संवाद सूत्र, धरहरा (मुंगेर)। बिहार पंचायत चुनाव: जिले की विभिन्न पंचायतों में मतदाताओं को अपनी ओर रिझाने की होड़ सी मची है। प्रत्याशियों हर तरह का हथकंडा अपना रहे हैं। कहीं पर चुनावी तिकड़म तो कहीं सादगी के साथ विकास के वायदे को हथियार के रूप में अपनाया जा रहा है, कुछ ऐसे भी प्रत्याशी हैं जो सहयोग का आश्वासन देकर गोलबंद कर रहे हैं। इसके इतर गांव के लोग जीत हार का आकलन करते हुए अपना ओपिनियन पोल (Opinion poll) भी बना रहे हैं। 

निवर्तमान जनप्रतिनिधियों को पूर्ण रूपेण मतदाताओं पर भरोसा दिख रहा है। पांच साल तक जनता का काम किए हैं तो इस बार भी जनता मालिक का इनाम और आर्शीवाद जरूर मिलेगा। कुछ ऐसी ही बातों के साथ सभी चौक-चौराहों से लेकर खेत-खलिहानों तक में चुनावी चर्चा का दौर शुरू हो गया है। चाय की चुस्की के साथ चढ़ा चुनावी तापमान इन दिनों खासकर गांवों की चाय की दुकानों पर दिनभर चाय की चुस्की के साथ चुनावी तापमान का उतार-चढ़ाव चल रहा है। जातीय समीकरण बनाकर चुनाव का नतीजा निकालने में मशगूल दिख रहे हैं। हरेक प्रत्याशियों के समर्थक अपने-अपने हिसाब से लोगों के समीप थोथी दलील पेश करते हुए अपने आप को जिताऊ उम्मीदवार घोषित करने में लगे हैं। निवर्तमान जनप्रतिनिधियों के समर्थक अपने-अपने ग्राम पंचायत में हुए विभिन्न विकास कार्यों को गिनाकर आम जनता को अपने पाले में लाने की कोशिश में लग गए हैं।

दबंगई छोड़ गरीब गुरबों के दर पर दे रहे दस्तक

चुनाव में देखा गया है कि दबंग प्रत्याशियों का दबदबा रहता है। इसको गलत साबित करते हुए इनके समर्थक चुनावी गाथा लोगों को सुनाने में लगे हैं। लोग पंचायत चुनाव में खड़े होने वाले संभावित दबंग प्रत्याशियों की चर्चा करने से भी नहीं चूक रहे हैं। चुनाव में जीत का सेहरा अपने माथे पर सजाने के लिए कई दबंग भी अपनी दबंगई को छोड़ नए हथकंडे के साथ मतदाताओं को रिझाने की तैयारी में हैं। चर्चा में प्रमुखता से यह सवाल उठ रहा है कि अब तक जिनके दरवाजे पर खड़े होने की हिम्मत नहीं होती थी, वहां आज गरीब गुरबों को बगल में बैठाकर चाय की चुस्की के साथ सबसे बड़ा हितैषी साबित कर रहे हैं।

Edited By: Shivam Bajpai