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बिहार के घटौरा वेटलैंड को मिलेगी इंटरनेशनल पहचान, रामसर साइट घोषित करने की तैयारी तेज

Published: Sun, 04 Oct 2026 12:12 PM (IST)

भागलपुर के बिहपुर प्रखंड स्थित घटौरा आर्द्रभूमि को रामसर साइट घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिलाधिकारी की ...और पढ़ें

घटोरा वेटलैंड। फाइल फोटो

घटोरा वेटलैंड। फाइल फोटो

HighLights

  1. घटौरा आर्द्रभूमि को रामसर साइट घोषित करने की तैयारी शुरू।

  2. जिलाधिकारी ने प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र भेजने का निर्देश दिया।

  3. पर्यावरणीय संतुलन और जैव-विविधता संरक्षण पर जोर दिया गया।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। गंगा पार बिहपुर प्रखंड स्थित घटौरा आर्द्रभूमि को रामसर साइट घोषित कराने की तैयारी शुरू हो गई है।

शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला आर्द्रभूमि संरक्षण समिति की बैठक में इसका प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र सक्षम स्तर पर भेजने का निर्देश दिया गया।

बिहार राज्य आर्द्रभूमि समिति के GIS विशेषज्ञ से तकनीकी सहयोग लेकर प्रस्ताव में जरूरी तथ्य और मानचित्र शामिल करने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने कहा कि आर्द्रभूमियां पर्यावरणीय संतुलन, जैव-विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण हैं।

इनके संरक्षण-संवर्धन के लिए विभागों में बेहतर समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है। जिले में कम से कम एक आर्द्रभूमि को आर्द्रभूमि संरक्षण अधिनियम, 2017 के तहत शीघ्र अधिसूचित करने के लिए प्रस्ताव तैयार करें।

संबंधित विभाग को समन्वय से कार्य करें और संरक्षण-संवर्धन की प्रभावी कार्ययोजना के अनुसार कार्रवाई करें। बायोडायवर्सिटी पार्क के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि के चिह्नित करने की प्रक्रिया में भी तेजी लाएं।

बैठक में अपर समाहर्ता, राजस्व, वन प्रमंडल पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी समेत संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा

जिलाधिकारी ने जिले की सभी आर्द्रभूमियों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया।

कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक पहल करने को कहा गया।

संबंधित अंचल अधिकारियों को आर्द्रभूमि क्षेत्रों के भू-अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया, ताकि संरक्षण और अधिसूचना की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

क्या है रामसर साइट?

रामसर साइट अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि को दिया जाने वाला दर्जा है। ऐसे स्थलों को जलपक्षियों, जैव-विविधता और पारिस्थितिकी के संरक्षण में महत्व के आधार पर अंतरराष्ट्रीय सूची में शामिल किया जाता है।

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