ऑनलाइन डेस्क, भागलपुर। Bihar Transfer News: बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। कुल सात आईएएस अधिकारियों का तबादला किया गया है। वहीं, बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक का तबादला कर दिया गया। प्राथमिक शिक्षक निदेशक डॉ. रणजीत कुमार सिंह को पंचायती राज विभाग का डायरेक्टर बनाया गया है। इसको लेकर बिहार के शिक्षक अभ्यर्थी और शिक्षक काफी आहत हुए हैं।

बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों और शिक्षकों ने इंटरनेट मीडिया पर डॉ. रणजीत के तबादला रोकने के लिए बिहार सरकार से अपील की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे हमारी हर एक बात को प्रमुखता से सुनते और उसका निस्तारण करते आए हैं। 94 हजार शिक्षक बहाली का मामला अगर कोई और अधिकारी के पास होता, तो शायद आज भी पूरा न हो पाता। शिक्षक अभ्यर्थी कृष्णा कहते हैं, "बहुत आहत हूं। आंसू निकल रहे हैं। हम सर से मिलने जाते थे तो कभी नहीं लगा कि वो अधिकारी हैं। हमेशा भाई और बहनों की तरह हम शिक्षक अभ्यर्थियों को माना। हम जहां गलत कदम उठाए या दिशा भ्रमित हुए, आपने एक अभिभावक के रूप में हमारा मार्गदर्शन किया।

भागलपुर की पूनम के आंसू थम नहीं रहे। वो कहती हैं कि सर  हमारी पीड़ा सुनते थे। अब नए अधिकारी जिन्हें कमान मिली है। उन्‍हें तो कभी देखा ही नहीं है। लगता नहीं कि हमारी बहाली समय पर पूरी हो पाएगी। भागलपुर के पंकज उपाध्‍याय ने भी इनके तबादले पर दुख प्रकट किया है।

इसी तरह मृदुला, प्रिया, सपना समेत तमाम महिला अभ्यर्थियों ने अपनी अपनी बात रखी। इमरान ने कहा कि ये तबादला क्यों हुआ, नहीं जानता लेकिन जो कुछ हुआ है। वो गलत है। हम धरना प्रदर्शन करते रहे लेकिन कभी उन्होंने इस बात पर हमसे गुस्सा न किया। हंसकर कहते रहे कि राजनीति करनी है क्या। विनम्र स्वभाव के आईएएस अधिकारी का शिक्षा विभाग से जाना दुखद है।

शिक्षक अभ्यर्थियों ने आईएएस रणजीत का ट्रांसफर रोकने के लिए इंटरनेट मीडिया पर हैश टैग वी वांट डॉ. रंजीत आईएएस कम बैक का आह्वान किया है। बता दें कि बिहार में शिक्षक नियोजन की प्रक्रिया में डॉ. रणजीत ने महत्वपूर्ण रोल अदा किया है। धरातल से लेकर इंटरनेट मीडिया पर अभ्यर्थियों की समस्या को संज्ञान में लेते रहे हैं।

बहाली में पारदर्शिता को लेकर भी वे सक्रिय मोड में कार्यरत थे। हाल ही में मुंगेर की शिक्षक चांदनी के मामले में जहां इंटरनेट मीडिया पर आवाज उठाई गई, तत्काल रिप्लाई देते हुए कार्रवाई की बात की और बताया कि मामला माननीय हाई कोर्ट में लंबित है।

शिक्षक अभ्यर्थियों को इसी बात का मलाल है कि अब कौन उनकी मांगों को इस कदर सुनेगा। कौन ये प्रॉमिस करेगा कि बहाली में ईमानदारी और पारदर्शिता होगी। गैर जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जायेगी। कौन कोरोना काल में उनके डिजिटल आंदोलन में मेंशन किया जायेगा, क्योंकि अभी तक नियोजन पत्र मिला नहीं है।

Edited By: Dilip Kumar Shukla