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उद्घाटन से पहले ही दरकी 4000 करोड़ की मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

Published: Sat, 26 Sep 2026 07:22 PM (IST)

मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन (NH-33) पर 4000 करोड़ की लागत से बनी सड़क में उद्घाटन से पहले ही दरारें और मिट्टी का कटाव देखा गया है।

गंगापुर के समीप निर्माणाधीन मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन की सड़क में पड़ी करीब 50 मीटर लंबी दरार और धंसता किनारा। (जागरण)

गंगापुर के समीप निर्माणाधीन मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन की सड़क में पड़ी करीब 50 मीटर लंबी दरार और धंसता किनारा। (जागरण)

HighLights

  1. 4000 करोड़ की मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन में उद्घाटन से पहले दरारें।

  2. पहली बारिश में ही सड़क किनारे मिट्टी का कटाव शुरू।

  3. स्थानीय लोगों ने सड़क की गुणवत्ता जांच की मांग की।

संवाद सूत्र, अकबरनगर। जिस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च कर क्षेत्र के विकास और बिहार से झारखंड व पश्चिम बंगाल तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी का दावा किया जा रहा है, उसकी हकीकत पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में है।

मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन (एनएच-33) पर वाहनों के परिचालन से पहले ही सड़क में लंबी दरार और किनारे की मिट्टी धंसने लगी है।

पैकेज-2 के तहत सुल्तानगंज-अकबरनगर-भागलपुर मार्ग में गंगापुर के पास उत्तरी लेन में सड़क के बीचोंबीच करीब 40 से 50 फीट लंबी और करीब दो इंच चौड़ी दरार दिखाई दे रही है। दरार को जूट के बोरे से भरने का प्रयास भी किया गया है। सड़क के किनारे की मिट्टी भी तेजी से धंस रही है।

पहली बारिश में ही सामने आई खामी 

124 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में भी चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि पहली बारिश में ही सड़क के किनारे मिट्टी का कटाव और धंसाव सामने आ गया है।

लगातार बारिश होने पर स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। लोगों ने संबंधित विभाग से दरार की तत्काल तकनीकी जांच, सड़क की गुणवत्ता की जांच और आवश्यक सुधार कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि अरबों रुपये की परियोजना को परिचालन में लाने से पहले सड़क की मजबूती और सुरक्षा मानकों की पूरी तरह जांच होनी चाहिए।

जिम्मेदारी तय होगी या सिर्फ लीपापोती? 

मुंगेर से भागलपुर होते हुए मिर्जाचौकी तक बनने वाली इस फोरलेन परियोजना का निर्माण चार पैकेज में कराया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण समेत अन्य कारणों से परियोजना पहले ही विलंबित है।

अब निर्माणाधीन सड़क में दरार आने से सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नवंबर तक सड़क के कुछ हिस्सों को चालू करने की तैयारी के बीच लोगों का सवाल है कि क्या महज ऊपरी मरम्मत कर सड़क को परिचालन के लिए खोल दिया जाएगा या निर्माण में खामी की तकनीकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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