जागरण संवाददाता, भागलपुर। नगर निगम में मेयर सीमा साहा के खिलाफ तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पिछले पांच माह से पार्षदों के बीच हलचल चल रही थी। अखिरकार बुधवार को पटाक्षेप हो गया। इस बार डिप्टी मेयर राजेश वर्मा को छोड़ कर सिर्फ मेयर सीमा साहा के खिलाफ कुल 22 पार्षदों के नाम सामने आए हैं। बुधवार को इनके हस्ताक्षरयुक्त आवेदन को प्रमंडलीय आयुक्त, डीएम, मेयर, नगर आयुक्त को सौंपा गया। साथ ही बहुमत साबित करने के लिए बैठक बुलाने का भी आग्रह किया है। इसके साथ नगर विकास विभाग के मंत्री व प्रधान सचिव को ईमेल किया गया।

भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया नगर निगम

इस दौरान पार्षद संजय सिन्हा की अगुवाई में पार्षदों ने नगर निगम कार्यालय के प्रवेश द्वार पर मेयर सीमा साहा के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। पार्षदों ने कहा कि साढ़े चार साल में शहर का विकास पूरी तरह से बाधित रहा। शहर की सफाई व्यवस्था नारकीय बनी हुई है। डंपिंंग ग्राउंड में कचरा निस्तारण से लेकर वार्डों को सफाई संसाधन उपलब्ध में पूरी तरह विफल रही। स्वच्छता रैंकिंग में शहर सबसे पिछले पायदान पर है। नगर निगम इन दिनों घोटालों का गढ़ बन गया है। ट्रेड लाइसेंस में वित्तीय अनियमितता की जांच रही है। मजदूरों को फर्जी तरीके से भुगतान करने में मेयर की संलिप्तता है। शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने में कहा जाता है मजदूर नहीं है। लेकिन, मेयर के पति अनंत कुमार के पेट्रोल पंप कर्मी व चालक के नाम निगम ने मजदूरी भुगतान कर दिया। मजदूरों को अपने पाकेट में लेकर कार्य कराया जा रहा है लेकिन वार्ड में गंदगी है। इस भ्रष्टाचार के विरोध् में मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए है। पार्षदों ने बताया कि पार्षद के बैठने के लिए चार वर्ष में भवन निर्माण नहीं हुआ। लेकिन मेयर अपने चेंबर का बार-बार जीर्णोंद्धार कर रही है। सभी पार्षद प्रस्ताव पर चर्चा पर जुटेंगे। इसमें 40 पार्षदों के समर्थन का समर्थन मिलेगा। इस बार पार्षद कहीं भी सैर पर नहीं जाएंगे। शहर में ही रहेंगे। पार्षदों ने चिंता जताते हुए कहा कि छह माह बाद चुनाव होना है। जब कोई कार्य नहीं होगा तो जनता को क्या जवाब देंगे।

कब-कब किया हुआ

नगर निगम कार्यालय के सभागार में दोपहर एक बजे से पार्षद जुटने लगे। लेकिन नगर आयुक्त आयुक्त आवश्यक कार्य के लिए दोपहर 1.40 बजे नगर निगम के कार्यालय से चले गए। वहीं मेयर भी कार्यालय नहीं पहुंची थी। मेयर के पीए विकास शर्मा को दोपहर 1.38 बजे अविश्वास प्रस्ताव की कापी सौंपी गई। वहीं निगम के आगत-निर्गत शाखा में 1.40 बजे नगर आयुक्त के नाम आवेदन दिया गया। हालांकि देर शाम चार बजे नगर आयुक्त के साथ पार्षदों की वार्ता हुई। वहीं 1.45 बजे प्रमंडलीय आयुक्त और 1.55 में डीएम के कार्यालय में आवेदन दिया गया।

प्रस्ताव सौंपने में इनकी रही उपस्थिति

अविश्वास प्रस्ताव पर भले ही 22 पार्षदों का हस्ताक्षर है। लेकिन, आवेदन देने में अधिकांश पार्षदों ने दूरी बना ली। पांच पार्षद व छह पार्षद ही अधिकारी को आवेदन सौंपने में शामिल हुए। इसमें पार्षद पंकज दास, संजय सिन्हा, उमर चांद, साबरा, अरसदी बेगम, गोबिंद बनर्जी शामिल थे। वहीं पार्षद प्रतिनिधि में संजय तांती, सोईन अंसारी, असगर, मेराज व वार्ड 33 शामिल थे।

कब-कब लाया गया प्रस्ताव

- नौ जून 2017 : पार्षदों ने किया शपथ ग्रहण

- 18 सितंबर 2019 : पहली बार मेयर व डिप्टी मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

-25 सितंबर 2019 : बहस के बाद अविश्वास प्रस्ताव गिर गया

-27 नवंबर 2020 : दूसरी बार मेयर व डिप्टी मेयर पर लाया गया अविश्वास प्रस्ताव

- नौ दिसंबर 2020 : पार्षदों के साथ चर्चा के बाद गिर गया अविश्वास प्रस्ताव

- दो दिसंबर 2021 : तीसरी बार पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के लिए दिया आवेदन

प्रस्ताव लाने वाले पार्षद ने दिया तर्क

मेयर के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले पार्षद संजय सिन्हा व उमर चांद ने नगरपालिका अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव 27 नवंबर 2020 को लाया गया था। निगम में नौ दिसंबर को पार्षदों के साथ चर्चा के बाद प्रस्ताव गिर गया। आठ दिसंबर 2021 को एक वर्ष पूरा होगा। अधिनियम में दर्शाया गया है कि समय सीमा समाप्त होने के छह माह पहले तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। नौ जून 2022 को पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होगा। एक दिसंबर 2021 को अविश्वास पत्र दाखिल किया गया है। छह माह पूरा होने के सात दिन पहले देना है जो नियम संगत है।

इन नौ बिंदुओं पर मेयर के खिलाफ लाया प्रस्ताव

  • - वित्तीय अनियमितता के कारण पार्षदों की प्रतिष्ठा हुई कलंकित
  • -लगातार घोटाले में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मेयर की संलिप्तता
  • - जनोपयोगी योजनाओं के कार्य में शिथिलता
  • - निगम में निर्धारित समय पर बोर्ड की बैठक नहीं बुलाना
  • -मेयर द्वारा का डिप्टी मेयर व कर्मियों के बीच समन्वय नहीं बना पाना
  • - पार्षदों को बोर्ड एवं स्थायी समिति बैठक की प्रोसेङ्क्षडग की कापी उपलब्ध नहीं कराना
  • - पार्षदों के वार्ड की समस्या को मेयर द्वारा नहीं उठाना एवं पार्षद को सम्मान नहीं देना
  • -मेयर द्वारा मनमाने ढंग से कार्य काम करना, वार्ड के कार्य की पार्षदों को सूचना नहीं देना
  • - नगर निगम में आए दिन घोटाला कर सिलसिला चरम पर है
  • - जन्म तिथि की शपथ पत्र में गलत सूचना देना, नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र दें

इन पार्षदों ने प्रस्ताव पर किया हस्ताक्षर

अरसदी बेगम, साबरा, गजाला परवीन, एनुल निशा, बीबी बलिमा, पंकज कुमार दास, फिरोजा यासमीन, संजय कुमार सिन्हा, मो. उमर चांद, गोबिंद बनर्जी, सरयुग प्रसाद साह, हंसल स‍िंह, प्रीति देवी, अभिषेक कुमार, निशा दूबे, शिवानी देवी, अशोक पटेल, पाकीजा, कंचन देवी, सुनीता देवी, फरीदा आफरीन व बबिता देवी।

  • - 22 पार्षदों ने किया हस्ताक्षर, प्रस्ताव सौंपने में छह पार्षद व पांच पार्षद की मौजूदगी
  • - शहर में 51 पार्षदों में से वार्ड तीन के पार्षद का निधन होने से खाली है पद
  • -अविश्वास प्रस्ताव प्रस्ताव लाने के लिए एक तिहाई बहुमत यानि 17 पार्षदों की जरूरत
  • -मेयर को पार्षदों के साथ चर्चा के लिए निर्धारित करना है बैठक की तिथि

पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन दिया था वो प्राप्त हुआ है। नियम के तहत प्रस्ताव नहीं लाया गया है। पिछले प्रस्ताव का अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है। अब पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने में छह माह शेष है। तीन माह बाद आदर्श आचार संहिता लगेगा। ऐसे में तीन से चार माह में जनता के कार्यों में ध्यान देना है। हम नियम नहीं तोड़ेंगे, नियम पर चलेंगे। - सीमा साहा, मेयर

अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन प्राप्त हुआ है। पार्षदों से भी बातचीत हुई है। प्रस्ताव को लेकर प्रावधानों का अवलोकन किया जाएगा। विधि परामर्श भी लिया जाना है। दूसरी बार के प्रस्ताव का अध्ययन कर नियमानुकूल कार्रवाई होगी। - प्रफुल्ल चंद्र यादव, नगर आयुक्त

कौन होंगे दावेदार इस पर असमंजस

मेयर और डिप्टी मेयर के विरोध में प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों को भी पता नहीं है कि इस पदों के दावेदार कौन होंगे। सबसे दिलचस्प बात रही कि मेयर के कैबिनेट के सदस्य पार्षद अविश्वास प्रस्ताव में शामिल हुए हैं। वहीं, अविश्वास प्रस्ताव पत्र देने और लेने वाले के चेहरे पर मुस्कान की भी है। मेयर पक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले ऐेसे प्रावधान से इंकार कर रहे है। यह कहा जा रहा है जो प्रस्ताव लाया गया है वो नियम संगत नहीं है। बहरहाल पिछले दो बार प्रस्ताव लाया गया था। लेकिन, वोटिंग की नौबत नहीं हुई। जिन पार्षदों ने अविश्वास जताया था वो प्रलोभन में आकर अपना विरोध छोड़ विश्वास मत की ओर चले गए थे।

Edited By: Dilip Kumar Shukla