पानी ने छीनी छत, सड़क बनी रसोई; भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों का जीवन के लिए संघर्ष
भागलपुर में बाढ़ ने हजारों परिवारों को बेघर कर दिया है, जिससे वे प्लास्टिक की छत के नीचे सड़क किनारे ...और पढ़ें
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बिहार में बाढ़ के बाद सड़क पर बन रहा खाना। फोटो जागरण
HighLights
बाढ़ ने हजारों परिवारों को बेघर कर सड़क पर ला दिया।
भोजन, आजीविका और पशु चारे का गंभीर संकट उत्पन्न हुआ।
प्रभावित परिवार प्लास्टिक के नीचे रहकर पानी उतरने का इंतजार कर रहे।
परिमल सिंह, भागलपुर। बाढ़ ने सिर्फ लोगों के घर नहीं डुबोए, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी को सड़क पर ला दिया है। घर पास है, लेकिन उसमें रहने की जगह नहीं। सामान पानी में डूबा है और परिवार सड़क किनारे प्लास्टिक तानकर रहने को मजबूर हैं।
इसी प्लास्टिक के नीचे बच्चों के साथ दिन कट रहा है और रात भी गुजर रही है। सड़क ही अब इन परिवारों का घर, रसोई और आराम करने की जगह बन गई है।
सबसे बड़ी परेशानी भोजन को लेकर है। बाढ़ की चपेट में आए कई परिवारों को अब तक मात्र दो से चार दिन ही भोजन मिल पाया है। इसके बाद नियमित भोजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। ऐसे में लोग जैसे-तैसे राशन जुटाकर सड़क किनारे चूल्हा जला रहे हैं।

कई परिवारों के पास खाना बनाने के लिए न तो पर्याप्त साधन हैं और न ही सूखी जगह। प्लास्टिक की आड़ में महिलाएं किसी तरह चूल्हा जलाकर बच्चों और परिवार के लिए भोजन तैयार कर रही हैं।
पन्नूचक घोघा की निर्मला देवी ने बताया कि उनका घर पास में ही है, लेकिन पानी में डूबा हुआ है। घर में रहना संभव नहीं है। इसलिए परिवार के साथ सड़क पर आना पड़ा। बच्चों को खाना खिलाने के लिए सड़क किनारे ही चूल्हा जलाना पड़ता है।
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उन्होंने बताया कि कुछ दिनों तक राहत के रूप में भोजन मिला, लेकिन अब नियमित भोजन की व्यवस्था नहीं है। परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता बच्चों का पेट भरने की है।
तीन हजार घरों में एक हजार प्रभावित
स्थानीय निवासी गौरीशंकर यादव व रामचंद्र मंडल ने बताया कि इस बार पिछले साल की तुलना में बाढ़ अधिक विकराल है। क्षेत्र में करीब तीन हजार घर हैं, जिनमें लगभग एक हजार घर बाढ़ से प्रभावित हैं।
बड़ी संख्या में परिवार सड़क पर दिन-रात गुजार रहे हैं। प्लास्टिक के नीचे चारपाई, कपड़े, बर्तन और जरूरी सामान समेटकर लोग किसी तरह गृहस्थी बचाने में जुटे हैं।
फसल डूबी, मजदूरी का रास्ता भी बंद
किसान दिवाली मंडल ने बताया कि बाढ़ ने लोगों की रोजी-रोटी भी छीन ली है। इस क्षेत्र के लोग मुख्य रूप से कृषि, मजदूरी और गाय का दूध बेचकर परिवार चलाते थे। खेतों में लगी फसल पानी में डूब गई है।

घर और सामान बचाने की चिंता के कारण लोग मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे हैं। इससे रोज की आमदनी बंद हो गई है। दूसरी ओर पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। पर्याप्त चारा नहीं मिलने से गायों के दूध देने की क्षमता भी घट गई है। दूध बेचकर होने वाली आय भी प्रभावित हुई है।
पानी उतरने का इंतजार
पानी ने घरों की दीवारों के साथ परिवारों की उम्मीदों को भी हिला दिया है। सड़क किनारे प्लास्टिक के नीचे रह रहे परिवार अब पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। उनके सामने तत्काल भोजन, सुरक्षित रहने की जगह और पशुओं के चारे की जरूरत है।
नया टोला फुलकिया निवासी विजय शर्मा व निर्मला देवी ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भीउजड़ी गृहस्थी और बर्बाद फसल को फिर से खड़ा करने की चुनौती रहेगी।
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