बकायेदारों पर एक्शन : भागलपुर DM अलंकृता पांडेय ने 71 अफसरों को दी नीलाम पत्र पदाधिकारी की शक्ति; लिस्ट चेक कर लें
Bhagalpur Public Demand Recovery: भागलपुर जिला प्रशासन ने सरकारी राजस्व और लंबित लोक मांग की वसूली में तेजी लाने के ...और पढ़ें
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Bhagalpur Public Demand Recovery: बकायेदारों पर शिकंजा, डीएम अलंकृता पांडेय ने दिया निर्देश
HighLights
भागलपुर में 71 अधिकारियों को नीलाम पत्र अधिकारी की शक्ति मिली।
सरकारी राजस्व और लंबित लोक मांग वसूली में तेजी आएगी।
बकायेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अब स्थानीय स्तर पर होगी।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Public Demand Recovery: सरकारी राजस्व और विभिन्न विभागों की लंबित लोक मांग (पब्लिक डिमांड) की वसूली को गति देने तथा सर्टिफिकेट मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए भागलपुर जिला प्रशासन ने कड़ा और संगठित कदम उठाया है। समाहर्ता की अनुशंसा के आधार पर 'बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914' की धारा 3(3) के तहत जिले के 71 पदाधिकारियों को उनके निर्धारित कार्यक्षेत्र के लिए नीलाम पत्र पदाधिकारी (सर्टिफिकेट ऑफिसर) की विशेष वैधानिक शक्तियां प्रदान कर दी गई हैं।
इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय से विभिन्न महकमों के वर्षों से लंबित पड़े नीलाम पत्र वादों के निपटारे और बकायेदारों से राशि की रिकवरी में तेजी आएगी। समाहर्ता द्वारा 11 सितंबर को भेजी गई आधिकारिक अनुशंसा के आलोक में जिला नीलाम पत्र शाखा ने 22 सितंबर को विस्तृत आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र प्रेषित कर दिया है।
जिला स्तर से लेकर अनुमंडल तक के अफसरों को अधिकार
जारी आदेश के अनुसार, नीलाम पत्र पदाधिकारी की शक्ति पाने वालों में जिला और प्रमंडल स्तर के कई वरीय अधिकारी शामिल हैं। इनमें राज्य कर अपर आयुक्त (अन्वेषण) भागलपुर प्रमंडल, राज्य कर सहायक आयुक्त, उप निर्वाचन पदाधिकारी, वरीय कोषागार पदाधिकारी, जिला अवर निबंधक, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला खेल पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला उद्यान पदाधिकारी और उप निदेशक (कृषि) प्रमुख हैं।
नीलाम पत्र शक्ति
अधिनियम व धारा: बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 की धारा 3(3)।
सशक्त किए गए कुल अधिकारी: 71 पदाधिकारी (जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर)।
शामिल प्रमुख विभाग: वाणिज्य कर (राज्य कर), कृषि, खाद्य आपूर्ति, समाज कल्याण, कोषागार, निबंधक, खेल व पशुपालन।
आदेश जारी होने की तिथि: 22 सितंबर (समाहर्ता की 11 सितंबर की अनुशंसा पर आधारित)।
प्रभाव: संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्र के बकायेदारों को कानूनी नोटिस, वारंट और संपत्ति कुर्की-नीलामी का आदेश देने में सक्षम।
इसके अतिरिक्त अनुमंडल स्तर पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी और सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को भी उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में सीधे सुनवाई और वसूली आदेश पारित करने का प्राधिकार सौंपा गया है।
प्रखंडों के अधिकारी भी संभालेंगे कमान, नोटिस से लेकर नीलामी तक का हक
जिला प्रशासन ने व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करते हुए प्रखंड स्तर तक के अफसरों को जवाबदेह बनाया है। जारी सूची में सबौर, नाथनगर, शाहकुंड, सुल्तानगंज, पीरपैंती, कहलगांव, जगदीशपुर, गोपालपुर, बिहपुर, नारायणपुर, नवगछिया, इस्माईलपुर, रंगरा चौक और खरीक प्रखंडों के पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। इन सभी प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ), प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) और प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों (बीडब्ल्यूओ) को अपने-अपने क्षेत्र में सर्टिफिकेट ऑफिसर के रूप में कार्य करने की शक्ति दी गई है।
इस नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य मामलों के निष्पादन को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और परिणामोन्मुखी बनाना है। अब तक जिला मुख्यालय पर केंद्रित रहने वाले मुकदमों की सुनवाई अब स्थानीय स्तर पर हो सकेगी, जिससे जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण होगा और बकायेदारों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की रफ्तार तेज होगी।
