भागलपुर के कनकैथी में ₹159 करोड़ से लगेगा कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट; HPCL से होगा MoU, गीले कचरे से बनेगी गैस और खाद
Bhagalpur CBG Plant Project: भागलपुर के कनकैथी में ₹159 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित होगा। ...और पढ़ें

Bhagalpur CBG Plant Project: भागलपुर के कनकैथी में ₹159 करोड़ से लगेगा कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट
HighLights
कनकैथी में ₹159 करोड़ का कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगेगा।
एचपीसीएल गीले कचरे से बायो-सीएनजी और जैविक खाद बनाएगी।
10 एकड़ जमीन 25 साल के लिए नगर निगम देगा।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur CBG Plant Project: भागलपुर महानगर से प्रतिदिन निकलने वाले सैकड़ों टन गीले कचरे के वैज्ञानिक समाधान और उससे हरित ऊर्जा तैयार करने की दिशा में नगर निगम को बड़ी कामयाबी मिली है। निगम के कनकैथी स्थित कचरा डंपिंग परिसर में लगभग 159 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से अत्याधुनिक कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित किया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। निगम प्रशासन की उच्चस्तरीय टीम शीघ्र ही पटना जाकर कंपनी के साथ इस समझौते पर अंतिम मुहर लगाएगी।
नगर विकास एवं आवास विभाग ने गत 23 अक्टूबर को भागलपुर सहित सूबे के चार प्रमुख नगर निगमों में सीबीजी प्लांट लगाने की दिशा में तेज कार्रवाई का निर्देश जारी किया था। इसके तहत भागलपुर क्लस्टर के लिए एचपीसीएल को कार्यकारी एजेंसी के तौर पर चयनित किया गया है।
10 एकड़ जमीन 25 साल के लिए मुफ्त, निगम के पास रहेगा मालिकाना हक
विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप भागलपुर नगर निगम ने कनकैथी स्थित अपने भूखंड में से 10 एकड़ जमीन एचपीसीएल को 25 वर्षों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराई है। समझौते के तहत जमीन का मूल मालिकाना हक नगर निगम के पास ही सुरक्षित रहेगा।
कनकैथी कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट: परियोजना का खाका
प्रस्तावित लागत: लगभग ₹159 करोड़
स्थान: कनकैथी डंपिंग ग्राउंड परिसर, भागलपुर
विकासकर्ता एजेंसी: हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)
प्रसंस्करण क्षमता: 135 टन गीला (जैविक) कचरा प्रतिदिन
जमीन की शर्त: 10 एकड़ जमीन, 25 वर्षों के लिए निःशुल्क उपयोग हेतु आवंटित
उत्पाद: कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG/बायो-सीएनजी) और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (सॉलिड फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर)
हस्तांतरण क्लॉज: 25 वर्ष की लीज अवधि पूर्ण होने पर कंपनी पूर्ण रूप से चालू स्थिति में प्लांट बिना किसी शुल्क के नगर निगम को सौंपेगी।
मॉडल एमओयू के प्रारूप के मुताबिक, 25 वर्ष की निर्धारित संचालन अवधि समाप्त होने के बाद कंपनी को पूरा प्लांट चालू और कार्यशील स्थिति में बिना किसी अतिरिक्त लागत के नगर निगम को हैंडओवर करना होगा। इससे भविष्य में यह प्लांट नगर निगम की एक स्थायी आय और ऊर्जा का स्रोत बन जाएगा।
निर्माण और मशीनरी का खर्च उठाएगी कंपनी, निगम देगा बुनियादी ढांचा
पीपीपी मोड की इस व्यवस्था के अंतर्गत प्लांट के सिविल निर्माण, आधुनिक तकनीकी संयंत्रों की स्थापना, आयातित मशीनरी और दैनिक परिचालन पर होने वाला संपूर्ण पूंजीगत (कैपेक्स) एवं परिचालन (ओपेक्स) खर्च एचपीसीएल वहन करेगी।
वहीं, नगर निगम की जिम्मेदारी प्लांट तक सुगम पहुंच के लिए चौड़ी संपर्क सड़क (एप्रोच रोड), निर्बाध बिजली कनेक्शन, जलापूर्ति, सीवेज और सतही जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की होगी। इन मूलभूत नागरिक सुविधाओं के विकास पर आने वाले संभावित खर्च का सटीक डीपीआर व आकलन तैयार कराने के लिए विभाग ने बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) के प्रबंध निदेशक से तकनीकी समन्वय करने का निर्देश दिया है। यह खर्च संबंधित नगर निकाय द्वारा वहन किया जाएगा।
135 टन जैविक कचरे से बनेगी बायो-सीएनजी और खाद
कनकैथी में स्थापित होने वाले इस प्लांट की प्रसंस्करण क्षमता 135 टन प्रतिदिन तय की गई है। घरों, होटलों और थोक सब्जी-फल मंडियों से एकत्रित किए गए पृथक (सेग्रीगेटेड) जैविक कचरे को वैज्ञानिक विधि से फर्मेंटेशन प्रोसेस में डाला जाएगा। इससे उच्च गुणवत्ता वाली मीथेन गैस (कंप्रेस्ड बायोगैस) तैयार होगी, जिसका उपयोग ऑटोमोबाइल और वाणिज्यिक सिलेंडरों में किया जा सकेगा।
इसके साथ ही, सह-उत्पाद के रूप में भारी मात्रा में जैविक खाद (ऑर्गेनिक मैन्योर) भी बनेगी, जिससे स्थानीय किसानों को रासायनिक उर्वरकों का एक प्राकृतिक विकल्प मिलेगा। अंतिम समझौते के उपरांत एचपीसीएल पर्यावरण मंजूरी (EC) और विस्तृत तकनीकी डिजाइन तैयार कर प्लांट निर्माण का कार्य तेजी से शुरू करेगी।
