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भागलपुर नगर निगम में छिड़ा महासंग्राम; 4थी बार लाइट टेंडर रद, भड़के पार्षद ने मेयर और कमिश्नर को लपेटा

Published: Sat, 11 Jul 2026 08:33 AM (IST)

भागलपुर नगर निगम में चौथी बार स्ट्रीट लाइट का टेंडर रद्द होने से पार्षदों में भारी आक्रोश है। पार्षदों ने ...और पढ़ें

भागलपुर में स्ट्रीट लाइट का टेंडर चौथी बार रद

भागलपुर में स्ट्रीट लाइट का टेंडर चौथी बार रद

HighLights

  1. भागलपुर में चौथी बार स्ट्रीट लाइट का टेंडर रद्द।

  2. पार्षदों ने नगर आयुक्त पर मनमानी का आरोप लगाया।

  3. श्रावणी मेले में शिवभक्तों को अंधेरी सड़कों का डर।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावों के बीच नगर निगम की एक बेहद शर्मनाक और घोर लापरवाही उजागर हुई है। पिछले दो साल से शहर की गलियों में रोशनी (स्ट्रीट लाइट) की व्यवस्था करने में नाकाम रहे नगर निगम प्रशासन ने एक बार फिर बड़ा झटका दिया है। शुक्रवार को हुई सशक्त स्थायी समिति की बैठक में स्ट्रीट लाइट को लेकर निकाला गया चौथा टेंडर भी अचानक आधिकारिक रूप से रद कर दिया गया।

नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर चादर बिछाकर धरने की चेतावनी

टेंडर रद्द होने की घोषणा होते ही समिति के सदस्यों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने सीधे नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि श्रावणी मेले और आगामी त्योहारों से पहले शहर के पोल पर लाइट लगाने का काम शुरू नहीं हुआ, तो वे बड़ा कदम उठाएंगे। सदस्यों ने साफ कहा कि वे नगर आयुक्त कार्यालय के ठीक सामने जमीन पर चादर बिछाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे और लाइट लगने तक नहीं उठेंगे।

2 करोड़ के टेंडर को 1 करोड़ में करने का बना रहे थे दबाव

बैठक के दौरान समिति सदस्य संजय सिन्हा ने इस पूरे टेंडर घोटाले और अंदरूनी खींचतान का पर्दाफाश करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि तीन बार टेंडर फेल होने के बाद जब चौथी बार एक योग्य एजेंसी का चयन हुआ, तो नगर आयुक्त ने खुद मोलभाव करना शुरू कर दिया। नियमों को दरकिनार कर दो करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को जबरन एक करोड़ में करने का दबाव बनाया गया, जिससे तंग आकर एजेंसी ने काम करने से साफ मना कर दिया।

कोर्ट जाने के डर से नगर आयुक्त ने आनन-फानन में रद् किया टेंडर

एजेंसी का तर्क था कि कम दर पर संसाधन जुटाना, कार्यालय बनाना और माल ढुलाई का खर्च उठाना इस भारी कटौती में बिल्कुल संभव नहीं है। जब समिति सदस्यों ने नगर आयुक्त को आगाह किया कि एजेंसी इस तानाशाही के खिलाफ कोर्ट जा सकती है, जिससे काम सालों तक फंस जाएगा, तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। नगर आयुक्त ने कानूनी पचड़े से बचने के लिए तुरंत टेंडर रद्द करने की घोषणा कर दी और अब वे नया अल्पकालीन (शॉर्ट टर्म) टेंडर निकालने की बात कह रहे हैं।

अंधेरी सड़कों पर आवारा पशुओं के बीच से गुजरेंगे शिवभक्त

इस प्रशासनिक तनातनी और सुस्ती का सबसे बड़ा खामियाजा विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में सुल्तानगंज जाने वाले लाखों कांवरियों को भुगतना पड़ेगा। सावन के महीने में शहर की मुख्य सड़कों और गलियों में घुप्प अंधेरा रहेगा, जहां शिवभक्तों को केवल 'बोल बम' के नारे के सहारे ही आगे बढ़ना होगा। खराब सड़कें, गड्ढे और रात के अंधेरे में सड़कों पर बैठे आवारा पशु कांवरियों के लिए काल साबित हो सकते हैं, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।

मेयर की चुप्पी पर उठे सवाल, लिखित जवाब की मांग पर अड़े पार्षद

संजय सिन्हा ने इस पूरे मामले में मेयर (महापौर) की भूमिका पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे इस लापरवाही पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। मेयर की चुप्पी का फायदा उठाकर नगर आयुक्त अपनी मनमानी चला रहे हैं और जनप्रतिनिधियों के पास अब सीधे जनता की अदालत में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। कमेटी के सदस्यों ने अब नगर आयुक्त से लिखित में शेड्यूल मांगा है कि नया अल्पकालीन टेंडर कब जारी होगा और शहर की बत्तियां कब तक गुल रहेंगी।