से पहले निकलीं।
तेज हवा-बारिश से फसल गिरने का खतरा, किसान चिंतित।
डिजिटल डेस्क, भागलपुर। Bihar Weather & Agri News: सोमवार की शाम भागलपुर का पश्चिमी क्षितिज एक ऐसी अलौकिक छटा से जगमगा उठा, जिसने शहरवासियों को कुछ पलों के लिए मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान भास्कर जब अस्ताचल की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तो वातावरण में ऐसी गहरी लालिमा घुली मानो शहर के आसमान ने सिंदूर की चादर ओढ़ ली हो।
गहरे नारंगी, सुनहरे और सुर्ख लाल रंगों के सम्मिश्रण से सजी इस 'शाम-ए-भागलपुर' के विहंगम दृश्य को लोगों ने अपनी आंखों और कैमरों में कैद किया। किंतु प्रकृति के इस मनमोहक सौंदर्य के समानांतर, पड़ोसी जिले बांका के कृषि अंचल में मौसमी असंतुलन से उपजी एक नई चिंता ने दस्तक दे दी है।
शंभूगंज में 100% धान आच्छादन
बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र में किसानों ने तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद इस बार लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत धान की रोपनी पूरी की थी। इससे इस वर्ष बंपर उत्पादन की उम्मीद जगी थी, परंतु कई पंचायतों में फसल में निर्धारित समय से पूर्व ही बालियां निकलने से किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। प्रखंड की कुर्मा, बिरनौधा, पौकरी, गुलनी सहित दर्जनों पंचायतों के खेतों में धान की बालियां बाहर आने लगी हैं।
लेकिन समय से पहले फूटीं बालियां
किसान अशोक सिंह, मणी सिंह, कंपनी मंडल और मिक्की दास ने बताया कि इस सीजन में मॉनसून काफी कमजोर रहा। वर्षा के अभाव में निजी बोरिंग और पंपसेट चलाकर किसी तरह धान की रोपाई संपन्न की गई थी। किसानों ने खेतों में हाइब्रिड मुगदा, गौरव, सौरभ और गंगा कावेरी जैसी उन्नत किस्मों के बीज डाले थे।
अब भादो के अंतिम चरण और आश्विन के प्रारंभ में ही बालियां निकल आने से सबसे बड़ा डर यह है कि यदि तेज हवा के साथ बारिश हुई, तो भारी बालियों के बोझ से फसल खेत में ही बिछ (गिर) जाएगी। इसके साथ ही कई इलाकों में खेतों में खरपतवार की समस्या भी उत्पादन को प्रभावित कर रही है।
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110 दिनों का चक्र
फसल की स्थिति पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अंकित तिवारी ने पुष्टि की कि क्षेत्र में खरीफ फसलों का रकबा संतोषजनक रहा है और लक्ष्य के अनुसार शत-प्रतिशत आच्छादन हुआ है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के कृषि विज्ञानी संजय मंडल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान में लगाई गई अधिकांश हाइब्रिड किस्में लगभग 110 दिनों में पककर तैयार होती हैं।
मौसमी थपेड़ों से नुकसान की आशंका
पौधे की वृद्धि के अनुसार समय पर प्रजनन अवस्था (रिप्रोडक्टिव स्टेज) शुरू होना एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। हालांकि, विज्ञानी ने यह भी स्वीकार किया कि बालियां निकलते समय यदि तेज आंधी या मूसलाधार बारिश आती है, तो पौधों के तने टूटने और फसल के जमीन पर गिरने का जोखिम काफी बढ़ जाता है, जिससे दानों के बदरंग व खोखले होने का खतरा रहता है। किसान फिलहाल टकटकी लगाए मौसम के रुख पर नजर रखे हुए हैं।
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