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बिहार में बाढ़ की आपदा के बीच किताबों से यारी, राहत शिविरों में खेल-खेल में सीख रहे बच्चे 

Published: Sun, 13 Sep 2026 11:43 AM (IST)

बाढ़ की विभीषिका के बीच भागलपुर के बरारी पॉलिटेक्निक कॉलेज राहत शिविर में बच्चों की पढ़ाई जारी है। खेल-खेल में ...और पढ़ें

पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में राहत शिविर में पढ़ाई करते बाड़ पीड़ित बच्चे। जागरण

पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में राहत शिविर में पढ़ाई करते बाड़ पीड़ित बच्चे। जागरण

HighLights

  1. भागलपुर राहत शिविर में बच्चों की पढ़ाई जारी।

  2. खेल, सवाल-जवाब, चित्रकला से सीख रहे बच्चे।

  3. बाढ़ के बावजूद शिक्षा का क्रम नहीं टूटा।

परिमल सिंह, भागलपुर। बाढ़ की विभीषिका के बीच बरारी पालिटेक्निक कालेज के राहत शिविर में बच्चों की खिलखिलाहट सुनाई दे रही है। कोई आसमान में उड़ने वाली चीजों के नाम बता रहा है तो कोई पानी में रहने वाले जीवों की पहचान कर रहा है।

शिक्षक पूछते हैं—बिहार के मुख्यमंत्री कौन हैं, भागलपुर की डीएम कौन हैं और वैभव सूर्यवंशी कौन हैं? सवाल सुनते ही बच्चों के हाथ जवाब देने के लिए उठ जाते हैं। कुछ देर के लिए बाढ़ की चिंता पीछे छूट जाती है और पंडाल में स्कूल जैसा माहौल बन जाता है।

नारायणपुर और नाथनगर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों के लिए राहत शिविर में ही पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। एक ही पंडाल में कक्षा एक से आठ तक के 136 बच्चों की विशेष कक्षाएं चल रही हैं।

बाढ़ के कारण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का क्रम न टूटे, इसके लिए यहां खेल, सवाल-जवाब और अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से उन्हें पढ़ाया जा रहा है।

सवालों में छिपी है पढ़ाई की नई राह

कक्षा में बच्चों से किताबी सवालों के साथ उनके आसपास की दुनिया से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। आसमान में क्या उड़ता है, पानी में कौन-कौन से जीव रहते हैं, बिहार के मुख्यमंत्री कौन हैं और भागलपुर की डीएम कौन हैं—बच्चे उत्साह से जवाब देते हैं। इस तरीके से छोटे बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ रही है। बड़े बच्चे भी छोटे बच्चों के जवाब सुनकर उत्साहित होते हैं।

रंगों से भर रहे कल्पना की दुनिया

शिविर में पढ़ाई सिर्फ किताब और कापी तक सीमित नहीं है। चित्रकला के जरिए बच्चों की रचनात्मक क्षमता को उभारा जा रहा है। कागज पर रंग भरते हुए बच्चे अपनी कल्पनाओं को आकार दे रहे हैं।

चेतना सत्र में उन्हें योग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों को स्वस्थ रहने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की जानकारी दी जा रही है।

बाढ़ के बीच बनी दोस्ती की नई दुनिया

नारायणपुर और नाथनगर से आए बच्चे अब एक साथ पढ़ रहे हैं, खेल रहे हैं और एक-दूसरे के दोस्त बन गए हैं। अलग-अलग जगहों से आए इन बच्चों के लिए राहत शिविर सिर्फ रहने की जगह नहीं रहा।

यहां पढ़ाई के साथ खेल, योग, चित्रकला और आपसी मेल-जोल ने उन्हें बाढ़ की मुश्किल परिस्थितियों के बीच सामान्य माहौल देने की कोशिश की है। कन्या प्राथमिक विद्यालय जोगसर के प्रधानाध्यापक अमरेश कुमार को शिविर का प्रभारी बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि शिविर में 136 बच्चों का नामांकन है। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए विशेष कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जा रहा है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि बनी रहे।

बच्चों को मिल रहा स्कूल जैसा माहौल

शिविर में पढ़ने वाली छात्रा सुमित्रा कुमारी बताती हैं कि यहां स्कूल जैसी ही सुविधा मिल रही है। शिक्षक बेहतर तरीके से पढ़ाते हैं। पढ़ाई के साथ योग और चित्रकला की गतिविधियां भी अच्छी लगती हैं। बाढ़ के कारण घर और स्कूल से दूर होने के बावजूद साथियों के साथ पढ़ने का मौका मिल रहा है।

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