भागलपुर बियाडा घाट पर अफसरों व SDRF के सामने नाव पर 2 भैंस लादकर गंगा में निकला पशुपालक; बीच धार में पीछा कर पकड़ा
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर के बियाडा फेरी घाट पर सुरक्षा के बावजूद एक पशुपालक दो भैंसों को ...और पढ़ें

भागलपुर में प्रतिबंधित क्षेत्र से नाव पर भैंस लादकर निकला पशुपालक! SDRF ने गंगा में दौड़ाकर पकड़ा।
HighLights
पशुपालक ने बियाडा घाट से दो भैंसों को नाव पर लादा।
एसडीआरएफ ने बीच गंगा में नाव का पीछा कर वापस लाया।
अधिकारियों ने पशुपालक को कड़ी चेतावनी दी, सुरक्षा बढ़ाई गई।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद अति-संवेदनशील बने बियाडा फेरी सेवा घाट पर शुक्रवार की सुबह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उस वक्त असहज स्थिति उत्पन्न हो गई, जब एक पशुपालक तमाम प्रशासनिक अमले की आंखों के सामने दो भैंसों को देसी नाव पर लादकर महादेवपुर घाट के लिए रवाना हो गया।
हैरत की बात यह रही कि घाट पर मजिस्ट्रेट, पुलिस पदाधिकारी और एसडीआरएफ (SDRF) की रेस्क्यू टीम मुस्तैद थी, लेकिन उनकी मौजूदगी के बावजूद पशुपालक प्रतिबंधित क्षेत्र से बेधड़क नाव खोलकर गंगा की मुख्य धारा में निकल गया।
नाव जब किनारे से छूटकर गंगा के बीचों-बीच पहुंच गई, तब जाकर एसडीआरएफ के जवानों की नजर उस पर पड़ी। गंगा के उफान और तेज बहाव के बीच नाव पर भारी-भरकम मवेशियों को देखकर अफरा-तफरी मच गई। अनहोनी की आशंका को भांपते हुए एसडीआरएफ की टीम ने तुरंत मोटरबोट से नाव का पीछा शुरू किया।
लगभग 10 मिनट की मशक्कत के बाद टीम ने बीच धारा में नाव को घेरा और उसे सुरक्षित वापस बियाडा घाट की ओर मोड़कर किनारे लाई। इसके बाद जवानों की सीधी निगरानी में दोनों भैंसों को सावधानीपूर्वक नाव से नीचे उतारा गया।
'साहब, नियम नहीं पता था'... पशुपालक ने दी सफाई
घाट पर तैनात अधिकारियों ने जब पशुपालक को तलब कर प्रतिबंधित क्षेत्र से मवेशी ले जाने की अनुमति के बाबत पूछताछ की, तो उसने हाथ जोड़ते हुए अनभिज्ञता जाहिर की। पशुपालक ने कहा कि उसे इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि फेरी वाले क्षेत्र से मवेशी ले जाने के लिए विशेष अनुमति की दरकार होती है।
इस पर मौजूद वरीय पदाधिकारियों ने उसे कड़ी फटकार लगाते हुए अंतिम चेतावनी दी। अधिकारियों ने सख्त लहजे में हिदायत दी कि यदि दोबारा प्रतिबंधित फेरी रूट या घाट क्षेत्र से भैंसों अथवा अन्य मवेशियों को नाव पर लादकर ले जाने की हिमाकत की गई, तो मवेशियों को तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया जाएगा और संबंधित पशुपालक व नाविक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चौकसी के बीच कैसे निकली नाव? सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद घाट पर मौजूद आम मुसाफिरों, बाइक सवारों और स्थानीय दुकानदारों के बीच देर तक इसी बात की चर्चा होती रही कि जब पूरे घाट पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल, ट्रैफिक पुलिस और रेस्क्यू दल तैनात है, तो पशुपालक इतनी आसानी से दो भैंसों को नाव पर चढ़ाकर गंगा की धारा तक कैसे ले गया?
लोगों का कहना था कि यदि बीच गंगा में मवेशियों के बिदकने से नाव पलट जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस वाकये के बाद प्रशासन ने घाट के प्रवेश द्वारों और नाव रवानगी वाले प्वाइंट्स पर निगरानी और कड़ी कर दी है।
