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भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागण का शंखनाद, बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए 220 एकड़ जमीन ट्रांसफर

Published: Wed, 15 Jul 2026 11:11 PM (IST)

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भागलपुर में विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की घोषणा की, जिसके लिए 220 एकड़ भूमि हस्तांतरित की गई है।

जमीन का कब्जा देते हुए सम्राट चौधरी। फोटो जागरण

जमीन का कब्जा देते हुए सम्राट चौधरी। फोटो जागरण

HighLights

  1. विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए 220 एकड़ भूमि हस्तांतरित।

  2. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुनरुद्धार की घोषणा की।

  3. एक वर्ष में निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य।

ललन तिवारी, भागलपुर। भागलपुर की ऐतिहासिक धरती पर बुधवार के दिन को भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा के पुनर्जागरण के शंखनाद के रूप में याद किया जाएगा।

काशिल गांव में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 में नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर के उद्घाटन के दौरान उनसे कहा था कि नालंदा का सपना साकार हो गया, अब विक्रमशिला विश्वविद्यालय को भी पुनर्जीवित करना है।

उन्होंने कहा था कि उस संकल्प को अब जमीन पर उतारने की शुरुआत हो गई है। एक वर्ष के भीतर विश्वविद्यालय निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक 220 एकड़ भूमि जिला प्रशासन ने शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दिया है। उन्होंने जिलाधिकारी अलंकृता पांडे के नेतृत्व में समयबद्ध तरीके से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जिला प्रशासन की सराहना की। उनके अनुसार इससे वर्षों से लंबित परियोजना को अब गति मिलेगी।

पर्यटन और रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा

प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक शैक्षणिक भवन, अनुसंधान केंद्र, डिजिटल पुस्तकालय, छात्रावास तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

इसके शुरू होने से भागलपुर की पहचान शिक्षा, शोध और बौद्ध पर्यटन के नए केंद्र के रूप में मजबूत होगी। साथ ही होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद है।

भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, तर्कशास्त्र, व्याकरण, चिकित्सा और बौद्ध दर्शन का विश्वविख्यात केंद्र था विक्रमशिला

गंगा तट पर अवस्थित विक्रमशिला महाविहार केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, तर्कशास्त्र, व्याकरण, चिकित्सा और बौद्ध दर्शन का विश्वविख्यात केंद्र था। इसकी स्थापना पाल शासक धर्मपाल ने आठवीं-नौवीं शताब्दी में की थी। यह नालंदा, ओदंतपुरी और सोमपुर की तरह बौद्ध शिक्षा का विश्वविख्यात केंद्र था।

यहां भारत के साथ तिब्बत, नेपाल, भूटान, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे। तब यहां लगभग 100 आचार्य एक हजार से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाते थे। बौद्ध आचार्य अतीश दीपंकर श्रीज्ञान भी यहीं से जुड़े रहे। 12वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में बख्तियार खिलजी के आक्रमण में यह महाविहार ध्वस्त हो गया था।

आज अंतीचक स्थित विक्रमशिला महाविहार के अवशेष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के संरक्षण में हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना से इस ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक शिक्षा और शोध के नए केंद्र के रूप में पुनर्स्थापित करने की उम्मीद है।

भागलपुर के विकास का नया अध्याय

विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण से भागलपुर की पहचान केवल रेशम नगरी या ऐतिहासिक शहर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, शोध और बौद्ध पर्यटन के नए केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

इससे होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, पर्यटन, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र में हजारों नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। देश-विदेश से विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों का आगमन बढ़ने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

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