पानी उतरते ही शुरू होगा नुकसान का सर्वे, सरकार करेगी बाढ़ पीड़ितों की मदद; भागलपुर में मंत्री नीतीश का एलान
भागलपुर में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने तत्काल राहत के साथ बाढ़ के बाद ...और पढ़ें

मंत्री नीतीश मिश्रा अधिकारियों के साथ। फाइल फोटो
HighLights
प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने भागलपुर बाढ़ राहत की समीक्षा की।
पानी उतरने के बाद नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
बाढ़ पीड़ितों को तत्काल और दीर्घकालिक सहायता प्रदान की जाएगी।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच सरकार ने तत्काल राहत के साथ अब बाढ़ के बाद की चुनौती की तैयारी शुरू कर दी है। प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाना है।
पानी उतरने के बाद नुकसान का विस्तृत आकलन कर प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराना अगली बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भागलपुर को जिस भी संसाधन और सहायता की जरूरत होगी, राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी। जिला प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और वे स्वयं भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे।
871 से अधिक वार्ड और आठ लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित
प्रभारी मंत्री ने बताया कि भागलपुर में बाढ़ से आठ लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है। प्रभावित लोगों को राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन व आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित गांवों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि राहत कार्य में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।
पानी उतरने के बाद सड़क, पुल-पुलिया, तटबंध, घरों और अन्य सरकारी व निजी संरचनाओं को हुए नुकसान का आकलन कराया जाएगा। इसके आधार पर प्रभावित परिवारों और क्षतिग्रस्त संरचनाओं के लिए राहत व पुनर्वास की कार्रवाई होगी।
स्थायी समाधान की जरूरत
नीतीश मिश्रा ने कहा कि गंगा के बढ़ते जलस्तर और हर वर्ष आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को देखते हुए अब स्थायी समाधान पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
बाढ़ से जनजीवन प्रभावित होने के साथ विकास कार्यों से तैयार ढांचे को भी बार-बार नुकसान पहुंचता है। ऐसे में नदी प्रबंधन, डी-सिल्टिंग, नदी जोड़ने और अन्य जल प्रबंधन योजनाओं को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत है।
बेली ब्रिज के संबंध में प्रभारी मंत्री ने कहा कि यह अस्थायी व्यवस्था है और इसकी मरम्मत के लिए कभी न कभी आवागमन रोकना आवश्यक होगा।
हालांकि, लोगों की जरूरत और उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्था को देखते हुए फिलहाल आवागमन जारी रखा गया है। जिला प्रशासन से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर राज्य सरकार आगे का निर्णय लेगी।
फरक्का समझौते पर उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में हुए समझौते को काफी समय बीत चुका है। इतने वर्षों के अनुभव और उसके प्रभावों की समीक्षा पर चर्चा होना स्वाभाविक है। बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए समय के अनुसार नीतियों और व्यवस्थाओं में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
