राज्यसभा चुनाव में वोट क्यों नहीं दिया? बिहार के कांग्रेस विधायकों ने बताया पक्ष, बोले- हमारा कोई उम्मीदवार ही नहीं था
बिहार राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के चार विधायकों (तीन कांग्रेस, एक राजद) के मतदान से अनुपस्थित रहने से चुनावी समीकरण ...और पढ़ें
HighLights
चार विधायकों की अनुपस्थिति से बदला चुनावी गणित।
कांग्रेस विधायकों ने सिद्धांतों के आधार पर नहीं दिया वोट।
एनडीए ने बिहार की सभी पांचों सीटें जीतीं।
दिलीप कुमार शुक्ला, भागलपुर। बिहार में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की आवश्यकता थी, लेकिन महागठबंधन के चार विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। इनमें कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक शामिल बताए गए हैं। इनकी अनुपस्थिति ने चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया।
पांचवीं सीट पर थी कांटे की टक्कर
राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए इस चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। चार सीटों पर एनडीए की जीत संख्या बल के आधार पर पहले से तय थी, लेकिन पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था।
अनुपस्थिति से बदला चुनावी समीकरण
मतदान में शामिल नहीं होने वालों में कांग्रेस के वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा, कटिहार जिले के मनिहारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, अररिया जिले के फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनोज विश्वास तथा पूर्वी चंपारण जिले के ढाका विधानसभा के राजद विधायक फैसल रहमान शामिल हैं। इन चारों की अनुपस्थिति से महागठबंधन का गणित बिगड़ गया और एनडीए को निर्णायक बढ़त मिल गई।
दूसरी वरीयता से तय हुई जीत
पांचवीं सीट पर एनडीए उम्मीदवार शिवेश राम का मुकाबला राजद प्रत्याशी अमरेन्द्र धारी सिंह से था। प्रथम वरीयता में शिवेश राम को 30 और अमरेन्द्र धारी सिंह को 37 वोट मिले, लेकिन द्वितीय वरीयता के आधार पर शिवेश राम ने जीत दर्ज की।
वोट नहीं देने पर विधायकों का तर्क

मनिहारी से कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने कहा : वे अपने सिद्धांतों के आधार पर राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस उम्मीदवार को महागठबंधन का अधिकृत प्रत्याशी घोषित ही नहीं किया गया, उसे वोट देना उनके लिए उचित नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था और उन्होंने अपने विवेक से निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे सामाजिक रूप से कमजोर तबकों की राजनीति करते हैं और उसी सोच के तहत उन्होंने मतदान से दूरी बनाई।

फारबिसगंज से कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास : सोशल मीडिया के माध्यम से सफाई देते हुए कहा कि वे अब भी कांग्रेस के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने लिखा कि उन्होंने मतदान नहीं किया और किसी भी अन्य दल या प्रत्याशी से किसी प्रकार का लाभ नहीं लिया। उनका कहना है कि यह निर्णय उन्होंने आत्मसम्मान और अपने क्षेत्र की जनता के विश्वास को ध्यान में रखकर लिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि उनके इस फैसले से किसी को ठेस पहुंची है तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
एनडीए ने पांचों सीटों पर दर्ज की जीत
बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज की। विजयी उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, भाजपा के शिवेश राम और जेडीयू के रामनाथ ठाकुर शामिल हैं।
सामाजिक समीकरण का भी दिखा असर
एनडीए के विजयी उम्मीदवारों में एक सवर्ण, दो पिछड़ा, एक दलित और एक अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जिससे सामाजिक संतुलन भी परिलक्षित हुआ। खैर जो भी राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं करने वाले चोरों विधायकों की जमकर आलोचना हो रही है।
