सीढ़ी लाइए, तभी बनेगा... भागलपुर में बिजली विभाग की मनमानी, 16 घंटे तक अंधेरे में रहे सबौरवासी
बिजली विभाग की लापरवाही के कारण भागलपुर के सबौर स्थित पत्रकार नगर कॉलोनी में ट्रांसफार्मर का फेज उड़ने से 16 ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर
HighLights
सबौर में ट्रांसफार्मर का फेज उड़ने से 16 घंटे बिजली गुल।
बिजली विभाग के पास सीढ़ी न होने से मरम्मत में देरी।
कम वोल्टेज और ट्रिपिंग से उपभोक्ता गर्मी में परेशान रहे।
ललन तिवारी, भागलपुर। बिजली विभाग की कार्यशैली का इससे बड़ा नमूना और क्या होगा कि ट्रांसफार्मर से फेज उड़ने के बाद उसे जोड़ने में करीब 16 घंटे लग गए। वह भी तब, जब बाढ़ और वर्षा का मौसम है और उमस भरी गर्मी के बीच बिजली लोगों के लिए बेहद जरूरी है।
सबौर नगर पंचायत की पत्रकार नगर कोलोनी में गुरुवार दोपहर से शुक्रवार सुबह तक उपभोक्ता बिजली की समस्या से जूझते रहे। विभाग की कथित त्वरित सेवा के दावे मौके पर पहुंचते-पहुंचते सीढ़ी तक की कमी में दम तोड़ते नजर आए।
पत्रकार नगर कोलोनी में बिजली आपूर्ति करने वाले ट्रांसफार्मर का फेज गुरुवार दोपहर करीब दो से तीन बजे के बीच उड़ गया। इसके बाद आपूर्ति पूरी तरह बंद तो नहीं हुई, लेकिन वोल्टेज इतना कम हो गया कि घरों में पानी का मोटर और फ्रिज चलना मुश्किल हो गया। पंखे तक ठीक से नहीं चल रहे थे और बल्ब की रोशनी भी काफी कम हो गई थी।
रात में मिस्त्री आया तो बोला-सीढ़ी लाइए
चंद घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने की दावेदारी करने वाले बिजली विभाग की जमीनी हकीकत रात होते-होते सामने आ गई। फेज उड़ने की शिकायत के बावजूद देर शाम तक कोई कर्मचारी समस्या देखने नहीं पहुंचा।
रात में जब परेशानी बढ़ी तो उपभोक्ताओं ने विभाग के जेई दीपक कुमार राही को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कुछ देर में सरकारी मिस्त्री भेजा गया, लेकिन मिस्त्री के पहुंचने के बाद समस्या का समाधान होने के बजाय विभागीय इंतजाम की एक और पोल खुल गई।
ट्रांसफार्मर के पोल पर चढ़ने के लिए विभाग के पास सीढ़ी तक उपलब्ध नहीं थी। मिस्त्री ने साफ कहा कि सीढ़ी उपलब्ध कराई जाए, तभी फेज ठीक किया जा सकेगा।
अब सवाल यह है कि रात के समय कोलोनी के उपभोक्ता सीढ़ी कहां से लाते। नतीजा यह हुआ कि फेज नहीं बन सका और सरकारी व्यवस्था की कमी का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ा।
रातभर रतजगा, सुबह बनी बिजली तो ट्रिपिंग ने बढ़ाई मुसीबत
फेज नहीं बनने के कारण कोलोनी के लोगों ने पूरी रात उमस और गर्मी में रतजगा कर बिताई। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
शुक्रवार सुबह करीब सात बजे फेज बनाया गया, तब जाकर बिजली आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद जगी, लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। आपूर्ति शुरू होने के बाद भी बार-बार ट्रिपिंग और कम वोल्टेज की समस्या बनी हुई है।
स्थिति यह है कि घरों में मोटर, फ्रिज समेत कई विद्युत उपकरण ठीक से नहीं चल पा रहे हैं। यानी बिजली आई भी तो पूरी तरह राहत नहीं मिली।
सवाल यह कि विभाग की तैयारी आखिर किसके लिए?
बाढ़ और वर्षा के मौसम में बिजली व्यवस्था को लेकर विभाग को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। ट्रांसफार्मर में खराबी आने पर तत्काल मरम्मत के लिए पर्याप्त संसाधन और कर्मी उपलब्ध होने चाहिए। लेकिन यहां फेज ठीक करने के लिए विभाग के पास सीढ़ी तक नहीं थी।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली विभाग की सेवा अब सिर्फ शिकायत दर्ज करने और आश्वासन देने तक सिमटती जा रही है। कागजों में व्यवस्था चाक-चौबंद है, लेकिन जमीन पर एक फेज जोड़ने के लिए भी पूरी रात गुजर जाती है।
सवाल यह है कि यदि मामूली खराबी के लिए उपभोक्ताओं को 16 घंटे इंतजार करना पड़े तो आपात स्थिति में विभाग की व्यवस्था कितनी भरोसेमंद होगी?
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