दुर्गा पूजा पर सिर्फ किशोर कुमार के गाने ही क्यों बजते हैं? भागलपुर के जुबक संघ की 68 साल पुरानी अनूठी बंगाली परंपरा
Bhagalpur Jubak Sangh Durga Puja:भागलपुर के जुबक संघ द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा पंडाल में आधुनिक संगीत के बजाय केवल किशोर ...और पढ़ें

Bhagalpur Jubak Sangh Durga Puja : यहां लाउडस्पीकर पर गूंजते हैं किशोर दा के सदाबहार नगमे।
HighLights
भागलपुर में जुबक संघ पंडाल में बजते हैं सिर्फ किशोर कुमार के गीत।
यह 68 साल पुरानी बंगाली परंपरा शांति और शुद्ध संगीत का प्रतीक।
बेलूर मठ की पूजन पद्धति और बंगाली कारीगरों का विशेष योगदान।
डिजिटल डेस्क, भागलपुर। Bhagalpur Jubak Sangh Durga Puja:दुर्गा पूजा के दौरान जब अधिकांश पूजा पंडालों में आधुनिक भक्ति संगीत, रीमिक्स धुनों और कानफोड़ू डीजे का शोर सुनाई देता है, वहीं रेशमी शहर भागलपुर के मारवाड़ी पाठशाला परिसर में एक बिल्कुल अलग, सौम्य और कर्णप्रिय वातावरण देखने को मिलता है।
यहां जुबक संघ के पंडाल में लाउडस्पीकर पर केवल और केवल भारतीय संगीत के अमर गायक किशोर कुमार के हिंदी व बांग्ला सदाबहार गीत ही गूंजते हैं। किशोर दा के नगमे, पारंपरिक ढाक की थाप और बेलूर मठ की वैदिक मंत्रोच्चार इस पूरे आयोजन को एक आध्यात्मिक व सांस्कृतिक उत्सव बना देती है।
1958 में सरस्वती पूजा से हुई थी संस्था की नींव
जुबक संघ का इतिहास छह दशक से भी अधिक पुराना है। इसकी स्थापना वर्ष 1958 में सरस्वती पूजा के आयोजन के साथ हुई थी। इसके बाद संघ ने वर्ष 1983 में पहली बार दुर्गा पूजा का भव्य शुभारंभ किया। शुरुआती दौर में यह आयोजन पटल बाबू रोड स्थित अंगार कॉम्प्लेक्स परिसर में हुआ करता था। बाद में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भव्यता को देखते हुए वर्ष 2000 से इस पूजा को ऐतिहासिक मारवाड़ी पाठशाला के विशाल मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां यह आज भी अनवरत जारी है।
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क्यों बजते हैं सिर्फ किशोर कुमार के ही गीत?
पंडाल में केवल किशोर कुमार के गीत बजने के पीछे एक गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक लगाव है। जुबक संघ के संस्थापक सदस्यों में अधिकांश प्रबुद्ध बंगाली समाज के गणमान्य लोग शामिल थे। बंगाली समाज में किशोर कुमार केवल एक गायक नहीं, बल्कि एक भावना और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पूजे जाते हैं।
शांति, शालीनता और शुद्ध संगीत के प्रति इसी गहरे प्रेम के कारण समिति ने यह परंपरा बनाई कि पंडाल और मेला परिसर में किसी भी तरह के शोरगुल वाले गानों के बजाय सिर्फ किशोर दा के मधुर बांग्ला और हिंदी गीत ही बजाए जाएंगे। पूजा देखने आने वाले श्रद्धालु भी किशोर दा के गानों की धुन पर सुकून से पंडाल की भव्यता और मेले का आनंद लेते हैं।
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बेलूर मठ की पूजन पद्धति और बंगाल के कारीगरों का हुनर
जुबक संघ की पूजा पूरी तरह पारंपरिक बंगाली संस्कृति और अनुष्ठान पर आधारित होती है। यहां रामकृष्ण मिशन बेलूर मठ की विशेष पूजन पद्धति का पालन किया जाता है। पूजा संपन्न कराने के लिए पुरोहित पश्चिम बंगाल से आते हैं।
इसके अलावा मां दुर्गा की जीवंत व मनोहारी प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार, आकर्षक झांकी तैयार करने वाले कलाकार और पंडाल निर्माण के कुशल शिल्पी भी बंगाल से ही बुलाए जाते हैं। कोलकाता के ढाकियों की ढाक वादन परंपरा यहां की मुख्य पहचान है।
शहरवासियों की पहली पसंद है मारवाड़ी पाठशाला का मेला
भागलपुर शहर और जिले भर के लोगों की पहली प्राथमिकता मारवाड़ी पाठशाला में लगने वाले इस मेले में शामिल होने की होती है। मारवाड़ी पाठशाला का परिसर अत्यधिक विस्तृत होने के कारण यहां बच्चों और परिवारों के लिए मेला घूमने, खान-पान और खरीदारी की बेहतरीन व्यवस्था रहती है। समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष देश-विदेश के किसी ऐतिहासिक स्मारक, मंदिर या वैश्विक धरोहर की थीम पर गगनचुंबी पंडाल का निर्माण कराया जाता है।
वर्तमान में इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में प्रख्यात चिकित्सक डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. शांतनु कुमार घोष, जगदीश चंद्र मिश्र 'पप्पू जी', बबन साह, विभू घोष, दीपक शर्मा सहित जुबक संघ के तमाम पदाधिकारी व सदस्य दिन-रात सक्रिय रहते हैं।
