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बिहार के इस बड़े अस्पताल में 'खून के बदले ही मिलेगा खून'; स्वजन को पहले करना होगा रक्तदान, चार जोन में बंटा भागलपुर

Published: Thu, 18 Jun 2026 08:59 PM (IST)

भागलपुर के जेएलएनएमसीएच ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी के कारण अस्पताल प्रबंधन ने नए और सख्त नियम लागू ...और पढ़ें

मायागंज Bhagalpur: JLNMCH अस्पताल में 'खून के बदले देना होगा खून', बिना डोनर नहीं मिलेगा ब्लड; जानिए नया नियम

मायागंज Bhagalpur: JLNMCH अस्पताल में 'खून के बदले देना होगा खून', बिना डोनर नहीं मिलेगा ब्लड; जानिए नया नियम

HighLights

  1. जेएलएनएमसीएच ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी।

  2. सामान्य मरीजों के परिजनों को पहले करना होगा रक्तदान।

  3. थैलेसीमिया मरीजों के लिए चार जोन में बंटा भागलपुर।

भागलपुर, जागरण संवाददाता। भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) का ब्लड बैंक इन दिनों रक्त की भारी किल्लत से जूझ रहा है। विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) के अवसर पर भी अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद के मुताबिक स्वैच्छिक रक्तदान हासिल नहीं हो सका। अब इस संकट से उबरने और ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने कड़े और बड़े कदम उठाने का फैसला किया है।

प्राचार्य डॉ. संदीप लाल की अध्यक्षता में हुई हाई-लेवल बैठक

ब्लड बैंक में खून की कमी को दूर करने के उपायों पर चर्चा के लिए बुधवार को जेएलएनएमसीएच के प्राचार्य डॉ. संदीप लाल की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में एक महत्वपूर्ण आपात बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एचपी दुबे, उपाधीक्षक डॉ. महेश कुमार, डॉ. एसके सिंह, डॉ. अजय प्रताप, डॉ. दिव्या सिंह समेत विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष (HOD) मुख्य रूप से शामिल हुए।

थैलसीमिया मरीजों के लिए तय किए गए चार जोन, सिविल सर्जन को पत्र

बैठक के बाद प्राचार्य डॉ. संदीप लाल ने बताया कि अस्पताल के ब्लड बैंक से सबसे अधिक रक्त थैलसीमिया से पीड़ित मासूम मरीजों को दिया जाता है। अस्पताल द्वारा औसतन हर महीने करीब 175 यूनिट खून इन मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। इस बीच मुख्यालय से आए एक निर्देश के बाद अब जिले को चार अलग-अलग जोन में बांट दिया गया है, क्योंकि भागलपुर जिले में कुल चार ब्लड बैंक संचालित हैं (दो सरकारी- सदर अस्पताल व जेएलएनएमसीएच और दो निजी)।

अब थैलसीमिया मरीज जिस जोन के अंतर्गत आते हैं, उन्हें उसी संबंधित जोन के ब्लड बैंक से रक्त उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सिविल सर्जन (CS) को बकायदा एक पत्र लिखा गया है, जिसमें सदर अस्पताल से भी थैलसीमिया मरीजों को नियमानुसार रक्त उपलब्ध कराने और नई जोनल व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने को कहा गया है।

बिना डोनर नहीं मिलेगा खून, परिजनों को करना होगा पहले रक्तदान

बैठक में अस्पताल के आंतरिक मरीजों के लिए ब्लड इश्यू करने को लेकर एक बेहद सख्त नीति तय की गई है। नए निर्देश के अनुसार, अब अस्पताल में भर्ती किसी भी सामान्य मरीज को मुफ्त या बिना एक्सचेंज के खून नहीं दिया जाएगा। अगर किसी मरीज को खून की जरूरत है, तो उसके परिजनों को 'डोनर' के रूप में आगे आना होगा और पहले रक्तदान करना होगा। हालांकि, एक्सीडेंट या अत्यधिक गंभीर (Emergency) परिस्थितियों में डॉक्टरों के विवेक पर आपातकालीन मरीजों को बिना शर्त खून उपलब्ध कराया जाता रहेगा।

डॉक्टर की लिखित पर्ची और हीमोग्लोबिन रिपोर्ट होगी अनिवार्य

अस्पताल प्रबंधन ने ब्लड बैंक से होने वाली किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या दुरुपयोग को रोकने के लिए कागजी प्रक्रिया को भी सख्त कर दिया है। अब परिजनों को खून तभी अलॉट किया जाएगा, जब संबंधित वार्ड के डॉक्टर लिखित रूप में यह प्रमाणित करेंगे कि मरीज को खून चढ़ाना कितना अनिवार्य है। इसके साथ ही मरीज की हालिया हीमोग्लोबिन (Hb) टेस्ट रिपोर्ट दिखाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।