कटिहार [नीरज कुमार]। पंचायत चुनाव गांव की राजनीति को प्रभावित करने का काम करती है। भले ही यह चुनाव दलीय आधार पर नहीं लड़ा जाता हो, लेकिन स्थानीय राजनीिित दिग्गजों का अपने चहेते प्रत्याशियों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहयोग रहता है। चुनावी रंग में नाते रिश्ते भी धुल रहे हैं। कहीं ससुर दामाद तो कहीं चाचा भतीजा चुनावी मैदान में एक दूसरे से दो दो हाथ करने की तैयारी करने की तैयारी कर रहे हैं। भले ही आपसी रिश्ते कितना भी मजबूत हो।

-चच्चा ने दिया धोखा, पटखनी देने भतीजा भी बिछा रहा बिसात

- चुनावी रंग में धुल रहे नाते रिश्ते, गौण हो चुकी चर्चा की भी बह रही चुनावी बयार

- महीं ससुर दामाद तो कहीं चाचा भतीजे के बीच चुनावी जंग

चुनावी रणनीति में भड़ास निकालने व पूर्व के गौण हो चुके चर्चे व पुराने मामलों की भी चुनावी बयार बह रही है। ऐसा कहा जाता है कि भीतर की बात तो भीतर वाला ही जाने। चुनाव प्रचार एवं इसकी तैयारी के बीच भी प्रत्याशियों को यह चिंता सताए जा रही है। कोढ़ा प्रखंड के एक पंचायत में चाचा व भतीजा मुखिया पद के चुनाव में आमने सामने हैं। भतीजे का कहना है कि चाचा ने उन्हें धोखा दिया है। पिछले चुनाव में चच्चा के कहने पर ही चुनाव मैदान में नहीं कूदे थे।

लेकिन इस बार हर हाल में चुनाव लड़ेंगे। नामांकन भी कर चुके हैं। उधर चाचा भी अपनी उम्र का हवाला देकर अंतिम बार चुनाव लडऩे की बा त कहते हुए नामांकन करने के बाद भी भतीजे से समर्थन करने को कह रहे हैं। जिद पर अड़े भतीजा पांच साल और इंतजार करने से इंकार कर रहे हैं। पुराने मामले स्थानीय स्तर पर एक दूसरे पर लगे आरोप को भी भुनाने की तैयारी की जा रही है। एक दूसरे को चुनावी मैदान में पटखनी देने को हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। नाते रिश्तेदारों का चुनाव मैदान में आमने सामने होने से पंचायत चुनाव का अलग रंग भी कई पंचायतों में देखा जा रहा है।

 

Edited By: Abhishek Kumar