पिता की लाश देख हिम्मत हारी फिर धैर्य और साहस के साथ मैट्रिक परीक्षा देने सेंटर पहुंची
भागलपुर घोघा की प्रिया कुमारी ने अपने पिता की मृत्यु के बाद भी मैट्रिक परीक्षा दी। कैंसर से पीड़ित पिता ...और पढ़ें

पिता के अंतिम संस्कार के बीच मैट्रिक परीक्षा देने पहुंची प्रिया, हिम्मत ने कर दिया सभी को झकझोर
HighLights
प्रिया कुमारी ने पिता की मृत्यु के बाद भी परीक्षा दी।
कैंसर पीड़ित पिता राजकिशोर महतो का निधन परीक्षा से पहले।
पहले परीक्षा दी, फिर पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुई।
संवाद सूत्र, घोघा (भागलपुर)। नियति का खेल कभी-कभी इतनी अजीब स्थिति में डाल देता है, जहां इंसान को अपनी भावनाओं और जिम्मेदारियों के बीच एक कठिन चयन करना पड़ता है। कुछ ऐसा ही हुआ घोघा थाना क्षेत्र के जानीडीह गांव में, जहां एक छात्रा ने परीक्षा की जिम्मेदारी को न सिर्फ समझा, बल्कि अपने पिता की मौत के बाद भी उसे निभाया। यह घटना हर किसी के दिल को छूने वाली है।
परीक्षा केंद्र से पहले पिता का अंतिम संस्कार
घोघा थाना क्षेत्र के जानीडीह निवासी राजकिशोर महतो, जो पिछले 22 महीनों से मुंह के कैंसर से पीड़ित थे, रात में अपनी जान गंवा बैठे। डॉक्टरों ने इलाज के दौरान उनकी जीभ भी काट दी थी, और वे नाक से पाइप द्वारा तरल पदार्थ का सेवन कर रहे थे। बीती रात उनका निधन हो गया। लेकिन इस दुखद घटना के बाद उनकी पुत्री प्रिया कुमारी के लिए परीक्षा और पिता का अंतिम संस्कार दोनों ही एक साथ थे।

परीक्षा देने से पहले दाह संस्कार की तैयारी
राजकिशोर की पुत्री प्रिया कुमारी मैट्रिक परीक्षा की छात्रा हैं। वह पहले पाली में परीक्षा देने के लिए तय समय पर स्कूल सेंटर जाने वाली थी, लेकिन पिता की मौत ने उसे मानसिक रूप से आहत कर दिया। किसी भी प्रकार की परीक्षा देने का मन नहीं हो रहा था, लेकिन स्वजनों ने उसे समझाया और संतुलित किया। इसके बाद उसने खुद को संभाला और परीक्षा केंद्र की ओर रवाना हुई। परीक्षा के बाद, शर्त के अनुसार, शव को श्मशान भूमि ले जाया गया और पिता का दाह संस्कार किया गया।

शक्तिशाली इरादों की मिसाल
प्रिया की यह स्थिति किसी के भी लिए कठिन हो सकती थी, लेकिन उसने अपनी जिम्मेदारी को पहले समझा और परीक्षा दी। यह कड़ी मेहनत और इच्छाशक्ति की मिसाल है कि उसने अपने पिता के अंतिम संस्कार के बाद भी अपनी पढ़ाई में कोई समझौता नहीं किया। यह कहानी बताती है कि जीवन में चाहे जितनी भी कठिनाइयाँ आएं, अगर संकल्प मजबूत हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
