गंगा पार करने का रहस्य! 15 हजार गए नवगछिया पर 25 हजार पहुंचे भागलपुर, 10 हजार अधिक मुसाफिरों की वजह क्या है?
Bhagalpur Ship Service Passenger Trend: विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर जलयान सेवा जीवनरेखा बनी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों ...और पढ़ें

Bhagalpur Ship Service Passenger Trend: भागलपुर के बियाडा गंगा घाट पर जलयान से उतरते लोग।
HighLights
स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और व्यापार के लिए भागलपुर महत्वपूर्ण केंद्र।
विक्रमशिला सेतु बंद होने से जलयान पर यात्रियों का दबाव बढ़ा।
भागलपुर जंक्शन लंबी दूरी की ट्रेनों का मुख्य पड़ाव है।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Ship Service Passenger Trend: विक्रमशिला सेतु पर आवागमन पूरी तरह ठप होने के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली जलयान (जहाज) सेवा जीवनरेखा बनी हुई है। हालांकि, गंगा के इस जलमार्ग पर आवाजाही के जो आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं।
उन्होंने प्रशासनिक हलकों से लेकर आम जनता तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है। गुरुवार को भागलपुर के बियाडा घाट से 16 फेरियों के जरिए जहां 15,129 लोग नवगछिया गए, वहीं नवगछिया के जहान्वी चौक घाट से 18 फेरियों में करीब 25 हजार यात्री भागलपुर पहुंचे।
एक ही दिन में भागलपुर आने वालों की संख्या जाने वालों से करीब 10 हजार (9,871) अधिक दर्ज की गई। सवाल उठता है कि सेतु बंद होने के बावजूद इतनी भारी तादाद में लोग गंगा पार कर भागलपुर क्यों आ रहे हैं और वे शहर में कहां जा रहे हैं? पड़ताल करने पर इसके पीछे पांच प्रमुख वजहें सामने आई हैं:
मायागंज अस्पताल और मेडिकल क्लीनिकों पर निर्भरता
भागलपुर आने वाले इस अतिरिक्त दबाव का सबसे बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा है। नवगछिया अनुमंडल सहित सीमांचल और कोसी के जिलों—कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा और सहरसा के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (मायागंज) सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा केंद्र है। इसके अलावा तिलकामांझी और कचहरी चौक स्थित दर्जनों सुपर स्पेशियलिटी व निजी नर्सिंग होम में इलाज कराने के लिए रोजाना हजारों मरीज और उनके तीमारदार गंगा पार कर भागलपुर पहुंचते हैं।
लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए भागलपुर जंक्शन मुख्य पड़ाव
नवगछिया रेलवे स्टेशन पूर्व-मध्य और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का महत्वपूर्ण स्टेशन जरूर है, लेकिन दक्षिण और पश्चिम भारत के कई प्रमुख महानगरों के लिए सीधी ट्रेनें भागलपुर जंक्शन से ही खुलती हैं। विक्रमशिला एक्सप्रेस, भागलपुर-सूरत, अंग एक्सप्रेस (बेंगलुरु), और हावड़ा रूट की ट्रेनों को पकड़ने के लिए उस पार के जिलों के लोग जान जोखिम में डालकर जलयान के जरिए भागलपुर पहुंचते हैं। वहीं, परदेस से कमाकर लौटने वाले कामगार भी पहले भागलपुर स्टेशन उतरते हैं और फिर आगे के सफर के लिए यहीं से आवागमन करते हैं।
प्रमंडलीय मुख्यालय, कोर्ट और प्रशासनिक कामकाज
भागलपुर न केवल एक जिला, बल्कि प्रमंडलीय मुख्यालय भी है। आयुक्त कार्यालय (कमिश्नरी), डीआईजी कार्यालय, वाणिज्य कर, भविष्य निधि, सहकारिता विभाग और उच्च न्यायालय से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए प्रमंडल स्तर के अधिकारी यहीं बैठते हैं। इसके साथ ही भागलपुर सिविल कोर्ट और विभिन्न अधिकरणों में मुकदमों की पैरवी के लिए रोजाना सैकड़ों लोग गंगा पार कर सुबह शहर पहुंचते हैं।
पूर्वी बिहार की सबसे बड़ी थोक मंडी (सुजागंज और नया बाजार)
कपड़ा, किराना, हार्डवेयर, दवा और कॉस्मेटिक का भागलपुर पूरे पूर्वी बिहार का सबसे बड़ा थोक व्यापारिक केंद्र है। नवगछिया बाजार, बिहपुर, नारायणपुर, कदवा से लेकर मधेपुरा तक के छोटे दुकानदार और खुदरा व्यापारी अपनी दुकानों का माल खरीदने के लिए सुजागंज, नया बाजार और स्टेशन रोड की थोक मंडियों में आते हैं। सुबह जलयान से आकर दिनभर खरीदारी करने के बाद ये व्यापारी शाम को ही वापस लौटते हैं।
उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू), इसके अंगीभूत कॉलेजों और शहर में फैले सैकड़ों निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राएं गंगा पार के क्षेत्रों से आते हैं। कई छात्र दैनिक रूप से आते-जाते हैं, जबकि कई छात्र हॉस्टल व लॉज में रहकर पढ़ाई करते हैं।
यही वजह है कि जब सड़क मार्ग (विक्रमशिला सेतु) बंद हुआ, तो लोगों की मजबूरियों ने जलयान पर दबाव कई गुना बढ़ा दिया। आने वालों की संख्या जाने वालों से 10 हजार अधिक होना स्पष्ट प्रमाण है कि सात जिलों की धड़कनें आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए भागलपुर शहर से ही जुड़ी हुई हैं।
