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'साहब सो रहे हैं, बाद में आना'... भागलपुर में मेज पर सोए मिले ब्लू व रेड शर्ट वाले कर्मी; ड्यूटी टाइम में खर्राटों की पोल खुली

Published: Sat, 24 Oct 2026 05:59 AM (IST)

Bhagalpur Sabour Block Office Sleeping Staff: भागलपुर के सबौर प्रखंड कार्यालय में किसान सलाहकार और मनरेगा ऑपरेटर ड्यूटी के दौरान ...और पढ़ें

Bhagalpur Sabour Block Office Sleeping Staff: दो कर्मचारी आराम से सो रहे हैं।

Bhagalpur Sabour Block Office Sleeping Staff: दो कर्मचारी आराम से सो रहे हैं।

HighLights

  1. सबौर प्रखंड कार्यालय में कर्मचारी ड्यूटी के दौरान सोते पाए गए।

  2. किसान सलाहकार और मनरेगा ऑपरेटर मेज पर आराम फरमाते दिखे।

  3. जनता परेशान, सरकारी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Sabour Block Office Sleeping Staff: सरकारी कार्यालयों में कामकाज के प्रति लापरवाही और सुस्ती के किस्से तो अक्सर सामने आते हैं, लेकिन भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड मुख्यालय से जो नजारा सामने आया है, वह सरकारी व्यवस्था और कार्यसंस्कृति पर 'डू नॉट डिस्टर्ब' का बोर्ड टांगने जैसा है। जब अपने जरूरी कार्यों के लिए आम जनता और किसान दफ्तरों के चक्कर काट रहे होते हैं, तब यहां तैनात कर्मचारी फाइलों के निपटारे के बजाय दफ्तर की मेजों को ही अपना बिस्तर बनाकर गहरी नींद का आनंद ले रहे हैं।

ब्लू शर्ट में किसान सलाहकार और रेड शर्ट में ऑपरेटर ने लगाया 'आराम फरमाओ' बोर्ड

सबौर के कृषि कार्यालय और मनरेगा कार्यालय में गुरुवार दोपहर को ड्यूटी के दौरान का नजारा प्रशासनिक अनुशासन को शर्मसार करने वाला था। सामने आई तस्वीरों में पहली तस्वीर कृषि कार्यालय की है, जहां ब्लू शर्ट (टी-शर्ट) पहने किसान सलाहकार कांच लगी बड़ी ऑफिस टेबल पर पूरी तरह पसरे हुए नजर आ रहे हैं। उनके सिर के नीचे एक हाथ तकिए का काम कर रहा है और दूसरा हाथ मेज पर बेपरवाह फैला हुआ है, जबकि सामने टेबल पर उनका मोबाइल रखा दिख रहा है।

वहीं दूसरी तस्वीर मनरेगा कार्यालय की है, जहां रेड शर्ट पहने कंप्यूटर ऑपरेटर आराम की सारी हदें पार करते दिखे। उन्होंने बाकायदा सिर के नीचे कुशन (तकिया) लगाया हुआ है, एक हाथ में मोबाइल पकड़ा हुआ है और चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान के साथ मेज पर लेटकर मीठी नींद ले रहे हैं।

दोपहर 2:45 बजे का समय, जनता परेशान और कर्मचारी बेपरवाह

हैरानी की बात यह है कि यह तस्वीरें दोपहर के ठीक उस समय की हैं जब कार्यालयों में कामकाज अपने चरम पर होता है। रेड शर्ट वाले ऑपरेटर की तस्वीर दोपहर 2:45 बजे की है और ब्लू शर्ट वाले किसान सलाहकार की तस्वीर ठीक उसके एक मिनट बाद यानी 2:46 बजे कैमरे में कैद की गई। यह वह समय होता है जब दूर-दराज के गांवों से पहुंचे किसान और मनरेगा मजदूर अपने आवेदनों व मजदूरी के भुगतान की जानकारी के लिए भटक रहे होते हैं।

सरकारी व्यवस्था में जनता के टैक्स के पैसे से मिलने वाले वेतन और जिम्मेदारियों को जिस तरह मेज पर सुला दिया गया है, उसने प्रखंड प्रशासन के पर्यवेक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार कर्मी ही ड्यूटी टाइम में चादर ताने बिना खर्राटे भरते रहेंगे, तो सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक कैसे पहुंचेगा।

 

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