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98 लाख के फर्जी वेतन खेल के बाद सख्ती! भागलपुर में शिक्षकों का बनेगा मास्टर डाटा, निगरानी केस से बैंक खाते तक की जांच

Published: Sun, 25 Oct 2026 01:35 AM (IST)

Bhagalpur Teacher Master Data Salary Scam: भागलपुर शिक्षा विभाग 98 लाख रुपये के फर्जी वेतन भुगतान के बाद सतर्क हो ...और पढ़ें

Bhagalpur Teacher Master Data Salary Scam: 98 लाख के फर्जी वेतन भुगतान के बाद जागा शिक्षा विभाग

Bhagalpur Teacher Master Data Salary Scam: 98 लाख के फर्जी वेतन भुगतान के बाद जागा शिक्षा विभाग

HighLights

  1. 98 लाख रुपये के फर्जी वेतन भुगतान का गंभीर मामला सामने आया।

  2. शिक्षकों का केंद्रीकृत 'मास्टर डाटा' तैयार करने की व्यापक कवायद शुरू।

  3. फर्जी शिक्षकों और अनधिकृत भुगतानों पर स्थायी रोक लगेगी।

अभिषेक प्रकाश, भागलपुर। Bhagalpur Teacher Master Data Salary Scam: जिले में 98.12 लाख रुपये के कथित फर्जी वेतन भुगतान का गंभीर मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। सरकारी खजाने में सेंधमारी और अभिलेखों में हेराफेरी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने नियोजित और विशिष्ट शिक्षकों का एक केंद्रीकृत 'मास्टर डाटा' तैयार करने की व्यापक कवायद शुरू की है।

इसके तहत शिक्षकों के वेतन भुगतान से लेकर उनकी संपूर्ण सेवा स्थिति का शत-प्रतिशत सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, ताकि कागजों पर चल रहे फर्जी शिक्षकों और अनधिकृत भुगतानों को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।

BEO को सौंपे गए दो अलग-अलग प्रपत्र, प्राथमिकता पर मांगी रिपोर्ट

रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को दो अलग-अलग विस्तृत प्रपत्र उपलब्ध कराए गए हैं। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर अपने-अपने प्रखंडों के शिक्षकों से जुड़ी निर्धारित जानकारियां जुटाकर जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराएं।

शिक्षक मास्टर डाटा व सत्यापन: एक नजर में

  • जिले में शिक्षकों का आंकड़ा: 5000+ विशिष्ट शिक्षक (पूर्व नियोजित), करीब 2200 वर्तमान नियोजित शिक्षक और BPSC में चयनित पूर्व नियोजित शिक्षक।

  • कवायद की मुख्य वजह: 98.12 लाख रुपये के कथित फर्जी वेतन भुगतान का मामला उजागर होना।

  • मांगी गई प्रमुख जानकारियां: जॉइनिंग की तिथि, वर्तमान पदस्थापन, बैंक खाता विवरण, खाता परिवर्तन का कारण।

  • जांच के दायरे में विशेष बिंदु: तबादले के बाद अन्य जिले/स्कूल गए शिक्षक, सेवामुक्त कर्मी, मृत शिक्षक और निगरानी अन्वेषण (Vigilance) के लंबित मामले।

  • सत्यापन का आधार: अगस्त और सितंबर माह में बैंकों को भेजी गई आधिकारिक वेतन एडवाइस से क्रॉस-मैचिंग।

गौरतलब है कि जिले में वर्तमान में 5 हजार से अधिक विशिष्ट शिक्षक कार्यरत हैं, जो पूर्व में नियोजित थे और सक्षमता परीक्षा के बाद विशिष्ट बने हैं। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक भी हैं जो पहले नियोजित थे और बाद में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कर विद्यालय अध्यापक बने।

इसके अलावा जिले में लगभग 2200 नियोजित शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी अलग-अलग श्रेणियों और उनके संवर्ग परिवर्तन के कारण रिकॉर्ड में विसंगतियां आने की आशंका बनी रहती थी, जिसे अब मास्टर डाटा के जरिए दुरुस्त किया जा रहा है।

तबादला, निगरानी केस और बैंक खाता बदलने का हिसाब

जारी किए गए दोनों प्रपत्रों के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर अब तक की सेवा का पूरा इतिहास खंगाला जाएगा। इसमें नियोजित से विशिष्ट बने शिक्षकों, स्थानांतरण के बाद दूसरे विद्यालय अथवा अन्य जिलों में गए शिक्षकों, सेवाकाल के दौरान या सेवानिवृत्ति के उपरांत दिवंगत हुए शिक्षकों का स्पष्ट ब्योरा मांगा गया है।

इसके साथ ही निगरानी अन्वेषण (विजिलेंस जांच) का सामना कर रहे और सेवा से बर्खास्त या मुक्त किए गए शिक्षकों की अलग से सूची तैयार होगी। विभाग ने विशेष रूप से शिक्षकों के प्रथम योगदान की तिथि, चालू बैंक खाता संख्या और बैंक खाता बदले जाने की ठोस वजह दर्ज करने को कहा है। फर्जीवाड़े की पुष्टि के लिए नियोजित शिक्षकों के मामले में अगस्त और सितंबर माह में बैंकों को भेजी गई आधिकारिक वेतन एडवाइस से इन सभी आंकड़ों का अनिवार्य मिलान किया जाएगा।

गलत भुगतान पर लगेगी स्थायी लगाम: RDDE

क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDDE) सुभाष कुमार गुप्ता ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया का प्राथमिक उद्देश्य विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों का भौतिक और वित्तीय सत्यापन करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मास्टर डाटा तैयार हो जाने से यह शीशे की तरह साफ हो जाएगा कि विभागीय अभिलेखों में मौजूद शिक्षक वास्तव में सेवा में सक्रिय हैं या नहीं।

इससे स्थानांतरण, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति या सेवामुक्ति के बाद भी अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही से होने वाले अवैध वेतन भुगतान की तुरंत पहचान हो सकेगी और फर्जीवाड़े पर स्थायी विराम लगेगा।

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