जहां बाढ़ आई ही नहीं, वहां मुखिया जी ने मां-पत्नी समेत 5 स्वजनों को बांट दी राहत की रेवड़ी; 35 हजार की रिकवरी नोटिस
Bhagalpur Sabour Flood Relief Scam भागलपुर के सबौर प्रखंड की खानकित्ता पंचायत में मुखिया ने बाढ़ न आने वाले क्षेत्र ...और पढ़ें

Bhagalpur Sabour Flood Relief Scam बाढ़ आई नहीं फिर भी मुखिया जी ने परिजनों में बांटी राहत की रेवड़ी
HighLights
मुखिया ने परिवार के पांच सदस्यों को दिलवाई राहत राशि।
बाढ़ प्रभावित न होने पर भी 35 हजार रुपये का फर्जीवाड़ा।
जांच के बाद रिकवरी नोटिस, कानूनी कार्रवाई की तैयारी।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Sabour Flood Relief Scam प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे बेबस पीड़ितों के लिए भेजी गई सरकारी मदद में सेंधमारी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सबौर प्रखंड की खानकित्ता पंचायत में जहां बाढ़ का पानी तक नहीं पहुंचा, वहां के मुखिया जी ने अपने पद का रसूख दिखाते हुए मां, पत्नी, मौसी और भाई की दो पत्नियों समेत परिवार के पांच सदस्यों को बाढ़ राहत की अनुग्रह अनुदान (जीआर) राशि की रेवड़ी बांट दी।
शिकायत के बाद जिला प्रशासन द्वारा कराई गई गहन जांच में इस फर्जीवाड़े की कलई पूरी तरह खुल गई है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से ली गई 35 हजार रुपये की सरकारी राशि वापस जमा करने के लिए रिकवरी नोटिस थमा दिया है। जांच की अंतिम रिपोर्ट जिलाधिकारी को समर्पित कर दी गई है।
घर वार्ड आठ में, राहत के लिए वार्ड छह में जोड़े नाम
खानकित्ता पंचायत इस वर्ष गंगा के जलस्तर में हुई वृद्धि से आंशिक रूप से प्रभावित हुई थी। पंचायत के किन वार्डों में बाढ़ का पानी घुसा, इसका सत्यापन कर मुखिया सुनील कुमार चौधरी ने ही अंचल कार्यालय को रिपोर्ट सौंपी थी। उनके द्वारा दिए गए पत्र में वार्ड तीन, चार, पांच और छह को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया था।
जांच में सामने आया कि मुखिया का परिवार वार्ड संख्या आठ में रहता है और इसका पुख्ता प्रमाण मतदाता सूची में दर्ज उनका पता है। वार्ड आठ में बाढ़ का कोई असर नहीं था। इसके बावजूद मुखिया ने अपनी पत्नी माला देवी, मां उषा देवी, मौसी दासो देवी तथा भाई की दो पत्नियों मीना देवी और प्रियंका देवी के नाम वार्ड छह के बाढ़ प्रभावित लाभुकों की सूची में शामिल करवा दिए। इसके बाद सभी के खातों में 7-7 हजार रुपये की दर से सरकारी सहायता राशि भेज दी गई।
अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष होते हैं मुखिया, सीओ ने बताई व्यवस्था
सबौर की अंचलाधिकारी (सीओ) दिव्या कुमारी ने बताया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को जीआर राशि पंचायत स्तरीय अनुश्रवण समिति की संस्तुति के बाद ही दी जाती है। इस समिति के पदेन अध्यक्ष स्वयं मुखिया होते हैं।
लाभुकों की सूची की जांच, नाम जोड़ने, हटाने और अंतिम रूप से सत्यापित कर हस्ताक्षर करने की प्राथमिक वैधानिक जिम्मेदारी मुखिया की होती है। मुखिया की रिपोर्ट के बाद ही प्रखंड स्तर पर प्रमुख की अध्यक्षता में समिति की बैठक होती है और पोर्टल पर सूची अपलोड की जाती है। जांच में यह पूरी तरह सिद्ध हुआ कि मुखिया का परिवार वार्ड आठ में रहता है, जबकि उन्होंने अपने परिजनों के नाम वार्ड छह की सूची में डलवाए थे।
संयुक्त परिवार में 5 लोगों को मिली राशि, 35 हजार की वसूली
आपदा प्रबंधन विभाग के अपर समाहर्ता (एडीएम) कुंदन कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर हुई जांच में सभी आरोप सही पाए गए हैं। सरकारी राशि के दुरुपयोग के मामले में तत्काल 35 हजार रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी कर दिया गया है।
एडीएम ने बताया कि जांच के दौरान मुखिया ने संयुक्त परिवार में रहने की बात कही थी। सरकारी नियमों के मुताबिक यदि परिवार संयुक्त है तो पूरे परिवार से केवल एक ही सदस्य को जीआर राशि मिल सकती है, जबकि यहां एक ही घर के पांच सदस्यों के खातों में राशि अंतरित की गई। पूरी जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है।
एफआईआर और पद से हटाने की लटकी तलवार, मुखिया की दलील
जांच रिपोर्ट के आधार पर अब मुखिया के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है। सरकारी राशि के गबन और गलत दस्तावेज तैयार करने के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के साथ ही पंचायती राज विभाग के जरिए मुखिया को पद से हटाने (पदच्युत करने) की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। खानकित्ता ग्राम कचहरी के सरपंच मो. इसराफिल ने भी मांग की है कि जांच में मामला सही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं अपने बचाव में मुखिया सुनील कुमार चौधरी का कहना है कि वार्ड स्तर से जो सूची उन्हें दी गई थी, समयाभाव के कारण वे उसकी सूक्ष्मता से जांच नहीं कर सके और अनजाने में यह गलती हो गई।
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