विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय; पूर्णिया में भागलपुर के 30 किसानों की विशेष ट्रेनिंग शुरू, सीखेंगे आधुनिक तकनीक

Published: Tue, 03 Nov 2026 12:20 AM (IST)

Bhagalpur Makhana Farming Training: भागलपुर के 30 किसानों को मखाना की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण देने के लिए ...और पढ़ें

Bhagalpur Makhana Farming Training: मखाना का प्रश‍िक्षण प्राप्‍त करें।

Bhagalpur Makhana Farming Training: मखाना का प्रश‍िक्षण प्राप्‍त करें।

HighLights

  1. भागलपुर के 30 किसानों को मखाना खेती का प्रशिक्षण।

  2. पूर्णिया में चार दिवसीय आधुनिक कृषि प्रशिक्षण शुरू।

  3. वैज्ञानिक विधियों से किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Makhana Farming Training: जिले के अनुकूल जल-जलवायु क्षेत्रों में मखाना की व्यावसायिक खेती का विस्तार करने और कृषकों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने ठोस पहल की है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), भागलपुर के तत्वावधान में जिले के 30 चयनित प्रगतिशील किसानों को मखाना की आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिलाने के लिए पूर्णिया भेजा गया है।

भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया में सोमवार, दो नवंबर से इस चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ, जो पांच नवंबर तक संचालित होगा।

प्रशिक्षण सत्र में भाग लेने के लिए जिले के बिहपुर, रंगरा चौक, खरीक, नवगछिया, गोपालपुर, गौराडीह और सन्हौला सहित विभिन्न प्रखंडों से उन किसानों का चयन किया गया है, जिनके क्षेत्रों में प्राकृतिक जलजमाव, चंवर या तालाब की प्रचुर उपलब्धता है। किसानों के इस दल का नेतृत्व प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम) कुमार गौतम कर रहे हैं।

चंवर क्षेत्रों में मखाना की अपार संभावनाएं, वैज्ञानिक तरीकों से बढ़ेगी पैदावार

विभागीय जानकारों के अनुसार, भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल सहित गंगा के तराई और चंवर वाले इलाकों में मखाना उत्पादन की अनुकूल पारिस्थितिकी मौजूद है। वर्तमान में वैश्विक और घरेलू बाजार में सुपरफूड के रूप में मखाना (फॉक्स नट) की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी मांग को भुनाने और पारंपरिक फसलों की जगह उच्च मूल्य वाली खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों से सीधे जोड़ा जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को मखाना की उन्नत किस्मों के चयन, वैज्ञानिक विधि से नर्सरी तैयार करने, जल प्रबंधन, कीट व रोग नियंत्रण, कटाई और गुणवत्तापूर्ण लावा (पॉपिंग) तैयार करने के आधुनिक तौर-तरीके सिखाए जाएंगे। आत्मा अधिकारियों का मानना है कि वैज्ञानिक तकनीकों के प्रयोग से न केवल प्रति एकड़ उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि जिले में मखाना प्रसंस्करण और पैकेजिंग के जरिए ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

यह भी पढ़ें- 'काला सोना' हुआ सुपर ट्रेंडिंग! बिहार के किस जिले में क्या है मखाने का भाव? 4 सूता वाला मखाना सस्ता तो 6 सूता 1200/Kg

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।