1 अक्टूबर से विक्रमशिला सेतु 3 माह बंद! गंगा पार करने में नहीं होगी परेशानी, भागलपुर प्रशासन ने दिए दर्जनभर विकल्प
विक्रमशिला सेतु 1 अक्टूबर से तीन महीने के लिए बंद रहेगा, जिसके लिए भागलपुर प्रशासन ने जलमार्ग से आवागमन की ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Closure Bhagalpur: 1 अक्टूबर से विक्रमशिला सेतु 3 माह के लिए बंद
HighLights
विक्रमशिला सेतु 1 अक्टूबर से तीन माह के लिए बंद।
भागलपुर प्रशासन ने जलमार्ग से आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था की।
यात्रियों के लिए मुफ्त यात्रा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Closure Bhagalpur: उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु पर आगामी 1 अक्टूबर से प्रस्तावित तीन माह की मरम्मत और बंदी को लेकर जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सेतु बंद रहने के दौरान भागलपुर और नवगछिया के बीच गंगा पार आवागमन को सुचारू बनाए रखने के लिए जलमार्ग को मुख्य वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है। आम नागरिकों की सहूलियत को देखते हुए जरूरत पड़ने पर जिला प्रशासन यात्रियों को पूरी तरह नि:शुल्क गंगा पार कराने की व्यवस्था भी कर सकता है।
योजना के अनुसार, भागलपुर की ओर से बरारी के वियाडा और सबौर के बाबूपुर घाट को प्रमुख जलयान प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया जा रहा है, जबकि नवगछिया की ओर एक मुख्य प्लेटफॉर्म रहेगा। जलमार्ग पर पहली प्राथमिकता आम यात्रियों को पार कराना होगी, इसके साथ ही जरूरी माल ढुलाई के लिए मालवाहक जलयानों का भी परिचालन कराया जाएगा। हालांकि, पूरी व्यवस्था की अंतिम रूपरेखा पर मुहर लगनी अभी बाकी है।
सोमवार को जिलाधिकारी अलंकृता पांडे के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की उच्चस्तरीय टीम ने तीनों प्रस्तावित स्थलों का गहन स्थलीय निरीक्षण किया। टीम सबसे पहले वियाडा पहुंची, जिसके बाद बाबूपुर और फिर नवगछिया छोर पर जाकर पहुंच मार्ग, यात्री सुविधाओं और संचालन की संभावित अड़चनों की समीक्षा की गई।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलेंगे दर्जनभर जलयान
प्रशासनिक योजना के तहत गंगा नदी में दोनों छोरों को जोड़ते हुए करीब एक दर्जन जलयानों का नियमित परिचालन किया जाएगा। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए यह सेवा केवल दिन के उजाले में यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक संचालित होगी। यात्रियों को घाट तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए वियाडा और बाबूपुर दोनों जगहों पर एप्रोच रोड की मरम्मत का कार्य शीघ्र शुरू कराया जाएगा।
जीविका रसोई की रहेगी सुविधा
यात्रियों की सुविधा के लिए दोनों प्रमुख घाटों पर विशाल टेंट, पर्याप्त रोशनी, पंखे और पेयजल का प्रबंध किया जा रहा है। इसके साथ ही खान-पान के लिए जीविका दीदियों की रसोई स्थापित की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए वियाडा, बाबूपुर और नवगछिया तीनों तरफ नियंत्रण कक्ष (सूचना केंद्र), एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीमें, प्रशिक्षित आपदा मित्र और अस्थायी कैंप थाना स्थापित किया जाएगा।
नवगछिया में 500 मीटर जलमग्न एप्रोच पथ बना सबसे बड़ा रोड़ा
इस पूरी वैकल्पिक व्यवस्था में नवगछिया की ओर बनने वाला एप्रोच पथ प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। नवगछिया साइड में करीब 500 मीटर लंबे एप्रोच पथ का निर्माण होना है, लेकिन वर्तमान में इस पूरे भूभाग पर एक से डेढ़ फीट तक पानी जमा है।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने जलभराव की स्थिति का जायजा लिया और संबंधित तकनीकी विभागों को पानी की निकासी कर तुरंत मजबूत सड़क तैयार करने का टास्क सौंपा।
प्रशासन का पूरा जोर सेतु की औपचारिक बंदी से पहले इस पूरी प्री-प्रिपेयर्डनेस (पूर्व तैयारी) को अमलीजामा पहनाने पर है, ताकि जब सेतु पर वाहनों का पहिया थमे, तो आम अवाम को आवाजाही में किसी तरह की भारी दुश्वारियों का सामना न करना पड़े।
