सैंडिस स्टेडियम विवाद में बीच का रास्ता; अंदर क्रिकेट, बाहर फुटबॉल व एथलेटिक्स के लिए 255×250 मीटर जमीन चिन्हित
Sandis Compound Bhagalpur Stadium Dispute: भागलपुर के ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड स्टेडियम में खेल संघों के बीच मैदान के उपयोग को ...और पढ़ें

भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में बाहरी मैदान की मापी करते खेल पदाधिकारी व अन्य
HighLights
सैंडिस स्टेडियम विवाद सुलझाने प्रशासन ने तेज की प्रक्रिया।
मुख्य मैदान क्रिकेट को, बाहरी मैदान अन्य खेलों को।
फुटबॉल संघ बाहरी मैदान में जाने को तैयार नहीं।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Sandis Compound Bhagalpur Stadium Dispute: ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड स्टेडियम के मुख्य मैदान पर अधिकार को लेकर विभिन्न खेल संघों के बीच छिड़े विवाद को सुलझाने के लिए जिला प्रशासन ने सुलह का रास्ता निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत रविवार को खेल विभाग की टीम ने बाहरी मैदान का स्थलीय निरीक्षण कर जमीन की मापी कराई।
हालांकि, जिला फुटबॉल संघ अब भी मुख्य स्टेडियम के अंदर ही अभ्यास और मैच कराने की मांग पर पूरी तरह अड़ा हुआ है। संघ का तर्क है कि बाहरी मैदान में आम नागरिकों और टहलने वालों की अत्यधिक भीड़ रहने के कारण वहां खिलाड़ियों का नियमित अभ्यास संभव नहीं हो सकेगा। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर हुई इस मापी से साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासन मुख्य स्टेडियम को केवल क्रिकेट के लिए विकसित और संरक्षित रखने के अपने पूर्व फैसले पर अडिग है।
जिला खेल पदाधिकारी (डीएसओ) शमीम अंसारी ने बताया कि अन्य खेलों को अभ्यास के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बाहरी मैदान की मापी कराई गई है। यह मापी परेड ग्राउंड के मंच के पास से शुरू की गई। पूर्वी दिशा से मंच तक करीब 255 मीटर लंबाई और 250 मीटर चौड़ाई (255×250 मीटर) के दायरे में जमीन उपलब्ध कराने की योजना है।
वे इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपेंगे। प्रशासन का आकलन है कि इतने बड़े क्षेत्रफल में मानक एथलेटिक्स ट्रैक तैयार किया जा सकता है, साथ ही रग्बी और फुटबॉल के खिलाड़ी भी यहां सुचारू रूप से अभ्यास कर सकेंगे।
मुख्य मैदान में नवंबर में होने हैं बीसीसीआई के मुकाबले
गौरतलब है कि आठ अप्रैल को तत्कालीन जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सैंडिस के मुख्य मैदान को केवल क्रिकेट ग्राउंड के रूप में विकसित करने का नीतिगत फैसला लिया गया था। कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) फंड के जरिए यहां आधारभूत संरचनाएं तेजी से विकसित की गई हैं।
आगामी नवंबर माह में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के घरेलू अंडर-19 और अंडर-23 मैचों का आयोजन भी यहां तय किया गया है।
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इसके मद्देनजर मुख्य ग्राउंड में खिलाड़ियों के लिए आधुनिक पवेलियन, दर्शकों के लिए दीर्घा (गैलरी) और पांच टर्फ विकेट समेत कई विश्वस्तरीय संसाधन तैयार किए गए हैं। इसी निर्णय के तहत फुटबॉल और एथलेटिक्स सहित अन्य विधाओं के लिए बाहरी मैदान में व्यवस्था बनाने का निर्देश जारी हुआ था।
शनिवार को खेल पदाधिकारी ने खेल संघों के साथ समन्वय बैठक कर मामला सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन सहमति नहीं बन सकी थी।
'1911 से खेला जा रहा फुटबॉल, दो साल से ठप है लीग'
प्रशासन के इस फॉर्मूले का विरोध करते हुए जिला फुटबॉल संघ के सचिव फारूक आजम ने स्पष्ट कहा कि संघ मुख्य स्टेडियम में ही खेलेगा। उन्होंने कहा कि क्रिकेट संघ ने पिछले दो वर्षों से सैंडिस के मुख्य स्टेडियम में फुटबॉल के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। इस अड़ंगे की वजह से दो साल से जिला फुटबॉल लीग का आयोजन नहीं हो सका है और जिले के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
फारूक आजम ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए तर्क दिया कि सैंडिस का मैदान वर्ष 1911 से फुटबॉल और एथलेटिक्स संघ का पारंपरिक केंद्र रहा है, जबकि क्रिकेट की शुरुआत यहां महज चार दशक पहले हुई थी। यहां सभी खेलों के एक साथ आयोजन की पुरानी गौरवशाली परंपरा रही है, ऐसे में फुटबॉल को मुख्य स्टेडियम से बाहर धकेलना कतई न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी मैदान पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संतोष ट्रॉफी जैसी बड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकी हैं। मैदान पर अपने खेल अधिकारों की सुरक्षा के लिए संघ ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है।
"क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों के खिलाड़ियों को भी अभ्यास के लिए मानक जगह मिले, इसी मंशा से बाहरी मैदान में 255×250 मीटर भूमि की मापी कराई गई है। इसकी पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जा रही है। यहां एथलेटिक्स के साथ-साथ फुटबॉल और रग्बी के लिए बेहतर ग्राउंड तैयार किया जाएगा ताकि खिलाड़ियों को किसी तरह की असुविधा न हो।"
