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भागलपुर में 20 हजार यात्रियों ने की गंगा की सैर; जाने में डेढ़ घंटा तो लौटने में लगे 55 मिनट, बोट ने 15 मिनट में

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:15 AM (IST)

Bhagalpur Vikramshila Ferry Service विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण के कारण भागलपुर के बियाडा घाट और नवगछिया के जाह्नवी चौक घाट ...और पढ़ें

Bhagalpur Vikramshila Ferry Service विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण के कारण भागलपुर में फेरी सेवा।

Bhagalpur Vikramshila Ferry Service विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण के कारण भागलपुर में फेरी सेवा।

HighLights

  1. विक्रमशिला सेतु पुनर्निर्माण के कारण फेरी सेवा का शुभारंभ।

  2. पहले दिन 20 हजार से अधिक यात्रियों ने गंगा पार की।

  3. तेज धारा के बावजूद स्पीड बोट ने 15 मिनट में वापसी की।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Vikramshila Ferry Service विक्रमशिला सेतु के चार महीने के पुनर्निर्माण ब्लॉक के मद्देनजर गुरुवार से भागलपुर के बियाडा घाट और नवगछिया के जाह्नवी चौक घाट के बीच नियमित फेरी सेवा का विधिवत आगाज हो गया। पहले ही दिन दोनों छोर पर गंगा पार करने के लिए मुसाफिरों का हुजूम उमड़ पड़ा।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के अनुसार दोनों घाटों के बीच जलमार्ग की दूरी लगभग चार किलोमीटर है। जिला प्रशासन द्वारा अनुबंधित आठ बड़े जहाजों ने पहले दिन करीब 20 ट्रिप लगाए, जिसमें 20 हजार से अधिक दैनिक यात्रियों, शिक्षकों और बाइक सवारों ने गंगा की लहरों पर सफर तय किया।

गंगा के उफान और तेज धारा का सीधा असर जहाजों की गति और समय-सारणी पर देखने को मिला। जाह्नवी चौक से बियाडा घाट आते वक्त धारा का साथ मिलने के कारण जहाजों की रफ्तार करीब सात नॉट (12 से 15 किमी प्रति घंटा) रही और मुसाफिर औसतन 55 से 60 मिनट में भागलपुर छोर पर पहुंच गए।

इसके विपरीत, बियाडा से जाह्नवी चौक की ओर जाते समय गंगा के विपरीत प्रवाह के कारण जहाजों की गति घटकर महज एक से दो नॉट रह गई, जिससे इस दिशा में औसतन डेढ़ से दो घंटे का समय लगा। जहाज संचालकों को तेज बहाव के दबाव से बचने के लिए बाबूपुर के समीप से अप-स्ट्रीम में चढ़ाकर जहाज चलाना पड़ा। सुबह 6:28 बजे खुला पहला जहाज 'स्वामी परमहंस' धारा के तीखे प्रतिरोध के कारण दो घंटे सात मिनट में जाह्नवी चौक पहुंच सका।

जहाजों की राह सुगम करेगा IWAI, जारी हुआ रूट चार्ट

गंगा में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने और राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 (NW-1) के भागलपुर स्ट्रेच में तेज करंट को देखते हुए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने कमान संभाल ली है। प्राधिकरण के भागलपुर उप-कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन और जहाज ऑपरेटरों को हाइड्रोग्राफिक सर्वे के आधार पर प्रमाणित 'रूट चार्ट' सौंप दिया गया है।

पहले दिन का जलमार्ग रिपोर्ट कार्ड: गति, समय व आंकड़े

  • जलमार्ग की कुल दूरी: करीब 4 किलोमीटर (बियाडा घाट से जाह्नवी चौक घाट)।

  • परिचालन क्षमता: 08 प्रमुख जहाज, दिनभर में कुल 20 ट्रिप।

  • मुसाफिरों की संख्या: 20,000 से अधिक यात्री एवं सैकड़ों बाइक सवार।

  • जहाजों की गति व समय:

    • डाउनस्ट्रीम (जाह्नवी चौक से बियाडा): गति 7 नॉट (12–15 किमी/घंटा), समय लगा 55 से 60 मिनट।

    • अपस्ट्रीम (बियाडा से जाह्नवी चौक): गति 1 से 2 नॉट, समय लगा डेढ़ से दो घंटे (पहला जहाज 'स्वामी परमहंस' 2 घंटे 7 मिनट में पहुंचा)।

  • स्पीड बोट का सफर: दिनभर में 12 फेरे (प्रति ट्रिप-75 यात्री); जाने में 1 घंटा, लौटने में महज 15 मिनट।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जलस्तर अधिक होने के कारण अंडरवाटर करंट और सिल्ट जमाव की स्थिति बदलती रहती है। यदि किसी जहाज के कप्तान को दिशा, पानी की गहराई (ड्राफ्ट) अथवा तकनीकी नेविगेशन में कोई बाधा आती है, तो वे तुरंत प्राधिकरण के कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। प्राधिकरण की विशेष टीम सुरक्षित और निर्धारित जलमार्ग पर परिचालन सुनिश्चित कराने के लिए ऑन-कॉल तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी।

तेज धार में बोट का रोमांच

बड़े जहाजों के साथ-साथ बियाडा से जाह्नवी चौक के बीच संचालित हो रही स्पीड बोट्स ने यात्रियों को यात्रा के साथ-साथ रोमांच का अनूठा अनुभव कराया। तेज लहरों को चीरती हुई जब बोट आगे बढ़ी, तो मुसाफिरों का उत्साह देखते ही बना। एक बोट संचालक ने बताया कि उन्होंने दिनभर में कुल 12 फेरे लगाए, जिसमें प्रत्येक ट्रिप में औसतन 75 यात्री सवार हुए।

15 मिनट में पार कराई गंगा

बियाडा से जाह्नवी चौक जाने में बोट को लगभग एक घंटा लगा, लेकिन वापसी में अनुकूल धारा के सहारे बोट ने यह फासला रिकॉर्ड 15 मिनट में तय कर लिया। बोट में यात्रा करने वाले अधिकांश यात्री नौकरीपेशा, कॉलेज व्याख्याता और शिक्षक थे। शिक्षकों ने कहा कि दैनिक आवागमन की आपाधापी के बीच गंगा का यह सफर मन को तरोताजा करने वाला रहा, हालांकि जाह्नवी चौक घाट पर बेहतर एप्रोच पथ और प्रकाश व्यवस्था न होने से यात्रियों को थोड़ी असुविधा का सामना भी करना पड़ा।

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