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₹2 की खातिर 2 घंटे का इम्तिहान! भागलपुर में दूध की सप्लाई 80% घटी; दूध हुआ महंगा, पनीर-मिठाई कम बन रहीं, दशहरे पर संकट

Published: Sun, 04 Oct 2026 11:24 AM (IST)

Milk Supply Crisis Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण ब्लॉक के कारण भागलपुर में दूध की आपूर्ति 80% घट गई है, ...और पढ़ें

Milk Supply Crisis Bhagalpur: भागलपुर में दूध की कम आपूर्ति हो रही है।

Milk Supply Crisis Bhagalpur: भागलपुर में दूध की कम आपूर्ति हो रही है।

HighLights

  1. विक्रमशिला सेतु बंद होने से दूध आपूर्ति 80% घटी।

  2. दूध की कीमत में ₹2 प्रति सवा किलो की बढ़ोतरी।

  3. त्योहारी सीजन में पनीर-मिठाई महंगी होने की आशंका।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Milk Supply Crisis Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु के चार महीने के पुनर्निर्माण ब्लॉक और वाहनों का चक्का थमने का सीधा असर अब शहर की रसोई और दैनिक उपभोक्ता बाजार पर दिखने लगा है। दियारा और नवगछिया क्षेत्र से रोजाना भागलपुर आने वाले दूध की आपूर्ति बुरी तरह लड़खड़ा गई है।

पुल बंद होने से नवगछिया से शहर में आने वाले दूध की आवक घटकर मात्र 20 प्रतिशत रह गई है। गंगा में वैकल्पिक जलयान (फेरी) के जरिए दूध ढोने में अतिरिक्त समय और भाड़े की दोहरी मार पड़ने के कारण शहर में दूध की कीमतों में तेजी आने लगी है।

पनीर व मिठाई महंगी होने की आशंका

भामाशाह चौक स्थित प्रमुख मिठाई कारोबारी मानवेंद्र शुक्ला ने बताया कि शहर के अधिकांश होटलों, चाय दुकानों और मिठाई प्रतिष्ठानों में दूध की मुख्य आपूर्ति नवगछिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों से ही होती थी। अब पुल बंद होने से बाजार में दूध की भारी कमी हो गई है।

लागत बढ़ने से दूध की दरों में तत्काल प्रभाव से ₹2 प्रति सवा किलो की बढ़ोतरी हो गई है। पहले जो सवा किलो दूध ₹68 में उपलब्ध था, वह अब ₹70 में मिल रहा है।

बाइक से सीधा सफर बंद

वहीं, तिलकामांझी के मिठाई विक्रेता अशोक यादव ने बताया कि सामान्य दिनों में दर्जनों दूध विक्रेता तड़के मोटरसाइकिल पर चार-चार केन बांधकर 40 से 50 मिनट में सीधे भागलपुर शहर के विभिन्न मुहल्लों व दुकानों तक दूध पहुंचा देते थे। लेकिन अब उन्हें अपने घरों से पहले वाहन या बाइक के जरिए नवगछिया के जाह्नवी चौक या महादेवपुर घाट तक पहुंचना पड़ रहा है।

सिर पर केन लादकर गंगा पार कर रहे विक्रेता

इसके बाद जहाज में चढ़ने-उतरने की मारामारी और फिर बियाडा या बाबूपुर घाट से ऑटो या ई-रिक्शा पकड़कर शहर के बाजारों तक दूध लाने में दो से तीन गुना अतिरिक्त समय और भाड़ा लग रहा है। कई छोटे दूध विक्रेता तो अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए दूध की भारी केन सिर पर रखकर फेरी जहाज से गंगा पार करने को मजबूर हैं।

दुर्गापूजा के बाजार पर संकट

व्यापारियों ने चिंता जताई है कि यदि दूध की यह किल्लत जल्द दूर नहीं हुई, तो आगामी दुर्गापूजा, दशहरा और दीपावली के त्योहारी सीजन में आम जनता को बड़ी महंगाई झेलनी पड़ेगी। फिलहाल मिठाई और पनीर की पुरानी कीमतों को यथावत रखा गया है, लेकिन अगर नवगछिया से दूध की सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो कारोबारियों को पनीर, छेना और खोआ से बनने वाली मिठाइयों के दाम बढ़ाने पर विवश होना पड़ेगा।

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