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जहाज अधिक, यात्री कम; भागलपुर के बियाडा घाट में गंगा विहार जैसा सुकून, रविवार को बिना अफरातफरी के हुई यात्रा

By Lalan TiwariEdited By: Krishna Bahadur Singh Parihar
Published: Sun, 04 Oct 2026 08:31 AM (IST)

बियाडा घाट पर रविवार को गंगा यात्रा सुगम और शांत रही, अवकाश के कारण यात्रियों की भीड़ कम थी और पर्याप्त जलयान उपलब्ध थे।

बियाडा घाट में खाली जहाज। फोटो जागरण

बियाडा घाट में खाली जहाज। फोटो जागरण

HighLights

  1. रविवार को बियाडा घाट पर गंगा यात्रा रही सुगम।

  2. कम यात्री और पर्याप्त जलयान से नहीं हुई कोई भीड़।

  3. बाइक प्रतिबंध से व्यवस्था बेहतर, यात्रियों ने लिया आनंद।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। गंगा की लहरों पर रविवार की सुबह कुछ अलग ही सुकून लेकर आई। एक ओर ऊंचा जलस्तर और दूसरी ओर नदी के किनारे से उठती ठंडी हवा। बीच में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तैयार खड़े जलयान।

बियाडा घाट पर सुबह का नजारा किसी व्यस्त घाट से अधिक सहज और शांत दिखा। न यात्रियों की भीड़, न अफरातफरी और न ही जहाज पर चढ़ने को लेकर आपाधापी।

रविवार की छुट्टी का दिन होने के कारण यात्रियों की संख्या भी कम रही और इसके मुकाबले जलयान अधिक मौजूद रहे। ऐसे में गंगा पार करने का सफर लोगों के लिए सहज होने के साथ कुछ हद तक गंगा विहार जैसा सुखद अनुभव भी दे रहा था।

सुबह छह बजे से करीब आधे घंटे के भीतर एक बड़ा और एक छोटा जलयान बियाडा घाट से नवगछिया की ओर रवाना हुआ। इसके बाद भी यात्री पश्चिम और दक्षिण दिशा से धीरे-धीरे घाट की ओर पहुंचते रहे।

हालांकि यात्रियों की संख्या कम होने के कारण जलयान को भरने में समय लग रहा था। घाट पर पहले से कई जलयान मौजूद रहने के बावजूद पर्याप्त यात्री जुटने का इंतजार किया जा रहा था। इसी कारण कुछ जलयान निर्धारित समय के बजाय यात्रियों की संख्या के अनुसार रवाना हो रहे थे।

बाइक और सामान पर रोक से कम हुआ दबाव

बियाडा घाट पर अब बाइक और सामान लेकर यात्रा करने की अनुमति नहीं होने का असर व्यवस्था पर साफ दिखाई दिया। इससे यात्रियों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित रही और जलयान पर चढ़ने-उतरने के दौरान भी किसी तरह की अफरातफरी नजर नहीं आई। पैदल यात्रियों के लिए व्यवस्था अपेक्षाकृत सहज रही।

गंगा का जलस्तर ऊंचा होने के बावजूद यात्रियों की सुविधा के लिए घाट पर तत्काल व्यवस्था की गई है। किनारे के निचले हिस्से में बोरा आदि डालकर रास्ते को सुविधाजनक बनाया गया है।

इससे यात्रियों को पैदल जलयान तक पहुंचने और उस पर सवार होने में फिलहाल परेशानी नहीं हो रही है। जलयान संचालकों की टीम भी घाट पर मौजूद रही और यात्रियों की आवाजाही पर नजर रखी।

जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की टीम भी घाट पर मौजूद रही। हालांकि रविवार सुबह व्यवस्था इस कदर सामान्य रही कि किसी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत महसूस नहीं हुई। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार घाट पर पहुंचते रहे और उपलब्ध जलयान से गंगा पार करते रहे।

ठंडी हवा के बीच गंगा का किनारा बना सुकून का ठिकाना

रविवार की सुबह प्रकृति ने भी जलमार्ग सेवा का साथ दिया। गंगा किनारे बहती ठंडी हवा, शांत पानी और सामने खड़े जलयान ने घाट के माहौल को खुशनुमा बना दिया।

गंगा पार जाने की उम्मीद में घाट पहुंचे यात्रियों के चेहरे पर भी जल्दबाजी के बजाय संतोष और सहजता दिखाई दी। रविवार का अवकाश होने के कारण वातावरण में कामकाजी दिनों वाली भागदौड़ भी नहीं थी।

गंगा की लहरों के बीच जलयान पर सवार होने का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए यह सफर महज एक किनारे से दूसरे किनारे पहुंचने का माध्यम नहीं दिख रहा था। शांत सुबह में नदी का विस्तृत फैलाव, ठंडी हवा और जलयान का धीरे-धीरे आगे बढ़ना उन्हें गंगा विहार जैसा एहसास करा रहा था।

फिलहाल बियाडा घाट पर जलमार्ग सेवा रविवार की सुबह सुचारु रूप से चलती नजर आई। जलयान पर्याप्त संख्या में हैं और यात्रियों की संख्या कम होने के कारण भीड़ का दबाव नहीं है।

प्रशासन, पुलिस और जलयान संचालकों की मौजूदगी के बीच व्यवस्था सामान्य है। आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इसी व्यवस्था को बनाए रखना घाट प्रबंधन के लिए अहम चुनौती होगी।

आपदा मित्र भी अहले सुबह से अपने कर्तव्य पर खड़े हैं। अमित कुमार, तुलसी कहते हैं कि आज यात्रियों की संख्या अवकाश दिवस होने की वजह से कम है।

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