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भागलपुर में ODF डबल प्लस की तैयारी पर उठ रहे सवाल, शहर के शौचालय अब भी बदहाल

Published: Mon, 19 Jan 2026 11:32 AM (IST)

भागलपुर नगर निगम ओडीएफ डबल प्लस (Bhagalpur ODF Double Plus) प्रमाणन की तैयारी कर रहा है, लेकिन शहर में सार्वजनिक ...और पढ़ें

बडी खंजरपुर स्थित बंद पड़ा हुआ शौचालय। (जागरण)

बडी खंजरपुर स्थित बंद पड़ा हुआ शौचालय। (जागरण)

HighLights

  1. अधिकांश सार्वजनिक शौचालय बंद या उपयोग के लायक नहीं।

  2. पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।

  3. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत नगर निगम भागलपुर शहर को ओडीएफ डबल प्लस बनाए रखने और पुनः प्रमाणन प्राप्त करने की दिशा में औपचारिक पहल तो कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।

निगम की ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए वेबसाइट पर रिपोर्ट अपलोड करने और दावे प्रस्तुत करने की तैयारी है, परंतु शहर में सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की स्थिति मानकों पर खरी नहीं उतर रही है।

शहरी क्षेत्र में 40 से अधिक हाईटेक और दो मंजिला शौचालय विभिन्न वार्डों में बने हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश में ताले लटके हुए हैं या वे उपयोग योग्य नहीं हैं। कई स्थानों पर पानी, बिजली और प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। कहीं अतिक्रमण की समस्या है तो कहीं तकनीकी खामियों के कारण शौचालय बंद पड़े हैं।

बरारी हाई स्कूल के पास स्थित शौचालय पर अतिक्रमण है, जबकि खिरनीघाट, खंजरपुर, मायागंज समेत कई इलाकों के शौचालय लंबे समय से बंद हैं। ई-टॉयलेट पूरी तरह निष्क्रिय हैं और जरलाही शौचालय में डीप बोरिंग खराब होने से पानी की समस्या बनी हुई है।

एसटीपी की अनिवार्यता

ओडीएफ डबल प्लस मानक के तहत फीकल स्लज और सीवेज के सुरक्षित निस्तारण की अनिवार्यता है। इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन जरूरी है।

साहेबगंज स्थित ट्रीटमेंट प्लांट को मार्च तक चालू कराने के लिए निगम प्रशासन पर दबाव है, ताकि अप्रैल में स्वच्छता सर्वेक्षण और ओडीएफ जांच के लिए आने वाली केंद्रीय टीम के समक्ष बेहतर रैंकिंग हासिल की जा सके। हालांकि अभी तक शहर में सीवेज और मल के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई है। कई घरों के शौचालयों का मल सीधे नालों में बहाया जा रहा है, जिससे मानकों का उल्लंघन हो रहा है।

संचालन के लिए आउट सोर्सिंग एजेंसी जरूरी

शहर में यूरिनल की भारी कमी है। इसका परिणाम यह है कि लोग सड़क किनारे खुले में मूत्र त्याग को मजबूर हैं। वहीं, सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालयों के संचालन के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन अब तक नहीं हो सका है।

निविदा प्रक्रिया रद कर पुनः निविदा निकालनी पड़ी, जिससे व्यवस्था और प्रभावित हुई है। यदि समय पर एजेंसी का चयन हो जाता, तो निगम को सर्वेक्षण से पहले व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में मदद मिल सकती है।

यह सुविधा जरूरी

ओडीएफ डबल प्लस के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार नगर क्षेत्र में कहीं भी खुले में शौच या खुले में मल निस्तारण नहीं होना चाहिए। सभी घरों, झुग्गी-झोपड़ियों, निर्माण स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर कार्यशील शौचालय, नियमित सफाई, सेप्टिक टैंक की सुरक्षित सफाई, सक्शन मशीन का उपयोग और निकाले गए फीकल स्लज का ट्रीटमेंट प्लांट में निस्तारण अनिवार्य है।

साथ ही सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालय 24x7 चालू, साफ-सुथरे, पानी-बिजली की सुविधा से युक्त तथा महिलाओं, दिव्यांगों और बच्चों के लिए सुरक्षित होने चाहिए।

निगम ने आम सूचना किया जारी

इस बीच नगर निगम ने आम नागरिकों के लिए स्पष्ट किया है कि शहर के सभी सामुदायिक (सीटी) और सार्वजनिक शौचालयों (पीटी) पर कोई यूजर चार्ज नहीं लिया जाता। इनका संचालन और रखरखाव निगम स्वयं कर रहा है। निगम ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी समस्या या सुझाव के लिए वे ई-मेल nagarnigambhagalpur@gmail.com या टोल फ्री नंबर 18003456272 पर संपर्क करें।

हालांकि दावों के बीच जमीनी सच्चाई यह है कि ओडीएफ डबल प्लस की राह में अभी कई चुनौतियां बाकी हैं।