स्वर्ग से हाजिरी लगाने नहीं पहुंचे 2 दिवंगत शिक्षक; शिक्षा विभाग ने थमाया नोटिस, पूछा- ट्रेनिंग में क्यों नहीं आए?
Bhagalpur Education Department Show Cause To Dead Teachers: भागलपुर शिक्षा विभाग ने मृत शिक्षकों को प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने पर ...और पढ़ें

Bhagalpur Education Department Show Cause To Dead Teachers: प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
भागलपुर शिक्षा विभाग ने मृत शिक्षकों को नोटिस भेजा।
ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं हुआ।
डीईओ ने प्रखंड स्तर की चूक बताई।
संवाद सूत्र, अकबरनगर (भागलपुर)। Bhagalpur Education Department Show Cause To Dead Teachers: सरकारी महकमों की फाइलें जब आंख मूंदकर दौड़ती हैं, तो ऐसे कारनामे सामने आते हैं कि सिर पकड़ने के सिवा कोई चारा नहीं बचता।
भागलपुर में शिक्षा विभाग का डिजिटल सिस्टम ऐसा 'चमत्कारी' निकला कि जो शिक्षक साल भर पहले ही दुनिया छोड़ चुके हैं, विभाग उन्हें आज भी अपनी फाइलों में बाकायदा 'ऑन ड्यूटी' मानकर बैठा है।
हद तो तब हो गई जब स्वर्ग सिधार चुके इन शिक्षकों को पांच दिवसीय ट्रेनिंग में नहीं आने पर बकायदा अनुशासनहीन मान लिया गया और नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया गया— "बताइए, आप ट्रेनिंग में क्यों नहीं आए?"
परलोक से ट्रेनिंग करने कैसे आते शिक्षक?
मामला टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, भागलपुर का है। यहां 5 से 9 अक्टूबर तक शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण संपन्न होने के बाद जब हाजिरी की पड़ताल हुई, तो अनुपस्थित शिक्षकों की एक लंबी सूची तैयार की गई।
इसके बाद बिहार शिक्षा परियोजना, भागलपुर की ओर से 14 अक्टूबर को एक फरमान निकला, जिसमें गैरहाजिर शिक्षकों से शो-कॉज मांगा गया। लेकिन जब यह सूची स्कूलों तक पहुंची, तो शिक्षकों का माथा ठनक गया। सूची में उन दो शिक्षकों के नाम भी शान से दर्ज थे, जिनका निधन बीते साल 2025 में ही हो चुका है।
2025 में हुई थी मौत
पहला मामला नवगछिया के तेतरी निवासी शिक्षक अमर कुमार का है। वे अकबरनगर थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय दामोदरपुर में अनुकंपा पर पदस्थापित थे। गंभीर बीमारी के चलते 6 अप्रैल 2025 को ही उनका निधन हो गया था। स्कूल के प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार के अनुसार, उन्होंने समय पर विभाग को मृत्यु की आधिकारिक सूचना दे दी थी।
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2026 में आ गया शो-कॉज
दूसरा मामला मध्य विद्यालय पैन का है, जहां कार्यरत शिक्षक भुवनेश्वर रजक का निधन 30 सितंबर 2025 को हो गया था। हेडमास्टर त्रिभुवन कुमार ने भी बीआरसी कार्यालय को इसकी विधिवत सूचना भेज दी थी। लेकिन मजाल क्या कि विभाग की नींद टूटे! पूरे एक साल बाद विभाग ने दोनों दिवंगत शिक्षकों को गैरहाजिर बताकर स्पष्टीकरण थमा दिया।
ई-शिक्षाकोष की सुस्ती ने उड़ाई खिल्ली
दरअसल, इस पूरे तमाशे की जड़ में विभाग का बहुप्रचारित 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल है। पोर्टल पर शिक्षकों की जॉइनिंग तो फटाफट चढ़ जाती है, लेकिन किसी शिक्षक के देहांत के महीनों बाद भी पोर्टल से उनका नाम हटाने की फुर्सत किसी बाबू को नहीं मिली।
नतीजतन, कंप्यूटर ने मृत शिक्षकों को भी जीवित मानकर ट्रेनिंग लिस्ट में डाल दिया और बिना जमीनी पड़ताल किए अधिकारियों ने धड़ाधड़ नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्पष्टीकरण का जवाब लेने के लिए विभाग यमलोक पत्र भेजेगा?
नौकरी छोड़ यूपी गईं शिक्षिका
मिडिल स्कूल जहांगीरा में पदस्थापित शिक्षिका रोशनी सिंह तीन वर्ष पूर्व ही नौकरी छोड़ चुकी हैं। वह अब उत्तर प्रदेश के किसी विभाग में सेवारत हैं। स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका कल्याणी कुमारी ने बताया कि उनके पद त्यागने की लिखित सूचना पूर्व में ही बीईओ, डीपीओ और डीईओ को भेजी जा चुकी है। इनसे भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आप ट्रेनिंंग में क्याें नहीं आए?
डीईओ बोले- प्रखंड स्तर की चूक
मामला सोशल मीडिया और शिक्षकों के बीच हंसी और चर्चा का विषय बनने के बाद अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। इस बाबत पूछे जाने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) चंदन कुमार ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल से मृत या सेवानिवृत्त शिक्षकों का डेटा हटाने की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रखंड स्तर (बीआरसी) की होती है। उन्होंने कहा कि सभी प्रखंडों से भौतिक सत्यापन कराकर संशोधित डेटा तलब किया गया है, ताकि ऐसी गंभीर लापरवाही दोबारा न हो।
