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एक मिनट की भी देरी नहीं! 42 मिनट के भीतर होगी मां दुर्गा की विशेष संधि पूजा, 108 कमल के फूलों से सजेगा ड्योढ़ी दरबार

Published: Mon, 19 Oct 2026 09:01 AM (IST)

Sandhi Puja Durga Puja: भागलपुर में शारदीय नवरात्र के अवसर पर बंगाली समुदाय सोमवार सुबह मां दुर्गा की विशेष 'संधि ...और पढ़ें

Sandhi Puja Durga Puja: 42 मिनट के भीतर 108 कमल और 108 दीपों से होगी मां दुर्गा की संधि पूजा; महाशय ड्योढ़ी सज धज कर तैयार।

Sandhi Puja Durga Puja: 42 मिनट के भीतर 108 कमल और 108 दीपों से होगी मां दुर्गा की संधि पूजा; महाशय ड्योढ़ी सज धज कर तैयार।

HighLights

  1. भागलपुर में बंगाली समुदाय की विशेष संधि पूजा।

  2. 42 मिनट में 108 कमल और दीपों से अनुष्ठान।

  3. महाशय ड्योढ़ी और सुजापुर मंदिर में तैयारियां पूर्ण।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर भागलपुर का बंगाली समुदाय सोमवार की सुबह मां दुर्गा की विशेष एवं अत्यंत फलदायी 'संधि पूजा' संपन्न करेगा। बंगाली दुर्गा पूजा परंपरा में संधि पूजा का महत्व सर्वोच्च माना जाता है। इस अनुष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यंत सूक्ष्म और सटीक समयावधि में होना है।

शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, संधि पूजा के लिए निर्धारित ठीक 42 मिनट के भीतर ही संपूर्ण पूजा विधि, आहुति और महाआरती संपन्न करनी होती है। इसमें एक मिनट की भी देरी या विचलन करने की मनाही होती है। नाथनगर स्थित रियासतकालीन महाशय ड्योढ़ी और सुजापुर दुर्गा मंदिर में इस विशेष पूजा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

108 कमल और 108 दीपों से जगमगाएगा मां का दरबार

सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष बनर्जी ने बताया कि सोमवार की सुबह सात बजे संधि पूजा का शुभारंभ होगा। इस अलौकिक अनुष्ठान में मां भगवती को 108 कमल के फूल अर्पित किए जाते हैं और 108 प्रज्वलित दीपों से माता का श्रृंगार व वंदन किया जाता है।

अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के प्रारंभिक 24 मिनट के इस संधिकाल (कुल 48 मिनट की संधि बेला, जिसमें 42 मिनट का मुख्य पूजा विधान) में मां दुर्गा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और मनोहारी दिखाई देता है। भक्तों को ऐसा अहसास होता है मानो मां चामुंडा रूप में साक्षात विराजमान हैं। संधि पूजा करने वाले श्रद्धालु कठोर उपवास रखते हैं और पूजा व आरती विधिवत संपन्न होने के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलते हैं।

संधि पूजा: धार्मिक महत्व व नियम एक नजर में

  • पूजा का समय: सोमवार सुबह 7:00 बजे से।

  • निर्धारित समयावधि: ठीक 42 मिनट (अष्टमी और नवमी तिथि का संधिकाल)।

  • अनिवार्य सामग्री: 108 कमल के फूल और 108 प्रज्वलित दीप।

  • प्रमुख स्थल: महाशय ड्योढ़ी (नाथनगर) एवं सुजापुर दुर्गा मंदिर, भागलपुर।

  • नियम: पूजा और आरती तय 42 मिनट के भीतर ही पूर्ण करना अनिवार्य; व्रतधारी पूजा संपन्न होने के बाद ही ग्रहण करते हैं अन्न-जल।

सप्तमी पर खोंइछा भरने के लिए उमड़ी महिलाओं की भीड़

इससे पूर्व रविवार को महासप्तमी के अवसर पर नाथनगर की महाशय ड्योढ़ी सहित शहर के तमाम प्रमुख दुर्गा मंदिरों में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने मां दुर्गा के दरबार में शीश नवाया और परिवार की सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य व आरोग्यता की कामना करते हुए मां की झोली में खोंइछा भरा।

पूजा पंडालों और मंदिर परिसरों में उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूजा समितियों के स्वयंसेवकों और पुलिस प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी। मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की कतारबद्ध एंट्री और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

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