बिहार के एग्री-स्टार्टअप्स पर फिदा हुई नेशनल कमेटी, 20 युवाओं को मिला ₹1.46 करोड़ का ग्रांट
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के 20 एग्री स्टार्टअप्स को जयपुर में ₹1.46 करोड़ की अनुदान सहायता की अनुशंसा मिली ...और पढ़ें

बैठक में शामिल हुई टीम। फोटो जागरण
HighLights
सबौर एग्रि इनक्यूबेटर के 20 स्टार्टअप्स को ₹1.46 करोड़ अनुदान।
जयपुर में चयन समिति ने दी अनुदान की अनुशंसा।
कृषि उद्यमिता से युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर का सबौर एग्रि इनक्यूबेटर (सबएग्रिस) राज्य के युवाओं को कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का बेहतर प्लेटफार्म साबित हो रहा है। विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर में तैयार हो रहे एग्री स्टार्टअप्स को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है।
इसका ताजा उदाहरण जयपुर में आयोजित चयन एवं निवेश समिति (एसआइसी) की बैठक में देखने को मिला है। वहां सबएग्रिस के 20 एग्री स्टार्टअप्स को विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 1.46 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता देने की अनुशंसा की गई।
14 व 15 जुलाई को चौधरी चरण सिंह राष्ट्री बिहार के एग्री-स्टार्टअप्स पर फिदा हुई नेशनल कमेटी, 20 युवाओं को मिला ₹1.46 करोड़ का ग्रांट य कृषि विपणन संस्थान (सीसीएस-एनआइएएम), जयपुर में आयोजित बैठक में बीएयू के 35 स्टार्टअप्स ने अपने कृषि नवाचार, व्यवसाय माडल और विस्तार योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया।
दो दिवसीय तकनीकी और व्यावसायिक मूल्यांकन के बाद समिति ने 20 स्टार्टअप्स को स्टूडेंट ओरिएंटेशन प्रोग्राम (एसओपी), एग्रीप्रेन्योरशिप ओरिएंटेशन प्रोग्राम (एओपी) और स्टार्टअप एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन प्रोग्राम (एसAI पी) के तहत अनुदान देने की अनुशंसा की।
बैठक में AI एवं इंटरनेट आफ थिंग्स आधारित स्मार्ट फार्मिंग, प्रिसीजन एग्रीकल्चर, डेयरी-टेक, आधुनिक मत्स्य पालन, डिजिटल कृषि विपणन, हाइड्रोपोनिक्स, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक उर्वरक, मखाना और रूट वेजिटेबल आधारित मूल्य संवर्धित उत्पाद, पराली आधारित पशु आहार, ब्लाकचेन आधारित कृषि मार्केटप्लेस, शहद उत्पाद और हर्बल उत्पाद जैसे नवाचार आकर्षण का केंद्र रहे।
इन तकनीकों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के अवसर सृजित करना है।
किसान और समाज की दशा बदलने में निभाएंगे भूमिका
कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल कृषि शिक्षा और अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यावसायिक सफलता में बदलकर किसानों और समाज तक पहुंचाने का भी काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सबएग्रिस किसानों की समस्याओं पर आधारित तकनीकी समाधान विकसित करने वाले स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे कृषि अधिक लाभकारी और तकनीक आधारित बन रही है।
निदेशक अनुसंधान एवं सबएग्रिस के प्रधान अन्वेषक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि 20 स्टार्टअप्स के लिए 1.46 करोड़ रुपये की अनुदान अनुशंसा विश्वविद्यालय के नवाचार तंत्र की गुणवत्ता और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण है। इससे बिहार का कृषि आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम और मजबूत होगा तथा राज्य राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाएगा।
