मिड-डे मील में 'अंडा पूरा और खाना कम'! भागलपुर में NGO और HM में तकरार, रसोइया और बच्चों ने मिला रोचक उत्तर
Bhagalpur Mid Day Meal Scam Probe: भागलपुर के मध्य विद्यालय कुतुबगंज में मध्याह्न भोजन योजना में 'अंडा पूरा और खाना ...और पढ़ें

Bhagalpur Mid Day Meal Scam Probe: मध्य विद्यालय कुतुबगंज।
HighLights
भागलपुर के कुतुबगंज स्कूल में मिड-डे मील अनियमितता उजागर।
शुक्रवार को पूरे अंडे, बाकी दिन कम बच्चों का भोजन।
शिक्षा विभाग ने मामले की जांच को टीम गठित की।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Mid Day Meal Scam Probe: सरकारी स्कूलों में बच्चों की सेहत और उपस्थिति संवारने के लिए चलने वाली मध्याह्न भोजन (पीएम पोषण योजना) में भागलपुर से एक बड़ा ही दिलचस्प और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर निगम क्षेत्र के मध्य विद्यालय कुतुबगंज में 'अंडा पूरा और खाना कम' का अजब खेल उजागर हुआ है।
स्कूल में दर्जनों बच्चों की उपस्थिति के बावजूद शुक्रवार को अंडा तो पूरे बच्चों के लिए लिया जाता था, लेकिन बाकी दिन महज 70 से 75 बच्चों के लिए ही भोजन स्वीकार किया जाता था। इस बात को लेकर स्कूल के प्रधानाध्यापक और भोजन आपूर्ति करने वाली एनजीओ (केंद्रीकृत रसोई) के बीच ठन गई है। मामले के तूल पकड़ते ही शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है और डीपीओ (एमडीएम) महेश प्रसाद ने मामले की तह तक जाने के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित कर दी है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुतुबगंज मध्य विद्यालय में नामांकित और उपस्थित बच्चों की संख्या अच्छी-खासी रहती है। केंद्रीकृत रसोई संचालित करने वाली एनजीओ का आरोप है कि स्कूल में बच्चों की हाजिरी पूरी होने के बाद भी प्रतिदिन केवल 70 से 75 बच्चों का ही भोजन लिया जाता था और यह कहकर टाल दिया जाता था कि खाना अच्छा नहीं है, इसलिए बच्चे अपने घर चले जाते हैं।
कुतुबगंज स्कूल MDM विवाद
विद्यालय: मध्य विद्यालय कुतुबगंज, नगर निगम क्षेत्र, भागलपुर।
विवाद का केंद्र: शुक्रवार को अंडा पूरा लिया जाना, जबकि सामान्य दिनों में उपस्थिति के बावजूद महज 70-75 बच्चों का भोजन लेना।
दोनों पक्षों की दलीलें:
स्कूल प्रशासन (HM): खाने की गुणवत्ता खराब होने से बच्चे घर चले जाते हैं।
सप्लायर (NGO): बच्चे उपस्थित रहने के बाद भी भोजन लेने में आनाकानी की जाती है।
जांच समिति संरचना: नगर निगम बीईओ (अध्यक्ष), जिला लेखापाल (पीएम पोषण योजना), बीआरपी नगर निगम, बीआरपी नाथनगर और बीआरपी गोराडीह (सदस्य)।
जांच का तरीका: लगातार एक सप्ताह तक भोजनावकाश में मौजूदगी, भोजन की गुणवत्ता व मात्रा की जांच, बच्चों व रसोइयों से लिखित राय।
वहीं दूसरी तरफ, शुक्रवार को अंडा वितरण के दिन स्कूल में मौजूद सभी बच्चों की पूरी गिनती के अनुसार अंडे लिए जाते थे। एनजीओ का सवाल है कि यदि खाना खराब होने से बच्चे घर लौटते हैं, तो शुक्रवार को अंडा लेने के लिए पूरी संख्या कैसे बनी रहती है? उधर, प्रधानाध्यापक ने भी कार्यालय में उपस्थित होकर एनजीओ द्वारा तैयार भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पांच सदस्यीय समिति एक हफ्ते तक चखेगी स्वाद, रखेगी नजर
दोनों पक्षों की परस्पर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीपीओ एमडीएम ने नगर निगम के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई है। इसमें पीएम पोषण योजना के जिला लेखापाल, नगर निगम के प्रखंड साधनसेवी (बीआरपी), नाथनगर के बीआरपी और गोराडीह के बीआरपी को सदस्य नियुक्त किया गया है।
समिति को सख्त निर्देश दिया गया है कि वह लगातार एक सप्ताह तक प्रतिदिन भोजनावकाश (लंच टाइम) के दौरान विद्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगी। टीम वहां भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, बच्चों को दी जाने वाली मात्रा और वितरण व्यवस्था का मौके पर प्रत्यक्ष अवलोकन करेगी।
बच्चों और रसोइयों से लिखित में लिया जाएगा सच
जांच निष्पक्ष और पारदर्शी रहे, इसके लिए समिति केवल निरीक्षण तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यालय के प्रधान शिक्षक, कार्यरत रसोइयों और सबसे महत्वपूर्ण—थाली परोसने वाले छात्र-छात्राओं से अलग-अलग लिखित मंतव्य लेगी। जांच दल विशेष रूप से यह पता लगाएगा कि बच्चे वास्तव में भोजन क्यों नहीं कर रहे हैं, क्या खाने की गुणवत्ता सचमुच खराब है या फिर वितरण में कोई अन्य आंतरिक बाधा है।
इस जांच के दौरान केंद्रीकृत रसोई के व्यवस्थापक को भी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है, ताकि वे मौके पर ही अपना पक्ष रख सकें। विभाग का कहना है कि समिति की विस्तृत रिपोर्ट और बच्चों की लिखित राय के आधार पर आगे की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
