गंगा की लहरों पर दौड़ेगी जिंदगी; भागलपुर बियाडा में 1000 सीटर बड़े वेसल, बाबूपुर घाट पर वाहनों के लिए अलग एंट्री-एग्जिट
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा नदी जलमार्ग से आवागमन का मुख्य साधन बनेगी। ...और पढ़ें

भागलपुर विक्रमशिला पर सेतु बंद तो गंगा बनेगी सहारा।
HighLights
विक्रमशिला सेतु बंद होने पर गंगा जलमार्ग बनेगा मुख्य विकल्प।
बियाडा घाट से यात्री, बाबूपुर घाट से वाहन वेसल चलेंगे।
बड़े वेसलों में 1000+ यात्री क्षमता, सुचारु संचालन की तैयारी।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। उत्तर और पूर्वी बिहार को जोड़ने वाले विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य को लेकर 30 सितंबर की मध्य रात्रि से बंद होने के बाद गंगा नदी ही भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन का सबसे मजबूत और वैकल्पिक माध्यम बनेगी। जलमार्ग से मुसाफिरों और मालवाहक वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने मुकम्मल तैयारी पूरी कर ली है।
पूरी कार्ययोजना के तहत बियाडा से यात्री वेसलों को रवाना किया जाएगा, जबकि बाबूपुर गंगा घाट से बड़े मालवाहक वेसलों का संचालन होगा। बियाडा घाट से चलने वाले छोटे वेसल में 200 से 300 मुसाफिर और बड़े वेसल में एक हजार से अधिक यात्रियों को ढोने की क्षमता होगी। यात्रियों के दबाव को देखते हुए जहाजों की संख्या में तत्काल बढ़ोतरी की जाएगी।
बियाडा में बन रही जेटी, 3-4 वेसल एक साथ होंगे पार्क
बियाडा में अत्याधुनिक जेटी और अप्रोच प्लेटफॉर्म का निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा है, ताकि एक साथ तीन से चार बड़े वेसल घाट पर ठहर सकें और यात्रियों को चढ़ने-उतरने में कोई असुविधा न हो। प्रशासन के रूट चार्ट के मुताबिक, रोजाना सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे के व्यस्ततम समय में तीन से चार बड़े यात्री वेसल बियाडा से नवगछिया की ओर रवाना किए जाएंगे। इसके बाद दिनभर यात्रियों के प्रवाह और मांग के अनुरूप फेरे तय किए जाएंगे।
बाबूपुर से गाड़ियों की ढुलाई, जाम से बचने को वन-वे रूट
व्यावसायिक गतिविधियों और वाहनों के आवागमन के लिए बाबूपुर गंगा घाट को मुख्य केंद्र बनाया गया है। यहां चलने वाले विशालकाय वेसलों पर भारी सामान, मालवाहक व निजी वाहनों के साथ यात्री भी सवार हो सकेंगे। बाबूपुर घाट पर वाहनों के आमने-सामने आने से लगने वाले जाम को रोकने के लिए प्रशासन एक अतिरिक्त रास्ता तैयार कर रहा है।
भागलपुर–नवगछिया वेसल परिचालन
यात्री टर्मिनल (बियाडा घाट):
छोटे वेसल की क्षमता: 200 से 300 यात्री।
बड़े वेसल की क्षमता: 1,000+ यात्री।
सुबह 6:00 से 9:00 बजे के बीच 3 से 4 वेसल रवाना होंगे।
एक साथ 3-4 वेसल के ठहराव के लिए प्लेटफॉर्म और जेटी का निर्माण।
मालवाहक व वाहन टर्मिनल (बाबूपुर घाट):
चारपहिया, व्यावसायिक वाहन, माल और यात्री एक साथ होंगे सवार।
वन-वे व्यवस्था: प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते, ग्रामीण एप्रोच रोड से सीधा जुड़ाव।
परिचालन चक्र: लोडिंग और अनलोडिंग में करीब 3 घंटे का समय; प्रत्येक बड़ा वेसल दिन में 2 अप और 2 डाउन ट्रिप लगाएगा।
कुल प्रस्तावित वेसल: लगभग 10 बड़े वेसल का टेंडर/आवेदन प्रक्रिया अंतिम चरण में।
ग्रामीण सड़क से घाट तक बनने वाले इस दूसरे रास्ते से 'वन-वे' व्यवस्था लागू होगी; यानी गाड़ियां एक रास्ते से वेसल पर सवार होने के लिए प्रवेश करेंगी और उतरने वाली गाड़ियां दूसरे रास्ते से बाहर निकलेंगी। प्रशासन द्वारा वेसल संचालन के लिए निविदा और आवेदन की प्रक्रिया मंगलवार तक पूरी कर करीब 10 बड़े वेसलों के परिचालन पर अंतिम मुहर लगा दी जाएगी।
3 घंटे का लोडिंग समय, एसडीएम ने की गैर-जरूरी यात्रा टालने की अपील
एक बड़े वेसल पर वाहनों और यात्रियों को चढ़ाने और दूसरे छोर पर उतारने में लगभग तीन घंटे का समय लगेगा। निर्धारित योजना के अनुसार, प्रत्येक बड़ा वेसल 24 घंटे में दो बार आने और दो बार जाने (कुल चार चक्कर) का परिचालन कर सकेगा।
इधर, यातायात के भारी दबाव को देखते हुए सदर एसडीएम विकास कुमार ने आम नागरिकों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु की तकनीकी मरम्मत अत्यंत आवश्यक है। इसलिए नागरिक बहुत जरूरी काम होने पर ही इस अवधि में यात्रा का कार्यक्रम बनाएं। गैर-जरूरी यात्राओं को टालने से जलमार्ग पर भीड़ नियंत्रित रहेगी और मरीजों व आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता मिल सकेगी।
