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बिहार में शिक्षकों व सरकारी कर्मियों के वेतन भुगतान के लिए CFMS 2.0 और ई-निधि V2 अनिवार्य; ऐसे बनेगी पेई आईडी

Published: Wed, 21 Oct 2026 11:02 AM (IST)

Bihar CFMS 2.0 e-Nidhi V2 Payee ID: बिहार सरकार ने कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन भुगतान को पारदर्शी बनाने के ...और पढ़ें

Bihar CFMS 2.0 e-Nidhi V2 Payee ID: प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

Bihar CFMS 2.0 e-Nidhi V2 Payee ID: प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. CFMS 2.0 और ई-निधि V2 प्रणाली से वेतन भुगतान पारदर्शी।

  2. प्रत्येक कर्मचारी की विशिष्ट पेई आईडी तैयार की जा रही है।

  3. कर्मचारी ऑनलाइन वेतन पर्ची, भुगतान स्थिति देख सकेंगे।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bihar CFMS 2.0 e-Nidhi V2 Payee ID:बिहार के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के मासिक वेतन, बकाया एरियर सहित अन्य सभी प्रकार के वित्तीय दावों के भुगतान को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध बनाने के लिए राज्य सरकार वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को हाईटेक कर रही है। वित्त विभाग की नई व्यवस्था के तहत अब CFMS 2.0 और ई-निधि V2 पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक कर्मचारी की पेई आईडी (Payee ID) तैयार की जा रही है।

उनके बैंक खातों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है। इस एकीकृत प्रणाली का प्राथमिक उद्देश्य शिक्षकों और कर्मियों के सभी वित्तीय लाभों का सीधा अंतरण (DBT) बिना किसी मानवीय अवरोध के सीधे उनके बैंक खातों में सुनिश्चित करना है।

वित्तीय पहचान बनेगी पेई आईडी, डीडीओ स्तर पर होगी तैयार

पेई आईडी किसी भी सरकारी कर्मचारी अथवा शिक्षक की राज्य कोषागार में एक विशिष्ट डिजिटल वित्तीय पहचान के रूप में कार्य करती है। इसी आईडी के आधार पर कर्मचारी के मासिक वेतन, डीए एरियर, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और भविष्य निधि से जुड़े सभी लेन-देन का डिजिटल लेखा-जोखा सुरक्षित रखा जाता है।

राहत की बात यह है कि पेई आईडी बनाने के लिए कर्मचारियों को किसी साइबर कैफे या व्यक्तिगत स्तर पर ऑनलाइन आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए संबंधित कार्यालय के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ), संबंधित स्थापना शाखा अथवा जिला कोषागार स्तर से ही प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

दस्तावेजों का सत्यापन और सेवा रिकॉर्ड का मिलान अनिवार्य

पेई आईडी जनरेट करने और बैंक खाते को सफलतापूर्वक मैप करने के लिए कर्मचारी के सेवा इतिहास और वित्तीय रिकॉर्ड का गहन मिलान किया जा रहा है। विशेष रूप से शिक्षकों के मामले में शिक्षा विभाग के ई-शिक्षाकोष पोर्टल और एचआरएमएस (HRMS) पर दर्ज आंकड़ों का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जा रहा है।

पेई आईडी (Payee ID) व ई-निधि V2

  • प्रणाली: CFMS 2.0 (कंप्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) और ई-निधि V2 पोर्टल।

  • लाभार्थी: बिहार सरकार के सभी नियमित/नियोजित शिक्षक एवं सरकारी कर्मचारी।

  • पेई आईडी का महत्व: यह कर्मचारी की विशिष्ट वित्तीय पहचान है, जिससे वेतन, बकाया और सभी भत्ते सीधे खाते में ट्रांसफर होंगे।

  • आईडी कौन बनाएगा: संबंधित डीडीओ (DDO), स्थापना शाखा या कोषागार (कर्मचारियों को स्वयं नहीं बनाना है)।

  • आवश्यक दस्तावेज: नियुक्ति पत्र, योगदान प्रपत्र, बैंक पासबुक, पैन कार्ड, पहचान दस्तावेज, पीआरएएन (PRAN) या जीपीएफ (GPF) विवरण।

  • ऑनलाइन सुविधा: ई-निधि V2 पर कर्मचारी लॉगिन से वेतन पर्ची (Pay Slip) और भुगतान स्थिति देखने की सुविधा।

इस प्रक्रिया के लिए कर्मियों के नियुक्ति पत्र, विद्यालय अथवा कार्यालय में विधिवत योगदान से संबंधित दस्तावेज, पहचान प्रपत्र, पैन कार्ड, बैंक पासबुक की स्पष्ट प्रति तथा पीआरएएन (PRAN) या जीपीएफ विवरण का सत्यापन किया जा रहा है। संवर्ग और सेवा शर्तों के आधार पर संबंधित कार्यालय अतिरिक्त प्रपत्रों की मांग भी कर सकता है।

ई-निधि V2 पोर्टल पर खुद देख सकेंगे वेतन पर्ची और स्टेटस

नई प्रणाली लागू होने के बाद कर्मचारियों को अपनी वेतन पर्ची (पे-स्लिप) या भुगतान स्थिति जानने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ई-निधि V2 पोर्टल पर कर्मियों के लिए 'एंप्लॉई लॉगिन' (Employee Login) की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। निर्धारित प्रमाणीकरण और ओटीपी प्रक्रिया के जरिए लॉगिन कर कोई भी शिक्षक या कर्मचारी अपनी पेई आईडी, बैंक खाते की लिंकिंग स्थिति, मासिक कटौती और शुद्ध भुगतान का पूरा विवरण आसानी से ऑनलाइन देख व डाउनलोड कर सकेंगे।

बैंक विवरण में मामूली गलती भी रोक सकती है वेतन

वित्त विभाग ने आगाह किया है कि वेतन भुगतान पूरी तरह स्वचालित और डिजिटल होने के कारण बैंक विवरण में थोड़ी सी भी त्रुटि भुगतान में तकनीकी बाधा उत्पन्न कर सकती है। यदि बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड (IFSC Code), नाम की स्पेलिंग, पैन या पहचान रिकॉर्ड में कोई विसंगति पाई जाती है, तो सिस्टम स्वतः ही बिल को रिजेक्ट या होल्ड कर देगा।

ऐसे में सभी शिक्षकों और सरकारी कर्मियों को सलाह दी गई है कि वे अपने सेवा रिकॉर्ड और बैंक पासबुक के विवरण का पहले ही मिलान कर लें। यदि कहीं कोई त्रुटि नजर आए, तो अविलंब अपने डीडीओ अथवा स्थापना शाखा से संपर्क कर उसमें सुधार करा लें।

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