बिहार में मखाना के साथ होगी मछली पालन की एकीकृत खेती; BAU सबौर के 11 संस्थानों को मिले ₹1.05 करोड़
Bihar Makhana Farming Scheme: बिहार में मखाना उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने के लिए मखाना और मछली पालन की एकीकृत ...और पढ़ें

Bihar Makhana Farming Scheme: BAU सबौर सिखाएगा मखाना की वैज्ञानिक खेती! 750 किसानों को आधुनिक प्रशिक्षण
HighLights
मखाना-मछली की एकीकृत खेती को मिलेगा बढ़ावा।
BAU सबौर के 11 संस्थानों को ₹1.05 करोड़ स्वीकृत।
750 किसानों को मिलेगा आधुनिक खेती का प्रशिक्षण।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार के पारंपरिक मखाना उत्पादक किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें खेती के सहायक विकल्पों से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की परियोजना के तहत अब राज्य में मखाना उत्पादन के साथ-साथ मछली पालन और अन्य जलीय फसलों की समेकित (एकीकृत) खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के क्षेत्राधिकार में आने वाले 11 कृषि संस्थानों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के वास्ते 1.0498 करोड़ रुपये (लगभग 1.05 करोड़) की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है।
44 जलक्षेत्रों पर एकीकृत खेती, 750 किसानों को ट्रेनिंग
परियोजना के तहत अंग और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के 44 चिन्हित जलक्षेत्रों में किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से मखाना और मछली पालन की संयुक्त खेती सिखाई जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से कुल 750 किसानों को प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले मखाना बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छह प्रमुख इकाइयों में उन्नत किस्म के बीजों का उत्पादन और वैज्ञानिक भंडारण किया जाएगा।
योजना का बजट व लक्ष्य: एक नजर में
कुल स्वीकृत राशि: ₹1.0498 करोड़ (लगभग ₹1.05 करोड़)।
संबद्ध संस्थान: बीएयू सबौर के 11 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) व शोध संस्थान।
प्रशिक्षित होने वाले किसान: 750 किसान।
एकीकृत खेती का दायरा: 44 चयनित जलक्षेत्र (मखाना + मछली पालन)।
बीज उत्पादन इकाइयां: 06 इकाइयां (प्रति हेक्टेयर लागत: ₹1.58 लाख)।
मखाना संग मछली पालन पर व्यय: ₹88 लाख।
बीज उत्पादन पर व्यय लक्ष्य: ₹9.48 लाख।
किसान प्रशिक्षण पर खर्च: ₹7.50 लाख।
पूर्णिया को आवंटन: ₹18.82 लाख (सर्वाधिक - 4 इकाइयां व 450 किसान)।
भागलपुर KVK को आवंटन: ₹4.30 लाख (30 किसान प्रशिक्षण व 2 तकनीक डिमॉन्स्ट्रेशन)।
विभाग ने बीज उत्पादन के लिए प्रति हेक्टेयर 1.58 लाख रुपये की उत्पादन लागत निर्धारित की है। इस पूरी कार्ययोजना का क्रियान्वयन विश्वविद्यालय के अधीन कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों और कृषि कॉलेजों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
पूर्णिया को सबसे बड़ा पैकेज, भागलपुर में खर्च होंगे ₹4.30 लाख
संस्थानवार आवंटन में सीमांचल के पूर्णिया जिले को सबसे बड़ी हिस्सेदारी मिली है। भोला पासवान शास्त्री कृषि कॉलेज, पूर्णिया को मखाना के उन्नत बीज उत्पादन की चार इकाइयों की स्थापना और 450 किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए सबसे अधिक 18.82 लाख रुपये की राशि दी गई है। इसके अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र सुपौल और कटिहार में 6-6 तथा अररिया और किशनगंज में 5-5 स्थानों पर किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
वहीं, भागलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (सबौर) को इस कार्ययोजना के संचालन के लिए 4.30 लाख रुपये का फंड मिला है। इस राशि से 30 प्रगतिशील किसानों को उन्नत मखाना उत्पादन का आवासीय/गैर-आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिस पर 30 हजार रुपये खर्च होंगे।
शेष चार लाख रुपये की लागत से दो अत्याधुनिक तकनीकी प्रदर्शन (डिमॉन्स्ट्रेशन) आयोजित किए जाएंगे। इसके जरिए किसानों को पोषक तत्वों का वैज्ञानिक उपयोग, कीट व रोग नियंत्रण, जल प्रबंधन और फसल कटाई उपरांत मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के गुर सिखाए जाएंगे।
मखाना किसानों की तकदीर बदलेगी नई तकनीक: कुलपति
बीएयू सबौर के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने बताया कि मखाना की पारंपरिक खेती को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ना विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मखाना के खेतों में मछली पालन को एकीकृत करने से किसानों की जोखिम क्षमता घटेगी और कम लागत में दोहरा मुनाफा हासिल होगा।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक खेतों में सीधे जाकर किसानों को उन्नत बीज, जल प्रबंधन और रोग नियंत्रण की जानकारी देंगे, जिससे बिहार का मखाना अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरकर वैश्विक बाजार में अपनी पहचान और मजबूत कर सकेगा।
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