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रात घाट पर कटी, सुबह पहली फेरी में 400 बाइक! कीचड़ में धंसे पहिए, ट्रेन छूटी; भागलपुर में मुसाफिरों की भारी फजीहत

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:26 AM (IST)

Bhagalpur Ferry Service : विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर में फेरी सेवा के दूसरे दिन भारी भीड़ और ...और पढ़ें

Bhagalpur Ferry Service :

Bhagalpur Ferry Service :

HighLights

  1. विक्रमशिला सेतु बंद होने से फेरी घाट पर भारी भीड़।

  2. कीचड़ में फंसी बाइकें, यात्रियों को रात भर रुकना पड़ा।

  3. प्रशासन ने घाट पर सुरक्षा बढ़ाई, अतिक्रमण हटाया, चारपहिया वाहन प्रतिबंधित।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Ferry Service : विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद गंगा पार करने का एकमात्र जरिया बनी फेरी सेवा के दूसरे दिन शुक्रवार की सुबह बियाडा और जाह्नवी चौक घाट पर मुसाफिरों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। गुरुवार की शाम 5:30 बजे के कड़े नियम के चलते जो सैकड़ों यात्री घाटों पर ही छूट गए थे।

उन्होंने किसी तरह रात टेंटों, स्कूलों और खुले आसमान के नीचे गुजारी। सुबह होते ही घर, ड्यूटी और दफ्तर पहुंचने की ऐसी होड़ मची कि बियाडा घाट से सुबह 6:20 बजे जाह्नवी चौक के लिए रवाना हुई पहली ही फेरी में 400 से अधिक बाइक सवार और सैकड़ों पैदल यात्री सवार हो गए।

घाट पर अव्यवस्था का आलम यह रहा कि सुबह 6:30 बजे तक बियाडा का टिकट काउंटर खुला ही नहीं था। संचालकों के मुताबिक पहली फेरी में चढ़ने वाले केवल 20 प्रतिशत मुसाफिरों के पास ही पहले से टिकट थे। स्थिति को बेकाबू होते देख जहाज पर सवार होते समय ही आनन-फानन में टिकट काटे गए। बाद में जिला प्रशासन की टीम के मौके पर पहुंचने के बाद टिकट काउंटर को विधिवत खुलवाया गया।

दलदल में धंसीं बाइकें

पहली फेरी में अप्रत्याशित रूप से दोपहिया वाहनों की संख्या बढ़ जाने से घाट पर अफरा-तफरी मच गई। गंगा के घटते-बढ़ते जलस्तर की वजह से घाट किनारे भारी कीचड़ और दलदल था, जिसमें जहाज की ओर बढ़ते वक्त कई बाइकें पहिए तक धंस गईं। मौके पर तैनात यातायात पुलिस, सुरक्षा बल और आपदा मित्रों ने मुसाफिरों के साथ मिलकर धंसी हुई बाइकों को खींचकर बाहर निकाला और किसी तरह जहाज पर लोड कराया।

पुलिस और आपदा मित्रों ने निकाला

सुबह के वक्त सब्जी, फल, दूध और साइकिल लेकर रोजमर्रा के कारोबार के लिए शहर आने वाले छोटे व्यापारियों की भी भारी भीड़ रही। उधर, नवगछिया की ओर जाह्नवी चौक से सुबह 6:25 बजे पहली फेरी बियाडा पहुंची, जिसमें रातभर फंसे हुए शिक्षक और कर्मचारी सवार थे। कई सरकारी शिक्षकों ने बताया कि गुरुवार शाम फेरी बंद होने से वे घर नहीं लौट सके थे और उन्हें रात स्कूल में ही बितानी पड़ी।

किसी की ट्रेन छूटी

गुरुवार शाम 5:30 बजे फेरी सेवा अचानक बंद किए जाने का दंश कई यात्रियों को झेलना पड़ा। सहरसा निवासी यात्री श्रवण कुमार ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वे शाम 5:40 बजे जाह्नवी चौक पहुंचे थे। जहाज सामने खड़ा था, लेकिन भीड़ का हवाला देकर सवार नहीं होने दिया गया।

किसी ने टेंट में काटी रात

नतीजा यह हुआ कि भागलपुर जंक्शन से दिल्ली जाने वाली उनकी रात की ट्रेन छूट गई। उन्हें रातभर घाट पर बने अस्थाई टेंट में मच्छरों के बीच गुजारनी पड़ी। अब वे विक्रमशिला सुपरफास्ट एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

यात्री क्षेत्र से ठेला-खोमचा बाहर

भीड़ और जाम के बढ़ते संकट को देखते हुए शुक्रवार को जिला प्रशासन ने बियाडा घाट पर कड़े सुरक्षा प्रतिबंध लागू कर दिए। जहाज पर चढ़ने वाले 'यात्री क्षेत्र' (बोर्डिंग जोन) को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया है। वहां लगने वाले ठेले, खोमचे, फल-सब्जी और आइसक्रीम की अस्थाई दुकानों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

चारपहिया वाहन पूरी तरह बैन

इसके अलावा निजी कारों के साथ-साथ किसी भी सरकारी चारपहिया वाहन को भी घाट के मुहाने तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। मौके पर मौजूद अपर समाहर्ता (एडीएम) राकेश कुमार, जिला खेल पदाधिकारी, ट्रैफिक डीएसपी और ट्रैफिक थानाध्यक्ष ने मोर्चा संभाला। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि मुसाफिरों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और बोर्डिंग जोन को हमेशा खाली रखा जाएगा।

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