भागलपुर में सड़क निर्माण को चाहिए 19.94 हेक्टेयर जमीन! वनभूमि के बदले वैकल्पिक भूमि की तलाश, 4 सड़क प्रोजेक्ट फसे
Bhagalpur Forest Land Road Projects: भागलपुर में चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के निर्माण में वनभूमि का पेंच फंसा है, जिसके ...और पढ़ें

Bhagalpur Forest Land Road Projects: भागलपुर-अमरपुर (SH-25) और सुल्तानगंज-तारापुर (SH-22) समेत 4 सड़कों के चौड़ीकरण में वनभूमि का पेच
HighLights
भागलपुर में चार सड़क परियोजनाएं वनभूमि के कारण अटकीं।
कुल 19.945 हेक्टेयर गैर-वनभूमि की आवश्यकता है।
जिला प्रशासन वैकल्पिक भूमि चयन में जुटा, मंजूरी चुनौती।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Forest Land Road Projects: भागलपुर जिले में सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने और यातायात को सुगम बनाने के लिए शुरू की गई चार महत्वपूर्ण सड़क निर्माण व चौड़ीकरण की परियोजनाओं के सामने वनभूमि का पेंच आ गया है। पथों के संरेखण (अलाइनमेंट) में वन क्षेत्र की भूमि आने के कारण सड़क निर्माण विभाग ने नियमानुसार समान क्षेत्रफल की वैकल्पिक गैर-वनभूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
इस संबंध में विभाग ने भागलपुर जिला प्रशासन को आधिकारिक पत्र भेजकर कुल 19.945 हेक्टेयर गैर-वनभूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि परियोजनाओं का निर्माण कार्य निर्बाध रूप से जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।
कजरैली-अमरपुर और सुल्तानगंज-तारापुर पथ में सबसे बड़ी अड़चन
जिला प्रशासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार, चार महत्वपूर्ण पथों के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के काम में वनभूमि का पेच फंसा है। इनमें सबसे प्रमुख परियोजना भागलपुर-अमरपुर वाया कजरैली पथ (एसएच-25) है, जिसके 0 से 16 किलोमीटर खंड के चौड़ीकरण के लिए सबसे अधिक 9.60 हेक्टेयर गैर-वनभूमि की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, मुंगेर पथ प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले सुल्तानगंज-तारापुर-संग्रामपुर-बेलहर-कटोरिया-चांदन-दर्दमारा (बिहार सीमा) पथ (एसएच-22) के 0 से 40 किलोमीटर खंड के लिए 5.590 हेक्टेयर वैकल्पिक जमीन की जरूरत बताई गई है। यह सड़क बांका और मुंगेर जिलों को आपस में जोड़ती है, जिससे इसका तकनीकी और सामरिक महत्व काफी अधिक है।
असरगंज और अगरपुर-कोतवाली पथ भी प्रभावित]
इसके अलावा, एशियाई विकास बैंक (ADB) की सहायता से बनने वाले धोरैया-इंग्लिशिया मोड़-असरगंज पथ के उन्नयन और चौड़ीकरण के लिए 3.321 हेक्टेयर गैर-वनभूमि की मांग की गई है। वहीं, भागलपुर-अगरपुर-कोतवाली पथ के 0 से 17.750 किलोमीटर खंड के लिए भी 1.434 हेक्टेयर भूमि की जरूरत है।
अधिनियमों के तहत यदि किसी विकास परियोजना में वन विभाग की भूमि का उपयोग किया जाता है, तो निर्माण एजेंसी को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए उतनी ही समतुल्य गैर-वनभूमि वन विभाग को हस्तांतरित करनी होती है, जहां भविष्य में वनीकरण (Afforestation) किया जा सके।
सड़क परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि का ब्योरा
परियोजना 1: भागलपुर-अमरपुर वाया कजरैली पथ (SH-25), 0 से 16 किमी खंड।
आवश्यक गैर-वनभूमि: 9.60 हेक्टेयर (सबसे बड़ी मांग)।
परियोजना 2: सुल्तानगंज-तारापुर-संग्रामपुर-बेलहर-कटोरिया-चांदन-दर्दमारा (SH-22), 0 से 40 किमी खंड।
आवश्यक गैर-वनभूमि: 5.590 हेक्टेयर।
परियोजना 3: धोरैया-इंग्लिशिया मोड़-असरगंज पथ (एशियाई विकास बैंक संपोषित उन्नयन)।
आवश्यक गैर-वनभूमि: 3.321 हेक्टेयर।
परियोजना 4: भागलपुर-अगरपुर-कोतवाली पथ, 0 से 17.750 किमी खंड।
आवश्यक गैर-वनभूमि: 1.434 हेक्टेयर।
कुल आवश्यकता: 19.945 हेक्टेयर गैर-वनभूमि।
जिलाधिकारी ने दिए भूमि चयन और स्वीकृतियों के निर्देश
सड़क निर्माण विभाग से पत्र मिलने के बाद जिलाधिकारी (डीएम) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर समाहर्ता (एडीएम) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग को इन प्रस्तावित सड़कों के संरेखण में आने वाली वनभूमि के बदले समतुल्य सरकारी या अधिग्रहित की जाने वाली गैर-वनभूमि को चिन्हित कर जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
हालांकि, प्रशासन के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती समतुल्य भूमि का भौतिक रूप से चयन करना और उस पर से वन विभाग एवं पर्यावरण मंत्रालय (MoEF) की समय पर मंजूरी प्राप्त करना है। हालांकि भूमि की आवश्यकता को लेकर विभाग ने अपनी मांग रख दी है, लेकिन जमीन का अंतिम रूप से चयन और परियोजना को गति देने के लिए आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों की कागजी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
